गिलगित-बाल्टिस्तान पर भारत के रुख के जवाब में है चीनी कार्रवाई: कमर आगा
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मेरी समझ से सिक्किम सीमा पर यह चीन की कार्रवाई गिलगित और बाल्टिस्तान पर भारत के आक्रामक रुख का जवाब है। मौसम विभाग ने इन दो इलाकों के मौसम की हाल बताने का सिलसिला शुरू किया है। भारत से इसे अपना हिस्सा मानता रहा है।
चीन ने यह संदेश दिया है कि अगर भारत की नीति आक्रामक रही तो वह सिक्किम को फिर मुद्दा बनाएगा। चीन को पता है कि गिलगित व बाल्टिस्तान सामरिक दृष्टि से कितने अहम है। चीनी के इस रवैये की सबसे महत्वपूर्ण वजह कोरोना के मोर्चे पर अपने ही घर में बुरी तरह घिर जाना है। बड़ी संख्या में मौतों के अलावा लोगों के रोजगार पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ा है। कई देश चीन के खिलाफ गोलबंद हो सकते हैं।
कई देशों ने आयात करने की जगह अपने ही देश में निर्माण और उत्पादन की रणनीति बनाई है। चीन के निर्यात में 80 फीसदी तक कमी आने का अनुमान लगाया जा रहा है। जाहिर तौर पर इस मोर्चे पर चीन के लोगों में जबर्दस्त नाराजगी है।
मुझे लगता है कि चीन जिस प्रकार चौतरफा संकटों से घिरा है, उससे कई और घटनाएं होंगी। चीन नए सिरे से सीमा पर तनाव पैदा कर भारत को परेशानी में डालने की कोशिश करेगा। इसलिए दोनों देशों की सेनाओं के बीच हुई हालिया झड़पों को सीमा पर होने वाली आम झड़पों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह चीन की भारत के साथ तनाव बढ़ाने की सोची समझी रणनीति का हिस्सा है।
पाकिस्तान का साथ देने और पूर्वोत्तर में सामरिक बढ़त हासिल करने की कोशिश
चीन का यह कदम पाकिस्तान को समर्थन देने का संदेश तो है ही। इसके साथ ही उसकी निगाहें सिक्किम के आसपास पूर्वोत्तर में भारत पर सामरिक बढ़त हासिल करने पर रही है। 1973 में अपनी इस मंशा के मद्देनजर चीन ने दोकलम पर कब्जा करने की कोशिश की, जिसे चिकन नेक कहा जाता है। ऐसा होता तो चीन सिलिगुड़ी के बेहद पास पहुंच जाता।