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AUKUS: चीन ने आईएईए में ऑकस परमाणु पनडुब्बियों की योजना के खिलाफ प्रस्ताव वापस लिया
Sat, 01 Oct 2022 03:48 AM IST
Jeet Kumar
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Sat, 01 Oct 2022 03:48 AM IST
सार
चीन ने 26 सितंबर से 30 सितंबर तक वियना में हुए अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के आम सम्मेलन में प्रस्ताव पारित कराने की कोशिश की।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : Social media
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विस्तार
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) में भारत की कूटनीतिक कौशल ने चीन को ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन व अमेरिका के बीच बने ऑकुस गठबंधन के विरुद्ध अपना प्रस्ताव वापस लेने के लिए मजबूर कर दिया। भारत के इस कदम की अमेरिका समेत कई देश तारीफ कर रहे हैं।
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ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अमेरिका में बनी ऑकुस सुरक्षा साझेदारी की घोषणा गत वर्ष सितंबर में हुई थी। चीन ने आईएईए में तर्क दिया कि यह पहल परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) के तहत उनकी जिम्मेदारियों का उल्लंघन है। साथ ही साथ चीन ने इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की भूमिका की भी आलोचना की।
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लेकिन भारत की सुविचारित भूमिका ने कई छोटे देशों को चीनी प्रस्ताव पर स्पष्ट रुख अपनाने में मदद की। जब चीन को यह महसूस हुआ कि उसके प्रस्ताव को बहुमत का समर्थन नहीं मिलेगा तो चीन ने 30 सितंबर को अपना मसौदा प्रस्ताव वापस ले लिया। जबकि चीनी सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने 28 सितंबर को इस मुद्दे पर चीन के सफल होने पर एक लेख भी जारी किया था।
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भारत कई छोटे देशों के साथ करेगा काम
अमेरिका ने कहा है कि भारत ने इस मुद्दे पर जो कूटनीतिक कौशल दिखाया वह काबिल-ए-तारीफ है। उसने आईएईए से जुड़े कई छोटे देशों को चीन के इस प्रस्ताव के खिलाफ मना लिया। चीन द्वारा प्रस्ताव का वापस लेना भारतीय प्रतिबद्धता को दिखाता है। बता दें कि इस साल 35 बोर्ड सदस्य बनाए गए हैं जिनमें भारत समेत अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, ब्राजील, बुरुंडी, कनाडा, चीन, कोलंबिया, मिस्र, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, अमेरिका आदि शामिल हैं।
परमाणु पनडुब्बियों की योजना के खिलाफ था प्रस्ताव
चीन के मसौदा प्रस्ताव ऑस्ट्रेलिया को परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियों के साथ उसे यह आधुनिक तकनीक प्रदान करने वाले अमेरिका के खिलाफ था। चीन ने 26 से 30 सितंबर तक वियना में हुए आईएईए के आम सम्मेलन में इस पर प्रस्ताव पास कराने की कोशिश की। लेकिन भारतीय कूटनीति के आगे वह नाकाम रहा।