अगस्ता वेस्टलैंडः 330 करोड़ की रिश्वत लेने वाला मिशेल है कौन?
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अगस्ता वेस्टलैंड चॉपर डील में हुई रिश्वतखोरी के मसले पर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस को घेरने की कोशिश की है, हालांकि सौदे में आरोपी बिचौलिए जेम्स क्रिश्चियन मिशेल ने कहा है कि वे भारतीय जांच एजेंसियों के सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने दावा किया है कि वे कभी भी सोनिया गांधी या किसी भी 'गांधी' से नहीं मिलें।
इटली की एक अदालत ने अगस्ता वेस्टलैंड रिश्वतखोरी मामले में कुछ लोगों को दोषी करार दिया है। अगस्ता वेस्टलैंड सौदे में मौजूदा 44 मिलियन यूरो (रुपए की मौजूदा दरों में 330 करोड़ रुपए) रिश्वत दी गई थी और मिशेल को करोड़ों डॉलर दिए गए थे।
जेम्स क्रिश्चियन मिशेल एक ब्रिटिश व्यापारी हैं। इटली की अदालत में पेश सबूतों के मुताबिक, अगस्ता वेस्टलैंड ने मिशेल को जो रकम दी थी वह बहुत ही ज्यादा था, जबकि वे कंपनी के लिए उस अनुपात में काम नहीं किया करते थे।
इतालवी कोर्ट के फैसले में 'सिग्नोरा गांधी' का जिक्र
भारतीय जांच एजेंसियों के निवेदन पर पिछले साल दिसंबर में इंटरपोल ने जेम्स क्रिश्चियन बेल के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था। इतालवी कोर्ट के फैसले में 'सिग्नोरा गांधी' का जिक्र आया है।
रिश्वतखोरी के मामले में इतालवी अदालत में चले मुकदमें में वकीलों ने दलील दी था कि जेम्स क्रिश्चियन मिशेल और गीडो हस्के, जो कि स्विस-इटालवी नागरिक है, ने साथ काम किया था। उन्होंने अगस्ता के चॉपर्स को बिकवाने के लिए भारतीय अधिकारियों को प्रभावित किया। अदालत में हुई बहस में मिशेल का कई बार जिक्र आया, लेकिन इतालवी एजेंसियों ने उनसे पूछताछ नहीं की।
अगस्ता वेस्टलैंड रिश्वतखोरी मामले में फैसला देने वाली कोर्ट ने अपने फैसले की कॉपी में एक चेप्टर मिशेल पर ही लिखा है। मामले में इतालवी वकीलों ने आरोप लगाया था कि मिशेल ही रिश्वतखोरी का मुख्या सूत्रधार था।
अगस्ता वेस्टलैंड ने मिशेल को 44 मिलियन की रिश्वत दी
इटली की कोर्ट ने माना कि अगस्ता वेस्टलैंड ने मिशेल को 44 मिलियन की रिश्वत दी। उल्लेखनीय है कि भारत अतिविशिष्ट व्यक्तियों की यात्रा के लिए अगस्तावेस्टलैंड एडब्ल्यू 101 कॉप्टर का 2010 में सौदा किया था। जनवरी 2013 में इटली में अदालती कार्रवाई शुरू होने के बाद इस सौदे में घोटाले की जानकारी सामने आई। 12 फरववरी 2013 को तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटनी ने पत्र लिखकर सीबीआई से सौदे की जांच का आग्रह किया। 25 फरवरी 2013 को सीबीआई ने प्रीलिमनरी इंक्वॉयरी दर्ज की और इसमें 11 लोगों के विरुद्ध जांच प्रक्रिया आरंभ हुई।
25 मार्च 2013 को करक्षा मंत्री एके एंटनी ने बयान दिया है कि हेलीकाप्टर सौदे में भ्रष्टाचार हुआ है और रिश्वत ली गई है। भारत ने इटली में राजनयिक सहयोग लेने के साथ साथ वहां की लीगल फर्म को हायर किया, ताकि वहां से दस्तावेजों को हासिल किया जा सके।
13 मार्च को सीबीआई ने 13 लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की। इसमें पूर्व वायुसेनाध्यक्ष एयरचीफ मार्शल एसपी त्यागी, उनके तीन रिश्तेदार, जूली डोस्का, संदीप, पूर्व केन्द्रीय मंत्री संतोष बारगोडिया के भाई सतीश बारगोडिया, प्रताप अग्रवाल(आईडीएस अंफोटेक के प्रमुख) और इटली की फिनमेकेनिका, अगस्तावेस्टलैंड, आईडीएस इंफोटेक तथा एयरोमैट्रिक्स नामक चार कंपनिया।
सीबीआई भारत में कई से कर चुकी है पूछताछ
जनवरी 2014 में भारत ने सौदे को रिश्वत दिए जाने का आरोप लगाते हुए सौदे की शर्तो का उल्लंघन माना और सौदा रद्द करके इतालवी कंपनी को दी गई राशि के वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी।
मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद सीबीआई ने जांच के क्रम में गोवा के पूर्व राज्यपाल बीवी बांग्चू और पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार तथा पश्चिम बंगाल के राज्यपाल एमके नारायणन से पूछताछ की थी। इनपर वीवीआईपी सेवा के लिए जरुरी हेलीकाप्टर के मानक में बदलाव करने तथा सौदे को अंतिम रूप देने में सहयोग करने की आशंका थी।
25 सितंबर को सीबीआई ने मिशेल के नाम गैरजमानती वारंट जारी किया और रेडकार्नर नोटिस जारी करने के लिए इंटरपोल से अपील की। मिशेल से सीबीआई जानना चाहती है कि उसने सौदे को अंतिम रूप दिलाने में कितना कमीशन लिया और इसका कैसे किन लोगों में वितरण हुआ।