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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जन सूचना अधिकारी को कारण बताओ नोटिस
ब्यूरो/ अमर उजाला, अलीगढ़
Updated Wed, 20 Jul 2016 02:16 AM IST
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एएमयू
- फोटो : अलीगढ़/ब्यूरो
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एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक की ऑडियो रिकार्डिंग उपलब्ध नहीं कराने के मामले में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जन सूचना अधिकारी मो. अफजल अली फंसते नजर आ रहे हैं। केंद्रीय सूचना आयुक्त ने जन सूचना अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न आपके खिलाफ अधिकतम पेनाल्टी लगाई जाए।
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ईसी की ऑडियो रिकार्ड नष्ट करने को केंद्रीय सूचना आयुक्त ने बेहद गंभीरता से लिया है और कहा है कि यदि ऐसा हुआ है तो यह जन सूचना अधिकार का उल्लंघन है और दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है। एएमयू के पूर्व छात्र पारस नाथ सिंह के मामले की सुनवाई मंगलवार को केंद्रीय सूचना आयोग में हुई। केंद्रीय सूचना आयुक्त ने स्वयं इस मामले की सुनवाई की। पारस नाथ सिंह ने 12 जुलाई 2014 को हुई एएमयू ईसी की ऑडियो रिकार्डिंग 17 जुलाई 2014 को आरटीआई के तहत मांगी थी।
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एएमयू के जन सूचना अधिकारी ने देने से इंकार कर दिया था। इसमें यह भी कहा गया था कि 25 फरवरी 2013 की ईसी द्वारा एप्रूव्ड स्टैडिंग आर्डर के अनुसार ईसी रिकार्ड जन सूचना अधिकार के तहत नहीं दिया जा सकता। सुनवाई के बाद केंद्रीय सूचना आयुक्त ने एएमयू के जन सूचना अधिकारी मो. अफजल अली को कारण बताओ नोटिस जारी कर 21 दिन के अंदर जवाब दाखिल करने को कहा है। अगली सुनवाई 9 अगस्त को होगी।
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सूचना आयुक्त ने यह भी कहा है कि ऑडियो रिकार्डिंग भी जन सूचना अधिकार एक्ट की परिभाषा के अंतर्गत है। सूचना आयुक्त ने इस बात को भी बेहद गंभीरता से लिया है कि 12 जुलाई 2014 को ईसी मीटिंग हुई और 5 दिन बाद यानी 17 जुलाई 2014 को आरटीआई के तहत सूचना मांगी गई। आरटीआई के बाद सूचना को नष्ट कैसे कर दिया गया।