जस्टिस रमण की खरी खरी : जजों के पद रिक्त होना मुश्किल चुनौती, कानून मंत्री रिजिजू को लेकर मजाकिया अंदाज में की टिप्पणी
सीजेआई ने कहा कि हाईकोर्टों में जजों के रिक्त पदों को वे मुश्किल चुनौती मानते हैं, लेकिन इन्हें भरने का काम तेजी से शुरू किया गया है। अभी 41 फीसदी पदों को भरा गया है। अगले एक माह में हमें 90 फीसदी रिक्ति पदों पर नियुक्ति की उम्मीद है।
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देश के प्रधान न्यायाधीश एनवी रमण ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से आयोजित अभिनंदन समारोह में खरी-खरी बातें कहीं। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालयों में बड़ी संख्या में रिक्त पदों को मुश्किल चुनौती के रूप में लेते हैं। इन पदों का भरने के लिए तेजी से कदम बढ़ाए हैं। मेरे द्वारा पदभार संभालने के बाद सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने अब तक 82 जजों के नामों की सिफारिश की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार कॉलेजियम द्वारा मंजूर किए गए नामों को जल्द मंजूरी देगी। अपने भाषण के दौरान सीजेआई ने कानून मंत्री किरण रिजिजू को लेकर मजाकिया अंदाज में टिप्पणी की।
सीजेआई ने कहा कि नेशनल ज्यूडिशियल इंफ्रास्ट्रक्चर कार्पोरेशन के गठन के व्यापक प्रस्ताव की तैयारी की जा रही है। इसे सरकार को जल्द भेजा जाएगा। जस्टिस रमण ने कहा कि न्यायिक तंत्र कई मुश्किल चुनौतियों का सामना कर रहा है। इनमें बुनियादी ढांचे, प्रशासनिक स्टाफ की कमी, जजों के बड़ी संख्या में रिक्त पद जैसी समस्याएं शामिल हैं।
शीर्ष अदालत में नौ जजों की नियुक्तियों के लिए सीजेआई ने प्रधानमंत्री व कानून मंत्री को धन्यवाद दिया। कार्यक्रम में कानून मंत्री किरण रिजिजू भी मौजूद थे। सीजेआई ने कहा कि कॉलेजियम द्वारा सुझाए गए इन नामों को जेट स्पीड से मंजूरी दी गई। उच्च अदालतों में रिक्त पदों को अर्जेंट आधार पर भरा जा रहा है। सरकार व कॉलेजियम के साझा प्रयासों से सुप्रीम कोर्ट में रिक्त पद की संख्या मात्र एक रह गई है।
सीजेआई ने कहा, 'मेरे द्वारा पदभार संभालने के बाद कॉलेजियम ने विभिन्न हाईकोर्टों में बतौर जजों की नियुक्ति के लिए 82 नामों की सिफारिश की है। उम्मीद करता हूं कि सरकार इन्हें उसी तरह मंजूरी देगी, जिस तरह सुप्रीम कोर्ट के नौ जजों की नियुक्ति को दी गई। इस तरह हम सभी उच्च न्यायालयों में करीब 41 फीसदी रिक्त पदों को भर देंगे। इसके अगले एक माह में हम 90 फीसदी रिक्तियों को भरे जाने की उम्मीद करते हैं।
इस मौके पर सीजेआई रमण ने कॉलेजियम के अपने सहयोगी जजों- जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ व जस्टिस नागेश्वर राव को भी सक्रिय व रचनात्मक सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।
न्यायिक तंत्र में महिलाओं के कम प्रतिनिधित्व पर सीजेआई ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आजादी के 75 साल बाद सभी स्तरों पर महिलाओं के लिए कम से कम 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व की उम्मीद की जानी चाहिए, लेकिन मुझे यह स्वीकार करना होगा कि बड़ी मुश्किलों के बाद अब हमने सर्वोच्च न्यायालय में महिलाओं का केवल 11 प्रतिशत प्रतिनिधित्व हासिल किया है।
रिजिजू मुझसे मिले तो लगा कि वो कॉलेज के छात्र हैं
सीजेआई रमण ने कानून मंत्री किरण रिजिजू की कामकाज की शैली पर भी मजाकिया अंदाज में टिप्पणी की। उन्होंने कहा, ' जब वे (रिजिजू) मुझसे मिले तो लगा कि वे कॉलेज के छात्र हैं। लेकिन मैं उनकी उम्र नहीं पूछना चाहता। कानून मंत्री ने बताया कि मैंने लॉ डिग्री ली है, लेकिन कानून का अभ्यास करने का अनुभव नहीं है, तो मैंने उनसे यही कहा कि यह तो और भी अच्छा है, क्योंकि तब आप जजों के प्रति पूर्वाग्रह नहीं रखेंगे।'
रिजिजू ने की सीजेआई की तारीफ में यह कहा
अपने भाषण में केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू ने कहा, 'जब मैं सीजेआई रमण से पहली बार मिला तो मैं उन्हें अच्छी तरह से नहीं जानता था। मैंने उनके बारे में अपने दोस्तों और मीडिया से सुना था। अपनी पहली बातचीत में मैंने महसूस किया कि हमारे पास ऐसे सीजेआई हैं, जिन पर हमें पूरा भरोसा और आस्था है। सीजेआई रमण उच्च सत्यनिष्ठा के व्यक्ति साबित हुए हैं जो न्यायपालिका के लिए एक नया सवेरा हैं।'
जस्टिस गवई ने सीजेआई रमण की तुलना सचिन से की
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जस्टिस बीआर गवई ने सीजेआई एनवी रमण को असाधारण बताया और उनकी तुलना मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर से की। एक बार में ही सुप्रीम कोर्ट में नौ जजों की नियुक्ति का जिक्र करते हुए कहा कि वह एक के बाद एक रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं।
जस्टिस गवई ने कहा कि जस्टिस रमण भारतीय न्यायपालिका के एक सच्चे टीम लीडर हैं। उन्हें सचमुच सामान्य लोगों और वंचितों की चिंता है। वह सभी जजों से अपने भाई की तरह व्यवहार करते हैं। वह एक महान इंसान हैं।
बच्ची के पत्र को याचिका में बदला : जस्टिस शरण
कार्यक्रम में जस्टिस विनीत शरण ने कहा, 'विभिन्न हाईकोर्ट में एक बार में 68 जजों की नियुक्ति की सिफारिश सीजेआई रमण की ओर से उठाया गया एक बड़ा कदम है। सीजेआई ने दस साल की एक बच्ची के पत्र को भी जनहित याचिका में बदल दिया।' बता दें, हाल ही में एक लड़की ने सीजेआई को कोर्टरूम सुनवाई शुरू करने के लिए पत्र लिखा था। उसने पत्र में कहा था कि हर तरह के व्यवसाय और स्कूल चालू हो गए हैं तो कोर्ट क्यों नहीं?