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अफगानिस्तान से आए गैर-मुस्लिम शरणार्थियों के लिए उम्मीद की किरण बना नागरिकता विधेयक

Mon, 07 Jan 2019 02:23 AM IST
गौरव द्विवेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव द्विवेदी Updated Mon, 07 Jan 2019 02:23 AM IST
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Citizenship Bill, a ray of hope for non-Muslim refugees from Afghanistan

अफगानिस्तान के गृह युद्ध में अपने दो बेटों को गंवाने के बाद 10 साल पहले भागकर भारत आईं जसवंत कौर के साथ हजारों हिंदू और सिख भारतीय नागरिकता के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। अब इतने सालों बाद उन्हें सोमवार को संसद में पेश होने जा रहे नागरिकता संशोधन विधेयक से कुछ उम्मीदें बंधी हैं। सोमवार को अपनी रिपोर्ट सौंपे जाने के दौरान संयुक्त संसदीय समिति नागरिकता (संशोधन) विधेयक पेश करने की सिफारिश कर सकती है। इसमें पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले गैर-मुस्लिम शरणार्थियों के लोगों के लिए नागरिकता प्रक्रिया आसान बनाने का प्रावधान है। 

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दरअसल, कौर सहित अनेक महिलाएं 60 से अधिक उम्र की हो चुकी है। वहीं परिवार में किसी पुरुष का न होना उनकी समस्याएं बढ़ाने का ही काम करता है। कौर भारत में वीजा पर रहती हैं जिसका हर दो साल पर नवीनीकरण कराना होता है। हाल में सरकार द्वारा दीर्घकालिक वीजा की नीति लाए जाने के बाद से पूरी प्रक्रिया और जटिल हो गई है।
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‘खालसा दीवान सोसायटी’ के दिल्ली अध्यक्ष मनोहर सिंह ने कहा कि इस प्रक्रिया में अब शरणार्थियों को दो भारतीय नागरिकों की गारंटी हासिल करनी होती है जो आवेदक के किसी अपराध में पकड़े जाने या नियमों का उल्लंघन करने पर जिम्मेदार होंगे। उन्होंने कहा कि इसकी तुलना यूरोप और पश्चिमी देशों की स्थिति से कीजिए जहां अफगान शरणार्थियों को पांच साल में रेजीडेंसी मिलती है।
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क्या है नागरिकता (संशोधन) विधेयक में :

नागरिकता अधिनियम 1955 में संशोधन के लिए नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2016 पेश किया जाएगा। अन्य बातों के अलावा संशोधन विधेयक में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई को भारत की नागरिकता प्रदान करना शामिल है। ऐसे लोगों को 12 साल की जगह 6 वर्ष भारत में रहने के आधार पर नागरिकता दी जाएगी। भले ही ऐसे लोगों के पास कोई उचित दस्तावेज हो या नहीं।


आत्मघाती हमले में मारा गया तीसरा बेटा :

कौर का तीसरा बेटा जलालाबाद में आत्मघाती बम हमले में मारा गया था। इस हमले में हिंदू सिख समुदाय के अहम सदस्य भी मारे गये थे। जलालाबाद हमले के बाद जसवंत कौर के तीसरे बेटे की पत्नी तिरपाल कौर भी अपने चार बच्चों के साथ चार महीने पहले अपनी सास के पास पश्चिमी दिल्ली में आ गई।

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