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प्रदूषण नियंत्रण के लिए बीएस-3 वाहनों पर लग सकती रोक : सुप्रीम कोर्ट

Mon, 27 Mar 2017 08:19 AM IST
amarujala.com, presented by- संदीप भट्ट
amarujala.com, presented by- संदीप भट्ट Updated Mon, 27 Mar 2017 08:19 AM IST
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Companies Do not become constrained in implementing BS-4 : Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट ने वाहन कंपनियों से सरकार द्वारा प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए किए जा रहे उपायों में बीएस-थ्री (भारत स्टेज-तीन) उत्सर्जन मानक वाले वाहनों की बिक्री के जरिये अड़चन नहीं बनने को कहा है। वाहन कंपनियों  के पास बीएस-3 वाहनों का स्टॉक बना हुआ है।
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सुप्रीम कोर्ट वाहन मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों की उस याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें 8.24 लाख बीएस-3 वाहनों के भंडार को निकालने की अनुमति देने की अपील की गई है। न्यायालय ने संकेत दिया कि वह या तो ऐसे वाहनों के पंजीकरण पर रोक लगाएगा या फिर प्रदूषण की वजह से स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान के लिए जुर्माना लगाएगा।
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जस्टिस मदन बी लोकुर तथा जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा, ‘केंद्र सरकार ने बीएस-4 (भारत स्टेज-चार) ईंधन के उत्पादन के लिए टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन पर करोड़ों रुपये खर्च किए हैं। कंपनियों  को 8.2 लाख बीएस-3 वाहनों की बिक्री करने के जरिए सरकार के इन प्रयासों को नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।’ इस मामले में अगली सुनवाई 27 मार्च को होगी।
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बीएस-4 उत्सर्जन मानक एक अप्रैल से अस्तित्व में आ रहे हैं। वाहन कंपनियों  के पास बीएस-3 उत्सर्जन वाले वाहनों का भंडार है। इसी वजह से वाहन कंपनियों ने इस स्टॉक को निकालने की अनुमति मांगी है। सुनवाई के दौरान पीठ ने वाहन कंपनियों  से कहा कि उसके समक्ष तीन विकल्प हैं। या तो बीएस-3 वाहनों का पंजीकरण पूरी तरह रद्द कर दिया जाए या तो फिर उनके पंजीकरण की अनुमति दी जाए लेकिन प्रमुख शहरों में उनको चलाने पर रोक लगा दी जाए।

इसके अलावा एक अन्य विकल्प यह है कि स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान के मद्देनजर कंपनियों पर जुर्माना लगाया जाए और वे सरकार द्वारा ईंधन के उन्नयन पर खर्च हुए किए गए पैसे की इसके जरिए भरपाई करें।

कोर्ट ने कहा, हमारे समक्ष हैं तीन विकल्प

Companies Do not become constrained in implementing BS-4 : Supreme Court
court shimla
पहला विकल्प है कि बीएस-3 वाहनों के पंजीकरण पर रोक लगा दी जाए। दूसरा विकल्प है कि बीएस-3 वाहनों को प्रमुख शहरों में चलाने पर रोक लगा दी जाए। इसके अलावा तीसरा विकल्प है कि बीएस-3 वाहनों की वजह से लोगों के स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान के लिए कंपनियों पर जुर्माना लगाया जाए।

बीएस-4 ईंधन की प्रौद्योगिकी पर खर्च हुआ है 20 हजार करोड़
- मामले में अदालत की मदद के लिए नियुक्त न्याय मित्र ने सुनवाई के दौरान बीएस-3 वाहनों के उत्पादन और बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगाने की अपील की। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने बीएस-4 ईंधन के उत्पादन के लिए प्रौद्योगिकी के उन्नयन पर 18,000 से 20,000 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।

कंपनियों के पास है 8.24 लाख बीएस-3 वाहनों का स्टॉक
- सुनवाई के दौरान वाहन निर्माता कंपनियों ने कहा कि उनके पास 8.24 लाख बीएस-3 वाहनों का स्टॉक है। इनमें 96,000 वाणिज्यिक वाहन, छह लाख से अधिक दोपहिया वाहन और करीब 40, 000 तिपहिया वाहन हैं। कंपनियों ने अदालत से इन वाहनों की बिक्री की अनुमति मांगी है। 
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