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लोगो को अपने शरीर के साथ मनमर्जी की छूट नहीं, कानून की है रोक: केंद्र सरकार

Wed, 03 May 2017 09:29 AM IST
amarujala.com- Presented by: पवन नाहर
amarujala.com- Presented by: पवन नाहर Updated Wed, 03 May 2017 09:29 AM IST
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Citizens don't have absolute right over their bodies: Government
सु्प्रीम कोर्ट - फोटो : SELF
मंगलवार को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि नागरिकों का अपने शरीर के अंगों पर संपूर्ण अधिकार नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार आधार कार्ड पर लिए गए उनके  फिंगरप्रिंट और आइरिस के सैंपल के डिजिटल सैंपल नहीं देगी। एटर्नी जनरल मुकुल रोहातगी ने जस्टिन एके सिकरी और अशोक भूषण के बेंच से कहा, "एक व्यक्ति का अपने शरीर पर संपूर्ण अधिकार की धारणा एक मिथक है और इसे रोकने के लिए कई कानून भी बनाए गए हैं।"
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इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 139AA को चुनौती देती याचिका के जवाब में सरकार ने कोर्ट में यह जवाब दिया। इस याचिका ने आयकर भरने और पैन कार्ड के लिए आधार को अनिवार्य बनाने के सरकार दे आदेश को चुनौती दी थी। इसके अलावा केंद्र ने कहा कि आधार एक्ट लागू होने के बाद हर नागरिक के लिए आधार कार्ड अनिवार्य है।
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रोहातगी ने कहा कि शरीर पर संपूर्ण अधिकार पर रोक के लिए ही आत्महत्या के खिलाफ कानून बनाना गया है। इसी तरह महिलाओं को गर्भावस्था में नौकरी से निकालने के खिलाफ भी कानून को लागू किया गया। अगर लोगों को अपने शरीर पर संपूर्ण अधिकार दिया गया होता, तो वे अपने देह के साथ मनमर्जी का सलूख करते, मगर कानून उन्हें यह अधिकार नहीं देता। लोगों को आत्महत्या करने या ड्रग सेवन का अधिकार नहीं है।
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आधार कार्ड हर नागरिक के लिए है अनिवार्य

Citizens don't have absolute right over their bodies: Government
आधार कार्ड - फोटो : Getty Images
इसके अलावा उन्होंने कहा कि लोगों को शराब पीने के बाद गाड़ी चलाने की अनुमति नहीं है। लोगों को अल्कोहल सेवन के बाद पुलिस जांच का भी सामना करना पड़ता है। हालांकि, कोर्ट ने अटर्नी जनरल से कहा कि उनके द्वारा दिए गए सभी तर्क उपयुक्त नहीं क्योंकि याचिका का संबंध कर कानून से है, अपराध ने नहीं। इसके अलावा कोर्ट ने कहा कि व्यक्तिगत अधिकारों और सरकार के नियमों के बीच संतुलन बनाए रखना अनिवार्य है।

इस पर रोहातगी ने कहा कि आपराधिक मामलों मे फिंगरप्रिंट और ब्लड सैंपल देने के लिए आरोपी की सहमति जरूरी नहीं, उसी तरह कालेधन को रोकने के लिए आधार कार्ड और पैन कार्ड को जोड़ने में कुछ गलत नहीं है। इससे पहले आधार कार्ड बनवाना अनिवार्य नहीं था, मगर मंगलवार को रोहातगी ने कहा कि आधार एक्ट के सेक्शन 7 और 54 के अनुसार यह अनिवार्य है।

अटर्नी जनरल ने कहा कि आधार कोर्ड और पैन कार्ड को जोड़ने से कालेधन के लेनदेन पर रोक लगेगी। उन्होंने कहा कि लोगों को ऐसा नहीं लगेगा कि वे हर वक्त सरकार की निगरानी में हैं। इसका मकसद टैक्स अनुकूल समाज का निर्माण है, ताकि सरकारी स्कीमों का फायदा गरीबों को मिले।
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