युद्ध की संभावना जताने के साथ चीनी मीडिया ने गाया 'नैतिकता' का राग
कहते हैं कि समय हर जख्म भर देता है, लेकिन सीमा विवाद की वजह से भारत और चीन के बीच उपजे तनाव में समय के साथ कोई कमी नहीं आ रही है। चीन वार्ता के दौरान तो सहयोग करने की बात करता है लेकिन सीमा पर उसकी हरकतें साफ बताती हैं कि वह पीछे हटने के मूड में नहीं है। चीन के मीडिया में प्रकाशित एक लेख भी इस विवाद को लेकर उसकी मानसिकता का प्रदर्शन कर रहा है।
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विस्तार
चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स में प्रकाशित एक लेख में युद्ध की संभावना तो जताई ही गई है साथ ही इसके लिए चीन को सैन्य और 'नैतिक' रूप से तैयार होने की सलाह भी दी गई है। ग्लोबल टाइम्स के एडिटर इन चीफ हू शिजिन ने यह लेख लिखा है। शिजिंग लिखते हैं कि चीन के लोग युद्ध नहीं चाहते लेकिन चीनी सेना को एक संभावित युद्ध के लिए सैन्य रूप से और नैतिक रूप से तैयार होना होगा।
शिजिंग ने लिखा, 'चीनी लोग युद्ध नहीं चाहते हैं, लेकिन हमारा कुछ पड़ोसी देशों के साथ क्षेत्रीय विवाद है। अमेरिका इन देशों को चीन के खिलाफ खड़ा होने के लिए उत्साहित कर रहा है। इनमें से कुछ देश समझते हैं कि अमेरिका का सहयोग उनके लिए एक रणनीतिक मौका है और वह चीन के साथ अपमानजनक व्यवहार करने की कोशिश करते हैं। उन्हें लगता है कि अमेरिका के रणनीतिक दबाव से चीन डरा हुआ है।'
'अपने हितों की रक्षा हेतु युद्ध के लिए तैयार रहे चीन'
वह आगे लिखते हैं, 'ऐसे देशों को लगता है कि अमेरिका की ओर से बनाए जा रहे दबाव के कारण चीन उनके साथ सैन्य विवाद में नहीं पड़ सकता। हम जितना चाहते हैं कि युद्ध न हो इस तरह की समस्याएं और विकट हो जाती हैं। ऐसी स्थिति में चीन को संभावित युद्ध में शामिल होने के लिए तैयार रहना चाहिए, जिसका उद्देश्य मूल हितों की रक्षा करना है। इसके साथ ही उसे युद्ध का परिणाम वहन करने के लिए भी तैयार रहना चाहिए।'
शिजिंग ने लिखा, 'युद्ध को लापरवाही से नहीं लड़ा जा सकता है, और अगर आप युद्ध में शामिल होते हैं तो आपको जीतना ही चाहिए। ऐसी जीत के दो मायने होते हैं। पहला, आप विपक्षी को युद्ध के मैदान में हराएं। दूसरा, यह नैतिक रूप से सही होना चाहिए। अगर हम अपनी अंतरराष्ट्रीय नैतिकता की कीमत पर युद्ध जीतते हैं तो इससे अमेरिका को चीन विरोधी एक गुट बनाने का मौका मिल जाएगा जो और समस्याकारक होगा।'
'पड़ोसी हो या अमेरिका, दोनों से युद्ध जीतने में सक्षम'
उन्होंने लेख में दावा किया कि अगर युद्ध उन पड़ोसी देशों में से किसी के साथ होता है जिनके साथ चीन का क्षेत्रीय विवाद चल रहा है तो हम युद्ध के मैदान में जीतने के लिए आश्वस्त हैं। इसी तरह से अगर चीन के जलक्षेत्र में अमेरिका के साथ भी युद्ध होता है, तो भी हमारी जीत के अच्छे आसार हैं। उन्होंने लिखा कि चीन एक उभरती हुई शक्ति है जिसे विचारधारा के स्तर पर अमेरिका और अन्य पश्चिमी देश नकारते रहे हैं।
शिजिंग ने युद्ध होने पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया पर भी बात की। उन्होंने लिखा, अगर चीन किसी पड़ोसी देश के साथ युद्ध करने का फैसला करता है तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय कमजोर पक्ष का समर्थन करेगा। इससे कोई मतलब नहीं होगा कि हमारा कदम न्यायोचित था या नहीं। अमेरिका पूरी तरह अपना ध्यान चीन के खिलाफ लगा देगा। ऐसे में हमें युद्ध की जटिलता को कम नहीं समझना चाहिए।
युद्ध में शामिल होने की स्थिति में चीन को दिए सुझाव
शिजिंग ने युद्ध में संलग्न होने की स्थिति में चीन सरकार को कुछ सुझाव भी दिए। उन्होंने लिखा, सबसे पहले हमें यह साफ करना होगा कि दूसरे पक्ष ने यथास्थिति का उल्लंघन किया है। दूसरा, हमें यह भी स्पष्ट करना होगा कि दूसरा पक्ष उकसाने वाली गतिविधियां कर रहा है। तीसरा, हमें अंतरराष्ट्रीय समुदाय को दिखाना होगा कि चीन ने युद्ध से पहले तनाव घटाने के लिए राजनयिक और राजनीतिक प्रयास किए थे।
उन्होंने आगे लिखा, 'चौथा, युद्ध होने की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बात से पूरी तरह वाकिफ होना चाहिए कि पहली गोली दूसरे पक्ष ने चलाई है न कि चीन ने। पांचवां, अगर हमें पहले गोली चलानी भी पड़े तो हमें पहले से ही एक अल्टीमेटम देना होगा ताकि एक न्यायसंगत तरीके से युद्ध शुरू किया जा सके। अगर हम इस स्थितियों का पालन कर सके तो जरूरत पड़ने पर चीन युद्ध में संलग्न हो सकता है।'