{"_id":"5de8ca2f8ebc3e54a1340988","slug":"citizenship-amendment-bill-congress-will-talk-to-uddhav-thackeray","type":"story","status":"publish","title_hn":"नागरिकता संशोधन विधेयक पर महाविकास अघाड़ी में मतभेद, कांग्रेस सीएम उद्धव से करेगी बात","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
नागरिकता संशोधन विधेयक पर महाविकास अघाड़ी में मतभेद, कांग्रेस सीएम उद्धव से करेगी बात
Thu, 05 Dec 2019 02:43 PM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Priyesh Mishra
Updated Thu, 05 Dec 2019 02:43 PM IST
विज्ञापन
शरद पवार, उद्धव ठाकरे और बाला साहब थोराट
- फोटो : Social Media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नागरिकता संशोधन विधेयक को मोदी सरकार नौ दिसंबर को लोकसभा में चर्चा के लिए पेश करेगी। शिवसेना द्वारा विधेयक का समर्थन किए जाने के संकेत के बाद महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी (कांग्रेस-एनसीपी-शिवसेना गठबंधन) में मतभेद नजर आ रहे हैं।
कांग्रेस ने कहा कि न्यूनतम साझा कार्यक्रम में यह तय किया गया था कि राष्ट्रीय मुद्दों जैसे नागरिकता संशोधन विधेयक पर आम सहमति के बाद ही कोई कदम उठाया जाएगा। सूत्रों के अनुसार इस मामले को लेकर कांग्रेस महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से बात करेगी।
विज्ञापन
नागरिकता संशोधन विधेयक में क्या है प्रस्ताव?
नागरिकता संशोधन विधेयक में नागरिकता कानून, 1955 में संशोधन का प्रस्ताव है। इसमें अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्मों के शरणार्थियों के लिए नागरिकता के नियमों को आसान बनाना है।
वर्तमान में किसी व्यक्ति को भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए कम से कम पिछले 11 साल से यहां रहना अनिवार्य है। इस संशोधन के जरिए सरकार नियम को आसान बनाकर नागरिकता हासिल करने की अवधि को एक साल से लेकर छह साल करना चाहती है।
अगर यह विधेयक पास हो जाता है, तो अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के सभी गैरकानूनी प्रवासी हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई भारतीय नागरिकता के योग्य हो जाएंगे।
विज्ञापन
कांग्रेस ने कहा कि न्यूनतम साझा कार्यक्रम में यह तय किया गया था कि राष्ट्रीय मुद्दों जैसे नागरिकता संशोधन विधेयक पर आम सहमति के बाद ही कोई कदम उठाया जाएगा। सूत्रों के अनुसार इस मामले को लेकर कांग्रेस महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से बात करेगी।
विज्ञापन
Congress Sources: In the Common Minimum Program (of Congress-NCP-Shiv Sena) it was decided that stand on national issues (Citizenship Amendment Bill) will be taken after consensus. Congress will talk to Uddhav Thackeray over it. pic.twitter.com/lpWUhku5dV
— ANI (@ANI) December 5, 2019
विज्ञापन
नागरिकता संशोधन विधेयक में क्या है प्रस्ताव?
नागरिकता संशोधन विधेयक में नागरिकता कानून, 1955 में संशोधन का प्रस्ताव है। इसमें अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्मों के शरणार्थियों के लिए नागरिकता के नियमों को आसान बनाना है।
वर्तमान में किसी व्यक्ति को भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए कम से कम पिछले 11 साल से यहां रहना अनिवार्य है। इस संशोधन के जरिए सरकार नियम को आसान बनाकर नागरिकता हासिल करने की अवधि को एक साल से लेकर छह साल करना चाहती है।
अगर यह विधेयक पास हो जाता है, तो अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के सभी गैरकानूनी प्रवासी हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई भारतीय नागरिकता के योग्य हो जाएंगे।