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चित्तपुर मार्च विवाद: RSS बनाम कांग्रेस में सियासी जंग तेज, भाजपा बोली- सनातन विरोधी राजनीति कर रही कांग्रेस
Sun, 19 Oct 2025 07:32 PM IST
हिमांशु चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Sun, 19 Oct 2025 07:32 PM IST
सार
कर्नाटक में आरएसएस के चित्तपुर मार्च को लेकर सियासी टकराव तेज है। सरकार ने कानून-व्यवस्था का हवाला देकर अनुमति रोकी, तो मंत्री प्रियांक खरगे ने आरएसएस पर धमकी और दबाव के आरोप लगाए। वहीं, भाजपा ने कांग्रेस पर सनातन विरोधी राजनीति करने का आरोप लगाया।
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चित्तपुर मार्च पर रार।
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
कर्नाटक में आरएसएस के शताब्दी मार्च को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। राज्य सरकार ने चित्तपुर में आयोजित होने वाले आरएसएस मार्च की अनुमति कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए अस्वीकार कर दी है। इसके बाद मंत्री प्रियांक खरगे समेत कई कांग्रेस नेताओं और भाजपा के नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। खरगे ने आरएसएस पर धमकी और दबाव बनाने का आरोप लगाया है। वहीं, भाजपा ने कांग्रेस पर सनातन विरोध वाली राजनीति करने का पलटवार किया है।
प्रियांक खरगे ने रविवार को सवालिया लहजे में कहा कि मार्च करने के लिए यही समय क्यों चुना गया? उन्होंने आरएसएस से संगठन के दस्तावेज जमा करने को भी कहा। इसके साथ ही कर्नाटक सरकार ने स्पष्ट किया कि चित्तपुर में किसी भी संगठन को मार्च निकालने की अनुमति नहीं दी गई है। स्थानीय प्रशासन ने इसे कानून-व्यवस्था की दृष्टि से जोखिमपूर्ण बताया। खरगे ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता शांति बनाए रखना है और किसी भी अप्रिय घटना की अनुमति नहीं दी जा सकती।
आरएसएस को क्यों नहीं मली अनुमति?
प्रियांक खरगे ने आगे कहा कि सिर्फ आरएसएस पर ही नहीं बल्कि कई संगठनों को मार्च निकालने की अनुमति नहीं दी गई है। भीम आर्मी, दलित पैंथर्स और एक नागरिक मंच को भी मार्च की अनुमति नहीं मिली। उन्होंने बताया कि तीनों संगठनों ने एक ही समय मार्च निकालने की अनुमति मांगी थी, लेकिन सबको मना कर दिया गया। सरकार किसी एक संगठन को निशाना नहीं बना रही। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आरएसएस के कुछ कार्यकर्ताओं ने विधायक को धमकी दी थी, जिससे क्षेत्र का माहौल बिगड़ सकता था। मेरा दायित्व है कि चित्तपुर में कोई अप्रिय स्थिति न बने।
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ये भी पढ़ें- 'महाराष्ट्र में 96 लाख फर्जी वोटर', निकाय चुनाव से पहले राज ठाकरे का बड़ा हमला; ECI से की यह मांग
भाजपा के संबित पात्रा का पलटवार
भाजपा ने इस मुद्दे पर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि सिद्धारमैया और खरगे की सरकार देश के सांस्कृतिक और धार्मिक संगठनों को कुचलना चाहती है। यह वही कांग्रेस है जिसने पहले कहा था कि हम सत्ता में आए तो सनातन का अंत कर देंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और उनके पुत्र प्रियांक खरगे लगातार आरएसएस और सनातन धर्म पर आपत्तिजनक बयान देते हैं। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह हिंदू आतंकवाद और केसरिया आतंकवाद जैसे शब्दों को बढ़ावा देती रही है। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी की कांग्रेस को सनातन परंपरा से घृणा है।
आरएसएस की प्रतिक्रिया
आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार ने कहा कि देश के सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक संस्थानों को अपनी बात कहने का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता से पहले भी यह अधिकार था, अब भी है। यह संभव है कि लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर कर्नाटक सरकार खुद लोकतंत्र का गला घोंट रही हो। इधर, कर्नाटक हाईकोर्ट ने आरएसएस को नया आवेदन दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई 24 अक्तूबर को होगी, जबकि नई याचिका दो नवंबर को पेश की जाएगी। अदालत ने राज्य सरकार से पूछा है कि क्या कानून-व्यवस्था के बहाने किसी संगठन की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित किया जा सकता है।
ये भी पढ़ें- बंगाल में BJP नेताओं पर हमले जारी: शुभेंदु अधिकारी का दावा- मेरी कार पर हुआ हमला, TMC बोली- ये जनता का गुस्सा
क्या बोले अधीर रंजन चौधरी?
कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि सरकार का दायित्व है कि राज्य में शांति बनी रहे। उन्होंने कहा कि कर्नाटक की जनता सौहार्द और भाईचारा चाहती है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी संगठन समाज में तनाव न फैलाए। वहीं, जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि कर्नाटक सरकार अपनी नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए यह विवाद खड़ा कर रही है। उन्होंने कहा कि जनता असली मुद्दों बेरोजगारी और महंगाई पर जवाब चाहती है, न कि ऐसे विवादों पर।
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प्रियांक खरगे ने रविवार को सवालिया लहजे में कहा कि मार्च करने के लिए यही समय क्यों चुना गया? उन्होंने आरएसएस से संगठन के दस्तावेज जमा करने को भी कहा। इसके साथ ही कर्नाटक सरकार ने स्पष्ट किया कि चित्तपुर में किसी भी संगठन को मार्च निकालने की अनुमति नहीं दी गई है। स्थानीय प्रशासन ने इसे कानून-व्यवस्था की दृष्टि से जोखिमपूर्ण बताया। खरगे ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता शांति बनाए रखना है और किसी भी अप्रिय घटना की अनुमति नहीं दी जा सकती।
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आरएसएस को क्यों नहीं मली अनुमति?
प्रियांक खरगे ने आगे कहा कि सिर्फ आरएसएस पर ही नहीं बल्कि कई संगठनों को मार्च निकालने की अनुमति नहीं दी गई है। भीम आर्मी, दलित पैंथर्स और एक नागरिक मंच को भी मार्च की अनुमति नहीं मिली। उन्होंने बताया कि तीनों संगठनों ने एक ही समय मार्च निकालने की अनुमति मांगी थी, लेकिन सबको मना कर दिया गया। सरकार किसी एक संगठन को निशाना नहीं बना रही। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आरएसएस के कुछ कार्यकर्ताओं ने विधायक को धमकी दी थी, जिससे क्षेत्र का माहौल बिगड़ सकता था। मेरा दायित्व है कि चित्तपुर में कोई अप्रिय स्थिति न बने।
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भाजपा के संबित पात्रा का पलटवार
भाजपा ने इस मुद्दे पर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि सिद्धारमैया और खरगे की सरकार देश के सांस्कृतिक और धार्मिक संगठनों को कुचलना चाहती है। यह वही कांग्रेस है जिसने पहले कहा था कि हम सत्ता में आए तो सनातन का अंत कर देंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और उनके पुत्र प्रियांक खरगे लगातार आरएसएस और सनातन धर्म पर आपत्तिजनक बयान देते हैं। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह हिंदू आतंकवाद और केसरिया आतंकवाद जैसे शब्दों को बढ़ावा देती रही है। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी की कांग्रेस को सनातन परंपरा से घृणा है।
आरएसएस की प्रतिक्रिया
आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार ने कहा कि देश के सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक संस्थानों को अपनी बात कहने का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता से पहले भी यह अधिकार था, अब भी है। यह संभव है कि लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर कर्नाटक सरकार खुद लोकतंत्र का गला घोंट रही हो। इधर, कर्नाटक हाईकोर्ट ने आरएसएस को नया आवेदन दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई 24 अक्तूबर को होगी, जबकि नई याचिका दो नवंबर को पेश की जाएगी। अदालत ने राज्य सरकार से पूछा है कि क्या कानून-व्यवस्था के बहाने किसी संगठन की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित किया जा सकता है।
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क्या बोले अधीर रंजन चौधरी?
कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि सरकार का दायित्व है कि राज्य में शांति बनी रहे। उन्होंने कहा कि कर्नाटक की जनता सौहार्द और भाईचारा चाहती है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी संगठन समाज में तनाव न फैलाए। वहीं, जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि कर्नाटक सरकार अपनी नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए यह विवाद खड़ा कर रही है। उन्होंने कहा कि जनता असली मुद्दों बेरोजगारी और महंगाई पर जवाब चाहती है, न कि ऐसे विवादों पर।