फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bihar ›   chirag paswan on pm modi nitish kumar lalu prasad tejashwi yadav exclusive interview

EXCLUSIVE: चिराग पासवान बोले- मंत्री पद पर फैसला पीएम करेंगे, भाजपा से दूरी और करीबी, दोनों की वजह हैं नीतीश

Utkarsh Chaturvedi उत्कर्ष चतुर्वेदी
Updated Fri, 21 Jul 2023 08:07 AM IST
सार

एनडीए से अब तक रही दूरी के पीछे चिराग पासवान आखिर नीतीश कुमार को क्यों जिम्मेदार मानते हैं? लालू के परिवार से उनके कैसे रिश्ते हैं और रामविलास पासवान की परंपरागत लोकसभा सीट रही हाजीपुर पर अब किसका दावा होगा? इन्हीं सवालों के जवाब जानिए खुद चिराग पासवान से...

विज्ञापन
chirag paswan on pm modi nitish kumar lalu prasad tejashwi yadav exclusive interview
Chirag Paswan - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

हाल ही में दिल्ली में एनडीए के घटक दलों की बैठक हुई। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चिराग पासवान की तस्वीर चर्चा में रही। चिराग ने 2020 का बिहार विधानसभा चुनाव बिना किसी गठबंधन के लड़ा। अब वे एनडीए में लौट आए हैं। सियासी गलियारों में इन सवालों की चर्चा में है कि क्या चिराग को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी? क्या दो धड़ों में बंट चुकी लोक जनशक्ति पार्टी एक होकर लोकसभा चुनाव लड़ेगी, क्या चाचा पशुपति पारस और भतीजे चिराग के बीच दूरियां मिटेंगी? अमर उजाला के साथ विशेष बातचीत में दिवंगत नेता रामविलास पासवान के बेटे और सांसद चिराग पासवान ने इन्हीं सवालों के जवाब दिए। 

विज्ञापन


विज्ञापन


एक तस्वीर, जिसे राजनीति में दिलचस्पी रखने वालों ने खूब देखा। एनडीए की बैठक के बाद प्रधानमंत्री ने जिस तरह आपके गालों को पकड़ा और गले लगाया, उस दौरान क्या कहा?
विज्ञापन
विज्ञापन

चिराग पासवान: बात ज्यादा हुई नहीं। उन्होंने सिर्फ हालचाल पूछा। मुझे लगता है कि शायद उस दिन तस्वीरों और वीडियो के माध्यम से यह लम्हा सार्वजनिक हुआ, लेकिन इस लम्हे को मैंने महसूस कई बार किया। कई बार मेरे लिए हनुमान शब्द तंज के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था। कई बार मुझे ताने दिए जाते थे कि आप प्रधानमंत्री के खिलाफ क्यों कभी कुछ नहीं बोलते। भाजपा ने आपके साथ ऐसा किया, वैसा किया... दुनियाभर की बातें कही जाती थीं। कहा जाता था कि फिर भी आप प्रधानमंत्री के भक्त बने हुए हैं। हालांकि, मेरा मेरे प्रधानमंत्री के साथ यही रिश्ता रहा। 

यह रिश्ता उनके साथ और ज्यादा तब गहराया, जब मेरे पिता अस्पताल में थे। उनकी तबीयत खराब थी। परिवार के एक सदस्य की तरह प्रधानमंत्री जी ने मुझे और मेरे परिवार को संभाला। उस दौरान दिन में दो-दो बार प्रधानमंत्री सीधे फोन करते थे। ना सिर्फ पिता का हाल-चाल जानते थे, बल्कि डॉक्टर्स से राय-मशविरा करके बताते थे कि अभी हम लोगों को क्या करना चाहिए। वो सम्मान उनके प्रति मेरे मन में हमेशा रहा। सिर्फ इसलिए कि मैं गठबंधन से अलग हो गया हूं तो मैं उनके खिलाफ बोलने लग जाऊं, ये मेरे संस्कारों में कभी नहीं रहा। उस वक्त कई तरह के आरोप भी मुझ पर लगे, लेकिन मैंने हमेशा उनके साथ मेरे रिश्ते की दुहाई दी। मैंने और प्रधानमंत्री जी ने भी हमेशा उस मर्यादा को बनाए रखा। उसी रिश्ते की एक बहुत खूबसूरत झलक उस दिन बैठक में देखने को मिली।

पार्टी में टूट से लेकर आपके पिता को मिले सरकारी बंगले के छिन जाने तक, कई लोगों ने इसमें केंद्र सरकार की भूमिका बताई। क्या आपने वो सब माफ कर दिया है?
चिराग:
यह मेरी व्यक्तिगत लड़ाई थी ही नहीं। मेरी लड़ाई घर, गाड़ी, बंगले की नहीं हो सकती। मैं रामविलास पासवान जी का बेटा हूं। मेरी एक लंबी लड़ाई है। बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट को लेकर, युवा बिहारियों को उनका हक-अधिकार दिलाने को लेकर। मुझे अगर सिर्फ एक बंगले को लेकर लड़ाई लड़नी होती तो मैं 2020 में चुपचाप मुख्यमंत्री जी की गलत नीतियों के सामने नतमस्तक होता। उनसे समझौते कर लेता। बिहार में मेरे चार मंत्री होते। केंद्र सरकार में मैं खुद मंत्री होता। ये परिस्थितियां ही नहीं आतीं, पर मेरी वो लड़ाई नहीं है। एक बड़े लक्ष्य के साथ मैं निकला हूं तो इसलिए वो घर कभी लड़ाई में था ही नहीं। उस घर का मैं हकदार भी कभी नहीं था। वो जिस कैटेगरी का घर है, उसके लिए आपकी योग्यता काफी ज्यादा होनी चाहिए। मेरे पिता ने उतनी मेहनत की, तब वे उस घर के हकदार हुए। तो इस बात को कभी मान के भी नहीं चल रहा था कि सिर्फ दो बार का सांसद होने से मैं उस घर का हकदार हो सकता हूं। 

क्या परिवार में भी टूट रही?
चिराग:
परिवार पार्टी में टूट की जहां तक बात आई, मैंने कभी किसी दूसरे को जिम्मेदार माना ही नहीं। मेरा मानना है कि मेरे अपनों ने मुझे धोखा दिया। मेरे अपने अगर मेरे साथ खड़े रहते तो दुनिया की कोई ताकत नहीं थी, जो इस परिवार को तोड़ सकती या इस पार्टी को तोड़ सकती थी। धोखा मुझे मेरे अपनों से मिला। किसी दूसरे या तीसरे पर मैं क्या ही उंगली उठाऊं? इसलिए मेरे जेहन में कभी ये सब रहा ही नहीं कि भाजपा ने ये किया या प्रधानमंत्री जी खामोश रहे। जब मेरे अपने ही मेरे साथ नहीं थे तो कोई दूसरा भी उस वक्त मेरे साथ खड़े होकर क्या कर लेता? भाजपा या प्रधानमंत्री जी के खिलाफ कभी कोई ऐसी बातें उस दौरान निकली नहीं क्योंकि कभी मैंने उन लोगों को इसके लिए जिम्मेदार माना ही नहीं। दुनिया आपको उकसाने के लिए कई बातें करती है, लेकिन मुझे पता है कि हकीकत क्या थी।

chirag paswan on pm modi nitish kumar lalu prasad tejashwi yadav exclusive interview
Chirag Paswan - फोटो : Amar Ujala

फिर दूरी क्यों आई, आप 'हनुमान' भी कह रहे थे, लेकिन दूर क्यों थे?
चिराग:
दूरी और करीबी, दोनों के लिए जिम्मेदार एक व्यक्ति हैं और वो हैं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी। दूरियां भी उनकी वजह से आईं। 2017 से दूरियों की शुरुआत हो गई थी। मैं या मेरे पिता रामविलास पासवान जी नीतीश कुमार के साथ काम करने को लेकर सहज नहीं थे। जब नीतीश भाजपा के साथ थे तो हमने कभी पहल भी नहीं की उनके साथ आने की। 2002 में जब हम एनडीए से यूपीए में गए, तब नीतीश कुमार बिहार में मुख्यमंत्री रहे। तब हम उनके साथ नहीं थे। नीतीश कुमार हमारी पार्टी के खिलाफ थे। 2005 में पार्टी के 29 विधायक तोड़े। दलित-महादलित कर मेरे पिता के राजनीतिक कद को घटाने की कोशिश की। कभी हमारे बीच सहजता नहीं थी। 

2013 में जब नीतीश कुमार अलग हुए, तब हम एनडीए में आए। जब नीतीश दोबारा आए तो हम सहज नहीं थे, लेकिन अमित शाह जी और प्रधानमंत्री जी के कहने पर हम गठबंधन में रहे। 2019 के चुनाव में नीतीश कुमार ने आदतन धोखा देते हुए हमारे प्रत्याशियों को हराने का काम किया। 2020 में इसीलिए हम सरकार से अलग होने का फैसला कर चुके थे। हमारी बातें विजन डॉक्यूमेंट में नहीं आ रही थीं। बिहार के युवाओं, नीतियों की बात थी, लेकिन मुख्यमंत्री जी ने उस बात को स्वीकारा नहीं। हमारा विरोध भाजपा से नहीं था, इसलिए 2020 के विधानसभा चुनाव में हमने 137 उम्मीदवार में से अधिकतर जनता दल यूनाइटेड के खिलाफ उतारे। नीतीश कुमार के दोबारा जाने के बाद हमने बात शुरू की और हम फिर गठबंधन में हैं। 

चाचा से मिलते वक्त आपने पैर छुए, गले लगे तो अब क्या परिवार एक होने वाला है, दूरी खत्म होने वाली है?
चिराग:
ये राजनीतिक नहीं, पारिवारिक मसला है और हमारे यहां परिवार के बड़े ही परिवार के मामलों में फैसला करते हैं। मेरे पिता के बाद मैंने अपने चाचा में ही अपने पिता की छवि को देखा था। शायद मुझसे कोई गलती हुई होगी, जिसके कारण वो अलग हुए। मुझे नहीं समझ आया। अलग होने का फैसला भी उनका था। साथ आने का फैसला भी वही करेंगे, लेकिन शायद वो फैसला कर चुके हैं। तभी वो कह रहे हैं कि सूरज पश्चिम से उग जाएगा, लेकिन चिराग से मेरा कोई समझौता नहीं होगा।

एनडीए में रहते हुए हाजीपुर की सीट पर किसका दावा होगा? आपका या आपके चाचा का?
चिराग:
मेरे पिता के आधे काम पूरा करना मेरी जिम्मेदारी है। हाजीपुर को वे अपनी मां मानते थे और उसे मैं छोड़ नहीं सकता। हमारी पार्टी वहां से चुनाव लड़ेगी। गठबंधन को लेकर उनसे बात हुई है।

फिर जमुई का क्या होगा, आप उसे भी अपना परिवार कहते थे?
चिराग:
हाजीपुर से पार्टी चुनाव लड़ेगी। जमुई मेरी कर्मभूमि है। 10 साल से मुझे वहां से सम्मान मिला है। पार्टी का संसदीय दल हाजीपुर और जमुई से चुनाव लड़ने पर फैसला लेगा, लेकिन इतना तय है कि हमारी पार्टी ही इन दोनों से जगहों से चुनाव लड़ेगी।

chirag paswan on pm modi nitish kumar lalu prasad tejashwi yadav exclusive interview
Chirag Paswan - फोटो : Amar Ujala

क्या चिराग पासवान केंद्रीय मंत्रिमंडल का हिस्सा होने वाले हैं?
चिराग:
ये प्रधानमंत्री जी का अधिकार क्षेत्र है। इस लालसा में हमने गठबंधन नहीं किया है। इस पर कुछ भी कहना गलत होगा। गठबंधन करने से पहले हमारी कुछ चिंतांए थीं और उन मुद्दों पर आम सहमति बनने के बाद ही हमने उसकी घोषणा की।

क्या चिताएं थीं। आम सहमति में लोकसभा, विधानसभा सीटों का बंटवारा भी शामिल है?
चिराग:
गठबंधन में हुई चर्चा को समय से पहले करना गलत होगा। जो बंद कमरे में हुआ, वो वक्त के साथ सामने आएगा। मेरा गठबंधन भाजपा के साथ है, लेकिन उनका कई और पार्टियों के साथ है। समय आने पर सभी पार्टियां साथ बैठकर उस पर कोई फैसला करेंगी।

तेजस्वी से आपकी मुलाकात होती रहती है, उनके लिए आपके क्या विचार हैं?
चिराग:
मैं व्यक्तिगत रिश्तों को निभाने वाला व्यक्ति हूं। राजनीतिक और व्यक्तिगत सीमाओं को मैं अलग कर सकता हूं। कई मुलाकातें व्यक्तिगत कारणों से होती है। लालू जी के यहां इफ्तार में मैं सिर्फ गठबंधन से दूर होने के कारण नहीं गया। मेरे पिता और लालू जी ने साथ में काम किया है। तेजस्वी मेरे छोटे भाई के जैसे हैं। उनके सारे बच्चे भाई-बहन हैं। मैं अपने पारिवारिक रिश्तों को निभाते रहूंगा। मुख्यमंत्री जी के खिलाफ होते हुए भी मैं अपने व्यक्तिगत संबंध निभाता हूं। उनसे मिलते वक्त उनके पैर छूता हूं। चाचा जैसे ही मिले, मैंने उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया। मेरे पीएम के साथ संबंध भी व्यक्तिगत संबंध हैं, उन्हें राजनीति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

आपके पिता की बिहार में काम करने की इच्छा थी। कई युवा आपको मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं, आपकी क्या इच्छा है?
चिराग:
जो मुझमें इतना बड़ा नेतृत्व की क्षमता देख रहे हैं विनम्रता के साथ उन्हें धन्यवाद। फिलहाल मैं मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में नहीं हूं। बिहारी हूं, बिहार के लिए काम करना चाहता हूं। विकसित बिहार बनने के लिए जमीन पर काम करना जरूरी है। बड़ी-बड़ी कंपनियों, अधिकारियों को देखिए, वो बिहार से हैं। फिर मेरी धरती, मेरा बिहार क्यों पीछे छूट गया? मेरे मन में पद की लालसा नहीं है, लेकिन बिहार को आगे बढ़ाने के लिए वहां वक्त देता हूं। आने वाले समय में ऐसी कोई जिम्मेदारी मिली तो भागूंगा नहीं, उसे निभाऊंगा जरूर। 

विधानसभा या लोकसभा, आपके लिए क्या ज्यादा जरूरी है?
चिराग:
बिहार विधानसभा हमारे लिए ज्यादा जरूरी है। हम वहां खुद को सक्रिय रखना चाहेंगे, लेकिन बिहार की आवाज को उठाने के लिए लोकसभा भी जरूरी हो जाती है, लेकिन प्राथमिकता की बात हो तो मेरे लिए बिहार ही पहले है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed