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सीआईएसएफ: पुणे एयरपोर्ट पर यात्रियों से ठगी करने वाला 'सीरियल फ्रॉडस्टर' गिरफ्तार, कई फर्जी पहचान पत्र बरामद
Thu, 24 Sep 2026 07:34 PM IST
शिवम गर्ग
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवम गर्ग
Updated Thu, 24 Sep 2026 07:34 PM IST
सार
पुणे एयरपोर्ट पर सीआईएसएफ ने यात्रियों से ठगी करने वाले आरोपी को गिरफ्तार किया है। उसके पास अलग-अलग नामों वाले कई पहचान पत्र मिले। जांच में सितंबर में हुई ऐसी ही एक ठगी से भी उसका लिंक सामने आया। आखिर आरोपी कैसे यात्रियों को अपने जाल में फंसाता था? आइए, जानते हैं...
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सीआईएसएफ
- फोटो : एएनआई
विस्तार
पुणे एयरपोर्ट पर केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के सतर्क जवानों ने गुरुवार सुबह एक ऐसे शातिर ठग को गिरफ्तार किया है, जो कई फर्जी पहचान के जरिए भोले-भाले यात्रियों को अपनी ठगी का शिकार बनाता था। इस गिरफ्तारी से एयरपोर्ट पर यात्रियों के साथ होने वाली धोखाधड़ी की बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ है। यात्रियों से ठगी करने वाले 'सीरियल फ्रॉडस्टर' के पास कई फर्जी पहचान पत्र बरामद हुए हैं।
सुबह करीब 05:45 बजे, इंडिगो की फ्लाइट 6E-351 से (आधिकारिक काम) हैदराबाद से पुणे पहुंचे यात्री को अराइवल गेट के बाहर एक अनजान शख्स ने रोक लिया। उस शख्स ने अपनी एक झूठी और हमदर्दी भरी कहानी सुनाकर यात्री से 20,000 रुपये की आर्थिक मदद मांगी। इंसानियत के नाते यात्री ने मदद करने का फैसला किया और उस व्यक्ति द्वारा बताए गए गूगल-पे खाते में 11,000 रुपये ट्रांसफर कर दिए।
इसी दौरान, सीआईएसएफ के 'सिक्योरिटी ऑपरेशंस कंट्रोल सेंटर' और 'क्राइम एंड इंटेलिजेंस विंग' की पैनी नजर इस संदिग्ध बातचीत पर पड़ गई। जवानों ने तुरंत हरकत में आते हुए पूछताछ के लिए उस संदिग्ध को रोक लिया। जब सीआईएसएफ ने दस्तावेजों की जांच की, तो एक के बाद एक कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। आरोपी के पास अलग-अलग नामों से कई पहचान पत्र थे। जिस गूगल-पे अकाउंट में पैसे मंगाए गए थे, वह गुज्जरलापुडी बाला कोटेश्वर राव के नाम पर था।
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आरोपी के आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस पर एमवी दिनेश कुमार (निवासी- गुंटूर, आंध्र प्रदेश) का नाम दर्ज था। उसके पास से पारुल यूनिवर्सिटी का एक फैकल्टी आईडी कार्ड भी मिला, जिस पर तीसरा नाम अल्लूरु श्याम प्रसाद लिखा हुआ था। सीआईएसएफ के अनुसार, अपनी इन अलग-अलग पहचानों और किसी अन्य के खाते में पैसे मंगाने को लेकर वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका, जिसके बाद उसे तुरंत हिरासत में ले लिया गया। सच्चाई पता चलने पर ठगी का शिकार हुए यात्री को भी अपने साथ हुए धोखे का अहसास हुआ और उसने आरोपी के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की सहमति दे दी। इस शातिर ठग की गिरफ्तारी सीआईएसएफ की इंटेलिजेंस विंग की मुस्तैदी का ही नतीजा है।
दरअसल, एक सितंबर 2026 को भी पुणे एयरपोर्ट के सिटी साइड इलाके में बिल्कुल इसी तरीके से एक यात्री से 18,600 रुपये की ठगी की गई थी। इस घटना के बाद से ही सीआईएसएफ ने इलाके में विशेष निगरानी बढ़ा दी थी। जब पकड़े गए संदिग्ध का मिलान एक सितंबर की घटना की सीसीटीवी फुटेज से किया गया, तो पुष्टि हो गई कि यह वही व्यक्ति है। कड़ी पूछताछ में आरोपी ने अपना पिछला जुर्म भी कबूल कर लिया, जिसकी साइबर क्राइम में पहले ही शिकायत दर्ज कराई जा चुकी थी।
शुरुआती जांच और पीड़ित यात्री की औपचारिक शिकायत के बाद, सीआईएसएफ ने आगे की कानूनी कार्रवाई और विस्तृत जांच के लिए आरोपी को पुणे के विमानतल पुलिस स्टेशन के सुपुर्द कर दिया है। सीआईएसएफ देश भर के हवाई अड्डों पर यात्रियों की सुरक्षा और उनकी सुगम व सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। बल अपने अधिकार क्षेत्र में किसी भी तरह की आपराधिक गतिविधि के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाता है।
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सुबह करीब 05:45 बजे, इंडिगो की फ्लाइट 6E-351 से (आधिकारिक काम) हैदराबाद से पुणे पहुंचे यात्री को अराइवल गेट के बाहर एक अनजान शख्स ने रोक लिया। उस शख्स ने अपनी एक झूठी और हमदर्दी भरी कहानी सुनाकर यात्री से 20,000 रुपये की आर्थिक मदद मांगी। इंसानियत के नाते यात्री ने मदद करने का फैसला किया और उस व्यक्ति द्वारा बताए गए गूगल-पे खाते में 11,000 रुपये ट्रांसफर कर दिए।
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इसी दौरान, सीआईएसएफ के 'सिक्योरिटी ऑपरेशंस कंट्रोल सेंटर' और 'क्राइम एंड इंटेलिजेंस विंग' की पैनी नजर इस संदिग्ध बातचीत पर पड़ गई। जवानों ने तुरंत हरकत में आते हुए पूछताछ के लिए उस संदिग्ध को रोक लिया। जब सीआईएसएफ ने दस्तावेजों की जांच की, तो एक के बाद एक कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। आरोपी के पास अलग-अलग नामों से कई पहचान पत्र थे। जिस गूगल-पे अकाउंट में पैसे मंगाए गए थे, वह गुज्जरलापुडी बाला कोटेश्वर राव के नाम पर था।
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आरोपी के आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस पर एमवी दिनेश कुमार (निवासी- गुंटूर, आंध्र प्रदेश) का नाम दर्ज था। उसके पास से पारुल यूनिवर्सिटी का एक फैकल्टी आईडी कार्ड भी मिला, जिस पर तीसरा नाम अल्लूरु श्याम प्रसाद लिखा हुआ था। सीआईएसएफ के अनुसार, अपनी इन अलग-अलग पहचानों और किसी अन्य के खाते में पैसे मंगाने को लेकर वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका, जिसके बाद उसे तुरंत हिरासत में ले लिया गया। सच्चाई पता चलने पर ठगी का शिकार हुए यात्री को भी अपने साथ हुए धोखे का अहसास हुआ और उसने आरोपी के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की सहमति दे दी। इस शातिर ठग की गिरफ्तारी सीआईएसएफ की इंटेलिजेंस विंग की मुस्तैदी का ही नतीजा है।
दरअसल, एक सितंबर 2026 को भी पुणे एयरपोर्ट के सिटी साइड इलाके में बिल्कुल इसी तरीके से एक यात्री से 18,600 रुपये की ठगी की गई थी। इस घटना के बाद से ही सीआईएसएफ ने इलाके में विशेष निगरानी बढ़ा दी थी। जब पकड़े गए संदिग्ध का मिलान एक सितंबर की घटना की सीसीटीवी फुटेज से किया गया, तो पुष्टि हो गई कि यह वही व्यक्ति है। कड़ी पूछताछ में आरोपी ने अपना पिछला जुर्म भी कबूल कर लिया, जिसकी साइबर क्राइम में पहले ही शिकायत दर्ज कराई जा चुकी थी।
शुरुआती जांच और पीड़ित यात्री की औपचारिक शिकायत के बाद, सीआईएसएफ ने आगे की कानूनी कार्रवाई और विस्तृत जांच के लिए आरोपी को पुणे के विमानतल पुलिस स्टेशन के सुपुर्द कर दिया है। सीआईएसएफ देश भर के हवाई अड्डों पर यात्रियों की सुरक्षा और उनकी सुगम व सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। बल अपने अधिकार क्षेत्र में किसी भी तरह की आपराधिक गतिविधि के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाता है।