अंतरिक्ष यान के कब्रिस्तान 'निमो प्वाइंट' में नहीं गिरेगा चीन का स्पेस स्टेशन
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धरती पर रविवार देर रात गिरने को तैयार चीन का अनियंत्रित हो चुका स्पेस स्टेशन तियांगगोंग-1 शायद प्रशांत महासागर के उस सूने स्थान पर नहीं गिरेगा, जहां इसके क्रैश होने की आशंका थी। आधिकारिक रूप से इस अगम्य समुद्री ध्रुव कहते हैं। प्वाइंट निमो के नाम से मशहूर इस समुद्री कब्रिस्तान में ज्यादातर टाइटेनियम के ईंधन टैंक और अन्य उच्च तकनीकी अंतरिक्ष कचरा गिरता है। इसका नाम प्वाइंट निमो जूल्स वर्नेज के काल्पनिक सबमरीन कैप्टन के नाम पर रखा गया है।
धरती पर मौजूद जमीन से सबसे दूर की जगहThe lines on this map are where #Tiangong1 can come down within the current +- 1-day uncertainty window.
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Cities with populations > 1 million people are also marked on the map, and those on the lines could see a reentry over them. The risk to these cities is however *very small* pic.twitter.com/QFnoLx1dbVविज्ञापन विज्ञापन— Dr Marco Langbroek (@Marco_Langbroek) March 28, 201
निमो प्वाइंट धरती पर मौजूद जमीन से सबसे दूरी की जगह है। यह अंटार्कटिक के द्वीप पिटकेर्न आइलैंड के उत्तर की ओर 2688 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जर्मनी के डार्म्सटैट में स्थित यूरोपियन स्पेस एजेंसी के अंतरिक्ष कचरे के विशेषज्ञ स्टीजन लेम्मेंस के मुताबिक नियंत्रित पुन: प्रवेश की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वहां कोई रहना नहीं चाहिए।
निमो प्वाइंट इस लिहाज से भी ठीक है क्योंकि यहां जैव विविधता बेहद कम है। यानी यहां कोई जीव-जंतु नहीं है। इसलिए इसका इस्तेमाल अंतरिक्ष कचरे के कब्रिस्तान के रूप में किया जा रहा है। निमो का लैटिन में अर्थ है, कोई नहीं।
250 से 300 अंतरिक्षयान गिर चुके हैं यहां
एक अनुमान के मुताबिक यहां 250 से 300 अंतरिक्ष यान गिर चुके हैं। इन अंतरिक्ष यान का ज्यादातर हिस्सा धरती के वायुमंडल में प्रवेश करते ही जल जाता है और इसके बाद निमो प्वाइंट पानी में समा जाता है। 2001 एक में यहां 120 टन भार वाली रूसी एमआईआर स्पेस लैब गिरी थी। यह यहां गिरा अब तक का सबसे भारी अंतरिक्ष कचरा था। अभी इसका इस्तेमाल सबसे ज्यादा रूसी अंतरिक्ष प्रोग्रेस कैप्सूल के लिए किया जाता है। अनुमान है कि 420 टन का अंतरिक्ष स्टेशन भी 2024 में यही गिरेगा।