चीनी राष्ट्रपति का नेपाल दौरा भारत को दे सकता है ‘टेंशन’, नमस्ते की बजाय ‘नी-हाव’ का खुमार
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भारत के नेपाल के साथ ‘रोटी-बेटी’ वाले रिश्ते हैं। 2018 में जब चौथी बार प्रधानमंत्री बिम्सटेक सम्मेलन में हिस्सा लेने नेपाल गए थे, तब एक्ट ईस्ट पॉलिसी और नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी को भारत के लिए अहम बताते हुए नेपाल को सबसे ऊपर रखा था। वहीं अब चीन भी लगातार नेपाल को अहमियत दे रहा है, और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अक्टूबर के मध्य में नेपाल का दौरा करने वाले हैं। भारत के नजरिये से चीन और नेपाल के बीच बढ़ रही नजदीकियां चिंताजनक हैं।
मोदी खत्म करना चाहते हैं नाराजगी
पिछले साल 2018 में नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने चीन का दौरा किया था, ओली के बारे में माना जाता है कि नेपाल को चीन के करीब ले जाने में उनकी खासी दिलचस्पी रही है। दरअसल 2015 में हुई आर्थिक नाकेबंदी के नेपाल की नाराजगी भारत के प्रति कम नहीं हुई है। उस दौरान दोनों देशों के बीच रिश्तों में काफी खटास भी आ गई थी, हालांकि प्रधानमंत्री मोदी ने नेपाल दौरों के जरिए इस खटास को कम करने की काफी कोशिश भी की।
आर्थिक नाकेबंदी के बाद बदले समीकरण
नेपाल की भौगोलिक स्थिति को देखें, तो नेपाल तीन तरफ से भारत से घिरा हुआ है, वहीं उसकी चौथी तरफ चीन है, जहां पहाड़ संबंधों के बीच खड़े हुए हैं। लेकिन उस आर्थिक नाकेबंदी ने नेपाल को चीन के और नजदीक ला दिया। नेपाल में उस समय इतना जबरदस्त ईंधन का संकट था कि वहां के तेल पंप तक कई दिनों तक बंद रहे थे और उड़ानों तक के लिए तेल नहीं था। खास बात यह थी कि ओली उस समय प्रधानमंत्री थे और चीन ने उस समय नेपाल को तेल की आपूर्ति की थी। जिसका नुकसान यह हुआ कि नेपाल ने भारत पर से निर्भरता कम की और वहीं चीन को भी संबंधों में ‘सेंध’ लगाने का मौका मिल गया।
जिनपिंग के दौरे से पहले यांग पहुंचे नेपाल
चीनी राष्ट्रपति के दौरे से पहले तीन के विदेश मंत्री वांग यी भी द्वपक्षीय बातचीत की भूमिका तैयार करने के लिए नेपाल पहुंच चुके हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की यह यात्रा उस वक्त हो रही है, जब चीन साम्यवाद की 70वीं वर्षगांठ मना रहा है। खासबात यह होगी कि चीनी राष्ट्रपति की इससे पहले 11 से 13 अक्टूबर तक प्रस्तावित भारत यात्रा है, जो संभवतया तमिलनाडु में होनी तय है, जिसके बाद वे आधिकारिक यात्रा पर नेपाल के लिए रवाना हो सकते हैं। हालांकि उनके दौरे को लेकर नेपाल मीडिया में काफी सतर्कता बरत रहा है।
ओली की अहम भूमिका
इससे पहले नेपाल की राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने अप्रैल में नौ दिवसीय दौरे पर चीन की यात्रा पर थीं। इस दौरे की खास बात यह थी कि आर्थिक नाकेबंदी के बाद 2016 में नेपाल और चीन के बीच 2016 में पारगमन और परिवहन समझौता (टीटीए) हुआ था, जिसे अमल में लाने के लिए इस दौरे के दौरान दस्तखत किए गए। 2016 में अपनी चीन यात्रा के दौरान तत्कालीन नेपाली प्रधानमंत्री ओली ने इस पर अपनी सहमति जताई थी। इस समझौते के तहत चीन के चार बंदरगाहों और तीन भूमि बंदरगाहों तक नेपाल की पहुंच होगी।
शी जिनपिंग का पहला दौरा
हालांकि जिनपिंग इससे पहले भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, मालदीव की यात्रा कर चुके हैं, लेकिन इतने पड़ोस में होने के बावजूद नेपाल दौरा नहीं हुआ था। 2016 में भी शी जिनपिंग का नेपाल दौरा प्रस्तावित था, लेकिन बाद में इसे रद्द कर दिया गया। इस साल होने वाले दौरे से पहले भी खबरें आई थीं कि चीनी राष्ट्रपति ने अपना नेपाल दौरा रद्द कर दिया है। लेकिन दौरे को लेकर नेपाली सरकार सस्पेंस बना कर रखे हुए है। हालांकि राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी की चीन यात्रा के दौरान शी जिनपिंग और भंडारी के बीच दौरे को लेकर बातचीत हुई थी।
चीनी राष्ट्रपति का ‘धन्यवाद दौरा’
माना जा रहा है कि 2017 में नेपाल के चीन के अति महत्वाकांक्षी वन बेल्ट वन रोड प्रोजेक्ट को सहमति देने के बाद चीनी राष्ट्रपति की इस यात्रा को ‘धन्यवाद दौरे’ के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि सार्क देशों में भूटान को छोड़ कर सभी देश चीन की इस परियोजना में शामिल हो चुके हैं। हालांकि सहमति देने के बावजूद नेपाल ने इस योजना को लेकर कोई खास उत्साह अभी तक नहीं दिखाया है। वहीं जिनपिंग की इस यात्रा के दौरान नेपाल-चीन रेल संपर्क को नई ऊंचाइयां मिल सकती हैं।
नेपाल में छा रही चीनी भाषा
चीन और नेपाल के संबंधों में गहराई लगातार बढ़ रही है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस साल ही चीन ने नेपाल के स्कूलों में मंदारीन भाषा को पढ़ाने का प्रस्ताव रखा था, जिसे नेपाल की तरफ से मंजूरी भी मिल चुकी है, वहीं मंदारिन पढ़ाने वाले शिक्षकों की सेलरी भी चीन सरकार देगी। वहीं नेपाली युवा और व्यापार में भी चीनी भाषा की पैठ बढ़ रही है, चीनी भाषा में ‘नी-हाव’ (क्या हाल हैं?) बोलना वहां बेहद आम हो गया है।
भारत के मुकाबले चीन से लगातार पर्यटकों की आवाजाही बढ़ रही है। पिछले साल जनवरी से मार्च 2018 तक 34 हजार भारतीय पर्यटक नेपाल पहुंचे, वहीं चीनी पर्यटकों की संख्या 41 हजार के आसपास थी। काठमांडू के बिजनेस हब थमेल में चीनी भाषा में बोर्ड बेहद आम हो गए हैं और चीनी व्यापारी भी लीज पर दुकानें लेकर अपना व्यापार बढ़ा रहे हैं।