बांग्लादेशियों से अधिक पाकिस्तानियों के भारतीय नागरिक बनने की राह खोलेगा नागरिकता बिल
- लांग टर्म वीजा (एलटीवी) वाले लोगों को बिल से मिलेगा ज्यादा लाभ
- 2011 से 9 जनवरी 2019 तक 187 बांग्लादेशियों का जारी हुए एलटीवी
- 2011 से 9 जनवरी 2019 तक 34,817 पाकिस्तानियों को मिला एलटीवी
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असम समेत पूर्वोत्तर के तमाम राज्यों में अशांति का कारण बन गया नागरिकता संशोधन बिल वास्तव में उन बांग्लादेशियों को लाभ नहीं देने जा रहा है, जिनके घुसपैठ कर पूर्वोत्तर भारत में घुस आने से वहां की जनसांख्यिकी बदल जाने के आरोप लगाए जाते रहे हैं। यदि सरकारी आंकड़ों को देखा जाए तो इस बिल से बांग्लादेशियों से ज्यादा पाकिस्तान से आने वालों को लाभ मिलेगा, जिनके पास ज्यादा संख्या में लांग टर्म वीजा (एलटीवी) मौजूद हैं।
बता दें कि नागरिकता संशोधन बिल के तहत भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने की योग्यता और एलटीवी पाने के लिए योग्यता एक जैसी ही हैं। ऐसे में एलटीवी धारक आवेदक के भारतीय नागरिकता हासिल करने के ज्यादा आसार हैं। गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, 2011 से 9 जनवरी, 2019 तक मंत्रालय ने महज 187 बांग्लादेशियों को एलटीवी जारी किया।
जबकि इसी दौरान पाकिस्तान से आकर एलटीवी पाने वालों की संख्या 34,817 रही थी। इस अधिकारी के मुताबिक, नागरिकता संशोधन बिल के तहत 31 दिसंबर, 2014 तक भारत आ चुके लोगों को ही 11 साल के बजाय 6 साल तक देश में रहने पर नागरिकता दी जाएगी। ऐसे में बांग्लादेशियों की ज्यादा संख्या को इसका लाभ होने की बात मानी ही नहीं जा सकती।
राजस्थान में रह रहे हैं सबसे ज्यादा पाकिस्तानी शरणार्थी
गृह मंत्रालय के मुताबिक, पाकिस्तान से भारत आकर एलटीवी हासिल करने वालों में 1 जनवरी, 2015 से 14 जनवरी, 2019 के बीच सबसे ज्यादा लोग राजस्थान में बसे हैं। यहां 15107 एलटीवी जारी किए गए हैं, जबकि गुजरात में 1560, मध्य प्रदेश में 1444, महाराष्ट्र में 599, दिल्ली में 581, छत्तीसगढ़ में 342 और उत्तर प्रदेश में 101 एलटीवी ही जारी किए गए हैं।