कर्नाटक सरकार का गिरना लगभग तय, सीएम कुमारस्वामी और कांग्रेस नेताओं की बैठक
- सुप्रीम कोर्ट ने स्पीकर को उचित समय में इस्तीफे पर फैसला लेने को कहा।
- सुप्रीम कोर्ट ने बागी विधायकों को विश्वास मत में शामिल होने का फैसला उनकी मर्जी पर छोड़ा।
- कुमारस्वामी अंकगणित के लिहाज से बहुमत साबित करने की स्थिति में नहीं।
- बागी विधायकों ने कहा- विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा लेने का कोई सवाल ही नहीं उठता।
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कर्नाटक में कुमारस्वामी सरकार बचाने और गिराने की आखिरी कोशिशें तेज हो गई है। मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी अंकगणित के लिहाज से बहुमत साबित करने की स्थिति में नहीं है, इसलिए सरकार का गिरना लगभग तय है। हालांकि अभी कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन और भाजपा की ओर से शह मात का खेल जारी है। सीएम कुमारस्वामी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक कर रहे हैं।
इससे पहले मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी भगवान की शरण में पहुंचे। उन्होंने बुधवार सुबह शंकरपुरम स्थित श्री श्रींगेरी मठ पहुंचकर पूजा की। हालांकि सुप्रीम कोर्ट का फैसला उन्हें झटका देने वाला आया है। फैसला आने के बाद से विपक्ष भी उन्हें इस्तीफा देने के लिए कह रहा है।
Chief Minister of Karnataka, HD Kumaraswamy offers prayers at Sri Sringeri Shankara Mutt in Shankarapuram. #Karnataka pic.twitter.com/qzRyA2tb5s
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) July 17, 2019
क्या कहता है गणित?
कर्नाटक विधानसभा में कुल 224 सीटें हैं। अगर स्पीकर को हटा दिया जाए सीटों की संख्या 223 हो जाती है। ऐसे में बहुमत के लिए 112 सीटें जरूरी हैं। मौजूदा गठबंधन सरकार के पास 116 सीट (कांग्रेस 78 +जेडीएस 37 + बसपा 1) हैं।
अगर कल विश्वास मत में इस्तीफा देने वाले 16 विधायक शामिल नहीं होते हैं तो सदन में 207 सीटों पर ही वोटिंग होगी। जिसमें बहुमत के लिए 104 सीट जरूरी हैं। ऐसे में कुमारस्वामी सरकार के पास केवल 100 ही सीटें बचती हैं। जबकि भाजपा के पास 105 विधायकों और दो निर्दलीय को मिलाकर कुल 107 सीटें हैं।
पीछे हटने का सवाल नहीं, विधानसभा की कार्यवाही में नहीं लेंगे हिस्सा : बागी विधायक
कर्नाटक राजनीतिक संकट पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश की सराहना करते हुए बागी विधायकों ने बुधवार को कहा कि विधानसभा से अपने इस्तीफे पर अब पीछे हटने का सवाल नहीं है और न ही वे विधानसभा सत्र में हिस्सा लेंगे। ये बागी विधायक मुंबई में डेरा डाले हुए हैं।कर्नाटक विधानसभा में सरकार के बहुमत साबित करने से एक दिन पहले मीडिया में जारी एक वीडियो संदेश में बागी कांग्रेस विधायक बी सी पाटिल ने कहा, ‘माननीय उच्चतम न्यायालय के फैसले से हम खुश हैं और इम इसका सम्मान करते हैं।’
बागी विधायकों को विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिये बाध्य नहीं किया जा सकता है
उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को निर्देश दिया कि कांग्रेस-जेडीएस के 15 बागी विधायकों को विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिये बाध्य नहीं किया जा सकता है। मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी 18 जुलाई को सदन में बहुमत साबित करने वाले हैं। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष अपने द्वारा तय समयसीमा के अंदर बागी विधायकों के इस्तीफे पर फैसला लेने के लिये स्वतंत्र हैं।
व्हिप जारी कर सकती है कांग्रेस: शिवकुमार
वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार ने कहा कि इस ऐतिहासिक फैसले ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को ताकत दी है। भाजपा के कुछ दोस्त गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं कि व्हिप मान्य नहीं है, लेकिन पार्टी व्हिप जारी कर सकती है और दलबदल विरोधी कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई कर सकती है।इस्तीफा दें कुमारस्वामी: येदियुरप्पा
वहीं कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा का इस फैसले पर कहना है, निश्चित रूप से सरकार नहीं चलेगी क्योंकि उनके पांस नंबर नहीं हैं। वहीं विधानसभा स्पीकर का इस मामले पर कहना है कि, मैं फैसला सुनाऊंगा जो संविधान, कोर्ट और लोकपाल के विपरीत नहीं होगा।
येदियुरप्पा ने आगे कहा, कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने अपना जनादेश खो दिया है, जब बहुमत नहीं है तो उन्हें कल इस्तीफा देना होगा। मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करता हूं, ये संविधान और लोकतंत्र की जीत है। ये बागी विधायकों की नैतिक जीत है। ये केवल एक अंतरिम आदेश है। सुप्रीम कोर्ट भविष्य में स्पीकर की शक्तियां तय करेगा।
भाजपा नेता जगदीश शेट्टर का कहना है, एचडी कुमारस्वामी के कारण राज्य में अराजकता है। उन्हें इस फैसले के बाद तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए और विश्वास मत के लिए इंतजार करना चाहिए।
बागी विधायकों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी का कहना है, कल होने वाले विश्वास मत को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दो जरूरी बातें कही हैं- 15 विधायकों को कल विधानसभा में पेश होने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। सभी 15 विधायकों को कल सदन जाने या ना जाने की छूट दी गई है।
रोहतगी ने आगे कहा, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उनके खिलाफ (बागी विधायक) तीन लाइन का जारी हुआ व्हिप ऑपरेटिव नहीं है। दूसरी बात, अध्यक्ष को इस्तीफे के बारे में फैसला करने का समय दिया गया है कि वह कब और क्या फैसला करना चाहते हैं।