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क्लाइमेट स्ट्राइक: 106 देशों के लाखों बच्चे हड़ताल पर, कोशिश...अपना भविष्य बचाने की
Sat, 16 Mar 2019 08:23 AM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Priyesh Mishra
Updated Sat, 16 Mar 2019 08:23 AM IST
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क्लाइमेट स्ट्राइक में शामिल बच्चे
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दुनियभर के बच्चों ने हड़ताल पर रहकर लगातार प्रदूषित होती हमारी पृथ्वी के इतिहास में शुक्रवार का दिन दर्ज करवाया। करीब 106 देशों के लाखों बच्चे स्कूल न जाकर सड़कों पर उतरे। हाथों में बैनर-पोस्टर ले प्रदर्शन किए। ताकि बड़ों को जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के प्रति जागरूक कर सकें, जिन्हें वास्तव में नीतियां बनानी हैं।
स्वीडन में 2018 के आम चुनाव सर पर थे और कक्षा नौ में पढ़ रही क्रेटा थनबर्ग ने निश्चय किया कि वह तबतक स्कूल नहीं जाएंगी, जब तक राजनेता पेरिस समझौते के तहत कार्बन उत्सर्जन कम करने और जलवायु नियंत्रण के ठोस वादे नहीं करते। उसकी हड़ताल नौ सितंबर तक जारी रही।
क्रेटा को देख नवंबर 2018 में ऑस्ट्रेलिया , ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, कनाडा, नीदरलैंड, जर्मनी, फिनलैंड, डेनमार्क, जापान, स्वीट्जरलैंड, इंग्लैंड और अमेरिका के 270 शहरों के बच्चे भी हड़ताल में शामिल हुए।
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ऐसे हुई शुरुआत
स्वीडन में 2018 के आम चुनाव सर पर थे और कक्षा नौ में पढ़ रही क्रेटा थनबर्ग ने निश्चय किया कि वह तबतक स्कूल नहीं जाएंगी, जब तक राजनेता पेरिस समझौते के तहत कार्बन उत्सर्जन कम करने और जलवायु नियंत्रण के ठोस वादे नहीं करते। उसकी हड़ताल नौ सितंबर तक जारी रही।
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क्रेटा को देख नवंबर 2018 में ऑस्ट्रेलिया , ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, कनाडा, नीदरलैंड, जर्मनी, फिनलैंड, डेनमार्क, जापान, स्वीट्जरलैंड, इंग्लैंड और अमेरिका के 270 शहरों के बच्चे भी हड़ताल में शामिल हुए।
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भारत के 36 शहरों में प्रदर्शन
क्लाइमेट चेंज को लेकर भारत के 36 शहरों में भी प्रदर्शन आयोजित हुए। बड़े शहर, सभी मेट्रो के साथ-साथ पुणे, हैदराबाद, बंगलूरु, कोलकाता आदि शहर में प्रदर्शन हुए।ये हैं 3 मांगे
- 100 फीसदी स्वच्छ उर्जा
- जीवाश्म ईंधन को जमीन से निकालने की प्रक्रिया पर रोक
- जलवायु परिवर्तन से प्रभावित सभी लोगों और जीवों की मदद के लिए नीति
इस बार सब साथ
- विश्व का वैज्ञानिक समुदाय इनके समर्थन में है। 350 डच वैज्ञानिकों ने खुला खत लिखा है।
- इंग्लैड के 224 वैज्ञानिक व अकादमी क्षेत्र के गणमान्यों का समर्थन। जर्मनी में 700 शोधार्थी समर्थन में आए।
- 20000 वैज्ञानिकों ने बच्चों के साथ मिलकर साइंटिस्ट फॉर फ्यूचर नाम से संगठन बनाया।