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CJI: सीजेआई चंद्रचूड़ ने न्यायपालिका को समावेशी बनाने पर दिया जोर; न्याय तक सर्व सुलभ पहुंच को लेकर कही यह बात

Tue, 15 Aug 2023 07:23 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Tue, 15 Aug 2023 07:23 PM IST
सार

सीजेआई ने कहा कि शीर्ष अदालत का उद्देश्य एक ऐसी न्यायिक प्रणाली बनाना है जो लोगों के लिए अधिक सुलभ और लागत प्रभावी हो। साथ ही इसमें प्रौद्योगिकी का भी पूरा योगदान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें न्याय में प्रक्रियात्मक बाधाओं को दूर करने के लिए प्रौद्योगिकी की पूरी क्षमता का उपयोग करना होगा।

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CJI D Y Chandrachud says Greatest challenge before judiciary is to eliminate barriers to accessing justice
सीजेआई चंद्रचूड़ - फोटो : ANI

विस्तार

सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने न्यायपालिका को समावेशी बनाने और समाज के अंतिम व्यक्ति की न्याय तक पहुंच पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि भारतीय न्यायपालिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती न्याय तक पहुंच में आने वाली बाधाओं को खत्म करना है। साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि न्यायपालिका समावेशी हो और पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति तक पहुंच योग्य हो। सीजेआई ने यह बातें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सुप्रीम कोर्ट परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम में कही। 

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इस दौरान सीजेआई चंद्रचूड़ ने नागरिकों को क्षेत्रीय भाषाओं में अपने सभी 35,000 फैसले उपलब्ध कराने के शीर्ष अदालत की कोशिशों के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि अब तक शीर्ष अदालत के 9,423 निर्णयों का अनुवाद क्षेत्रीय भाषाओं में किया जा चुका है। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि अदालतों को सुलभ और समावेशी बनाने के लिए प्राथमिकता के आधार पर बुनियादी ढांचे में सुधार की जरूरत है।
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सीजेआई ने कहा कि शीर्ष अदालत का उद्देश्य एक ऐसी न्यायिक प्रणाली बनाना है जो लोगों के लिए अधिक सुलभ और लागत प्रभावी हो। साथ ही इसमें प्रौद्योगिकी का भी पूरा योगदान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें न्याय में प्रक्रियात्मक बाधाओं को दूर करने के लिए प्रौद्योगिकी की पूरी क्षमता का उपयोग करना होगा। इसी क्रम में हम ई-कोर्ट परियोजना के तीसरे चरण को लागू कर रहे हैं।
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ई-कोर्ट परियोजना के तीसरे चरण को केंद्र से 7,000 करोड़ रुपये की बजटीय मंजूरी मिल गई है। इस परियोजना का उद्देश्य देश भर की सभी अदालतों को आपस में जोड़कर, कागज रहित अदालतों के बुनियादी ढांचे की स्थापना करके अदालतों के कामकाज में क्रांतिकारी बदलाव लाना चाहता है। 

 उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य एक ऐसी न्यायिक प्रणाली बनाना है जो न्याय चाहने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए अधिक सुलभ, लागत प्रभावी और किफायती हो। हम पहले से ही अदालत परिसर और अदालत सेवाओं को विकलांगों के अनुकूल बनाने का प्रयास कर रहे हैं। 

इस कार्यक्रम के दौरान सीजेआई और कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के अलावा, शीर्ष अदालत के कई न्यायाधीश, अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी, एससीबीए के पदाधिकारी, इसके अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता आदीश सी अग्रवाल और सचिव रोहित पांडे सहित उपस्थित थे।
 

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