फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Clouds burst every eight hours in last 15 days, scientists said- warning of a big catastrophe?

Cloud Burst: बीते 15 दिनों में हर आठ घंटे में फटे बादल, वैज्ञानिक बोले- ये बड़ी तबाही की चेतावनी तो नहीं!

Mon, 31 Jul 2023 07:16 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Mon, 31 Jul 2023 07:16 PM IST
विज्ञापन
सार
Cloud Burst: मौसम विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें सबसे ज्यादा बादल फटने की घटना हिमाचल प्रदेश में सामने आई है। हिमाचल प्रदेश के जिन इलाकों में सबसे ज्यादा ऐसी घटनाएं हुई हैं, उनमें शिमला जिले के दूरदराज इलाकों समेत कुल्लू के इलाके शामिल हैं...
loader
Clouds burst every eight hours in last 15 days, scientists said- warning of a big catastrophe?
Cloud Burst - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

विस्तार

बीते कुछ सालों में यह पहला मौका है, जब 15 दिनों के भीतर पहाड़ी राज्यों में खासतौर से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर में हर रोज तीन जगह बादल फटे हैं। औसतन हर 8 घंटे में एक जगह बादल फटने की बड़ी घटना सामने आई है। अचानक बादल फटने की घटनाओं को लेकर न सिर्फ मौसम विभाग अलर्ट हुआ है, बल्कि अगले कुछ दिनों के लिए पहाड़ी राज्यों में अलर्ट भी जारी कर दिया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले कुछ दिनों में पहाड़ी राज्यों जिसमें उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर के ऊपरी हिस्सों में बादल फटने से लेकर तेज बारिश की आशंका बनी हुई है। इसलिए विभाग ने राज्यों समेत आपदा प्रबंधन की टीम और केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय को भी इस बारे में अवगत करा दिया है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरीके की घटना कोई समान्य घटना नहीं है। ऐसे ही हालात बने रहे तो बारिश से और बड़ी तबाही मच सकती है।

मौसम विभाग में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक बीते 15 दिनों के भीतर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग इलाकों में तकरीबन 45 जगह पर बादल फटने की घटनाएं सामने आई हैं। मौसम विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें सबसे ज्यादा बादल फटने की घटना हिमाचल प्रदेश में सामने आई है। हिमाचल प्रदेश के जिन इलाकों में सबसे ज्यादा ऐसी घटनाएं हुई हैं, उनमें शिमला जिले के दूरदराज इलाकों समेत कुल्लू के इलाके शामिल हैं। हिमाचल प्रदेश में 15 दिनों के भीतर तकरीबन 26 से ज्यादा बादल फटने की अलग-अलग इलाकों में घटनाएं सामने आई हैं। इसी तरह उत्तराखंड में भी बीते 15 दिनों के भीतर तकरीबन 13 जगहों पर बादल फटने और उसकी वजह से मची तबाही की सूचनाएं आई हैं। जबकि जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग इलाकों में बीते 15 दिनों के भीतर 9 जगहों पर बादल फटे हैं।

हिमाचल प्रदेश में लगातार बने हैं बदहाल हालात

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले 16 दिनों के भीतर सिर्फ कुल्लू जिले में ही 12 ज्यादा बार बादल फटने की घटनाएं हो चुकी हैं। जबकि हिमाचल के अलग-अलग इलाकों में भी तकरीबन 15 दिनों के भीतर 19 से 21 जगहों पर छोटी बड़ी बादल फटने की घटनाएं हुई हैं। मौसम विभाग के आंकड़ों में दर्ज ऐसी घटनाओं में मणिकर्ण घाटी के पुलगा नाला,  लगघाटी के खणीपांद और फलाण में भी बादल फटा था। मौसम विभाग के अधिकारियों के मुताबिक लगघाटी के गोरूडुग में भी बादल फटा। खराहल घाटी के तहत आने वाले काईस नाला और न्योली नाला में भी बादल फटे। इसके साथ ही गड़सा के खोड़ाआगे, शाट नाला, मनाली के जगतसुख, करजां नाला, सैंज के पाशी में बादल फटने की घटनाएं सामने आई हैं। हिमाचल के सिर्फ इसी इलाके में नहीं बल्कि शिमला जिले के दूरदराज इलाकों में भी बादल फटने की सूचना मौसम विभाग को लगातार मिल रही हैं। मौसम विभाग के मुताबिक अभी हिमाचल प्रदेश के ऐसे ही कुछ इलाकों में बादल फटने की घटनाएं होने का अनुमान बना हुआ है।

जम्मू कश्मीर में भी हालात नहीं हैं बेहतर

मौसम विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक सुरेंद्र देसाई कहते हैं कि दो दिन पहले जम्मू कश्मीर के गांदरबल जिले में बादल फटने की घटना हुई थी। इसके अलावा जुलाई महीने के भीतर ही जम्मू कश्मीर के डोडा जिले के गंदो मे भी बादल फटने से भीषण बाढ़ आई थी और कई पुल और रास्ते बह गए थे। इस दौरान एनडीआरएफ समेत स्थानीय प्रशासन को बादल फटने की घटना के बाद फंसे हुए लोगों को निकालने के राहत कार्य भी किए गए थे। मौसम विभाग के मुताबिक हिमाचल प्रदेश की सीमा के पास सटे कलजुगासर गांव में भी हाल में बादल फटे थे, जिससे कई गांव अब सड़क रास्ते से कट गये हैं और उनका आवागमन बाधित हो गया था। इससे पहले शुक्रवार को ही जम्मू कश्मीर को सुबह तड़के तत्तापानी, संगलदान में भारी बारिश के बाद भूस्खलन के कारण चार घर क्षतिग्रस्त हो गए। मौसम विभाग के अधिकारियों के मुताबिक बीते कुछ दिनों में जिस तरीके की घटनाएं सामने आ रही हैं उससे हालात बहुत जल्द सामान्य होने में वक्त लगेगा।

देश के अलग-अलग इलाकों में मची बारिश से तबाही

जुलाई के महीने में जिस तरीके से हिमाचल प्रदेश उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर के ऊपरी इलाकों में बादल फटने से लेकर तेज बारिश हुई है और उसके अभी आसार आगे भी बने हुए हैं। मौसम विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा कहते हैं कि पहाड़ों में जिस तरीके की हालात बने हैं, उसे लेकर पहले से ही आगाह किया जा चुका है। खासतौर से हिमालयन रीजन में मौसम की ऐसी मार अगले तीन दिनों तक बनी रहने की संभावना है। मौसम विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक सुरेंद्र देसाई कहते हैं कि जिस तरीके की परिस्थितियां पहाड़ों पर बनी हैं, उससे अनुमान यही लगाया जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में भी लगातार कुछ कुछ जगहों पर बादल फटने या तेज बारिश की आशंका बनी हुई है।

बड़ी चेतावनी है लगातार बादलों का फटना

मौसम वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों का मानना है कि जिस तरीके से बीते कुछ दिनों से पहाड़ों पर बादल फटने की घटनाएं हुई हैं, वह कोई सामान्य घटना नहीं है। पर्यावरणविद और मौसम पर करीब से नजर रखने वाली इंटरनेट सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट चेंज की चेतना वैष्णवी कहती हैं कि लगातार पहाड़ों पर बादल फटने की घटना बिल्कुल सामान्य घटना नहीं मानी जा सकती है। वह कहती हैं बीते कुछ सालों में होने वाली बारिश को अगर आप देखेंगे, तो पाएंगे कि पूरे मानसून की बारिश चंद दिनों में ही हो रही है। उनका कहना है कि बारिश का पुराना ट्रेंड धीरे-धीरे बदलता जा रहा है। उनका तर्क है कि क्लाइमेट चेंज की वजह से इस तरीके के मौसम में अचानक परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। चेतना कहती हैं कि चाहे केरल में आई अचानक बाढ़ हो या केदारनाथ में आई बाढ़। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में बीते कुछ दिनों से तबाही मचा रहे बादल इस ओर इशारा कर रहे हैं कि सब कुछ सामान्य नहीं है। पर्यावरणविद डॉक्टर जेपी तनेजा कहते हैं कि बारिश में होने वाले इस परिवर्तन को चेतावनी के तौर पर ही लेना चाहिए।

इसको कहते हैं बादल का फटना

मौसम वैज्ञानिक सुरेंदर देसाई कहते हैं कि बादल फटने का मतलब यह बिल्कुल नहीं होता है कि आकाश में बना हुआ बादल एकदम से गुब्बारे की तरह फट कर पूरा पानी एक जगह पर उड़ेल दे। सुरेंद्र देसाई कहते हैं बादल फटने की घटना तब होती है जब एक साथ बहुत ज्यादा नमी वाले बादल एक जगह पर ही रुक जाते हैं। चूंकि बादलों में इतनी ज्यादा नमी होती है और बादलों के रुकने से बूंदों का वजन बढ़ने लगता है। ऐसी दशा में बादलों का घनत्व भी बढ़ जाता है। इन हालातों में मूसलाधार बारिश शुरू हो जाती है, जिसको बादल फटना या क्लाउडबर्स्ट कहते हैं। मौएस वैज्ञानिक सुरेंद्र देसाई कहते हैं कि पहाड़ों पर यह घटनाएं इसलिए सबसे ज्यादा होती है क्योंकि उनकी ऊंचाई के बीच में बादल फस जाते हैं और अपनी इसी प्रक्रिया की वजह से बादल फट जाते हैं। वह कहते हैं कि बादल फटने की घटना के दौरान 100 मिलीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पानी बरसता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed