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गुजरात सीआईडी की रिपोर्ट, 'दलितों ने नहीं, शेर ने मारा था गाय को'

Wed, 27 Jul 2016 10:00 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Wed, 27 Jul 2016 10:00 AM IST
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CID says Cow was killed by lion, not Dalit men flogged by gau rakshaks

गुजरात के ऊना में दलितों को कार से बांधकर पीटने वाले मामले की जांच गुजरात सीआईडी (क्राइम) कर रही है। सीआईडी ने चश्मदीदों के हवाले से रिपोर्ट दी है कि मामला दलितों द्वारा गौहत्या का नहीं हैं, जैसा कि गौ रक्षा दल के लोग दावा कर रहे हैं, बल्कि गायों को गिर के शेर ने मारा था। सीआईडी की मानें तो दलित मरी हुई गाय की खाल निकाल रहे थे, तभी गौ रक्षा दल के लोग मौके पर पहुंच गए और उनकी पिटाई कर दी।

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जांच टीम को फिलहाल ये पता नहीं चल पाया है कि गौ रक्षा दल को गाय की खाल निकाले जाने की जानकारी आखिर किसने दी थी।

11 जुलाई के दिन मामले की शिकायत ऊना पुलिस स्टेशन में करीब डेढ़ बजे दर्ज कराई गई थी, जिसमें कहा गया था कि नारनभाई ने मोटा समाधियाला में गोहत्या की सूचना दी है। लेकिन एफआईआर के मुताबिक गौ रक्षक दल के लोगों ने करीब 10 बजे दलितों पर हमला किया।
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वासाराम के पिता बलू सरवईया ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उसे बेदिया गांव के नाजाभाई अहीर ने फोन पर सूचना दी थी कि एक शेर ने उसकी गाय को मार दिया है, इसलिए उसका क्रियाकर्म कर दे।

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'30-35 लोग आए और पीटना शुरू कर दिया'

CID says Cow was killed by lion, not Dalit men flogged by gau rakshaks
सीज की गई कार

बलू ने बताया कि सूचना पाकर उसने वासाराम और अन्य लोगों को गाय का शव लाने के लिए भेजा। वासाराम, उसका भाई रमेश, चचेरा भाई अशोक और रिश्तेदार बेचारभाई ने करीब गांव से करीब 2 किलोमीटर दूर गाय की खाल निकालने का काम शुरू किया। तभी एक सफेद रंग का वाहन वहां से गुजरा। थोड़ी ही देर में एक सफेद वाहन वापस आया और उसके साथ मोटरसाइकिलों पर 30 से 35 लोग आए। बालू ने बताया कि वे लोग हाथों डंडे लिए थे, वे आए और कहने लगे कि गाय को क्यों मार रहे हो? उन्होंने गालियां देते हुए वासाराम और अन्य को पीटना शुरू कर दिया। बालू के मुताबिक जैसे ही उसे इस बात की इत्तला मिली. वह अपनी पत्नी कुंवर के साथ उस जगह के लिए भागा, लेकिन जैसे ही वह पहुंचा, उसकी भी पिटाई हो गई। बालू ने बताया कि वे लोग उनके फोन भी ले गए।

20 जुलाई को सीआईडी ने मामले की जांच सिरे शुरू की और उन पांच लोगों को भी अपने जांच में शामिल किया जिन्हें 12 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। कोर्ट में दी गई अर्जी के मुताबिक जांच अधिकारी जानना चाहते है कि दलितों को पीटने का वीडियो किसने बनाया था और फिर उसे सोशल मीडिया पर डाला।

फिलहाल मामले की जांच जारी है, सभी की निगाहें इसी पर टिकी हैं कि आखिर मामले की सच्चाई क्या है और गुनहगार कौन है।

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