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अरुणाचल में भारत ने तैनात की ब्रह्मोस मिसाइल, चीन ने दी धमकी

Mon, 22 Aug 2016 07:40 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Mon, 22 Aug 2016 07:40 PM IST
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China warns India after india deploy Brahmos in AP
ब्रह्मोस

भारत ने चीन से सटे अरुणाचल प्रदेश में ब्रह्मोस मिसाइलें तैनात कर दी हैं, भारत के इस कदम से चीन भड़क गया है। चीन की पीपल्‍स लिब्रेशन आर्मी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए द पीएलए डेली में भारत को चेतावनी तक दे डाली है।

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चेतावनी में कहा गया है कि चीन भी इस तरह के कदम उठा सकता है, जिससे रिश्‍तों पर न केवल नकारात्‍मक प्रभाव पड़ेगा, बल्‍क‍ि क्षेत्रीय संतुलन पर भी असर पड़ेगा। पीएलए डेली में लिखा गया है कि ''भारत बॉर्डर पर सुपरसोनिक मिसाइलें तैनात करके आत्‍मरक्षा की जरूरत की सीमा को पार कर गया है।
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भारत के इस कदम से चीन के तिब्‍बत और यूनान प्रांत के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है। पीएलए डेली का दावा है कि भारत ने अपने ‘जवाबी संतुलन कायम करने और टकराव पैदा करने’ के नजरिए की वजह से यह कदम उठाया है। चीनी सेना ने यह भी कहा है कि भारत सीमाई इलाकों में सुखोई विमानों और ड्रोन्‍स की तैनाती करके सैन्‍य दृष्‍ट‍िकोण से फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है।
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पीएल डेली में ब्रह्मोस मिसाइलों की क्षमता की तारीफ करते हुए कहा गया कि इसकी वजह से चीन के सीमा से सटे इलाकों के लिए खतरा पैदा हो गया है। हालांकि, यह भी कहा गया कि कुछ खामियों की वजह से ये मिसाइलें चीन के अंदरूनी इलाकों को निशाना बनाने में अक्षम हैं।

बता दें कि इस महीने की शुरुआत में ही एनडीए सरकार ने सेना को सामरिक दृष्‍ट‍िकोण से अहम माने जाने वाले इस क्षेत्र में ब्रह्मोस मिसाइल के एडवांस्‍ड वर्जन की तैनाती के लिए रजामंदी दी है। इस प्रोजेक्‍ट पर 4300 करोड़ रुपए की लागत आने की उम्‍मीद है। इस रेजिमेंट में करीब 100 मिसाइलें, पांच ऑटोमेटिक मोबाइल लॉन्‍चर्स, कई हेवी ड्यूटी ट्रक और एक मोबाइल कमांड पोस्‍ट होगा। 

क्या है चीन के डर का कारण

China warns India after india deploy Brahmos in AP
ब्रह्मोस

ब्रह्मोस मिसाइलों की रेंज 290 किमी होती है। इसे रूस की मदद से तैयार किया गया है। आर्मी ने इसके कई टेस्‍ट किए हैं। आखिरी टेस्‍ट मई 2015 में ईस्‍टर्न सेक्‍टर में किए गए थे। इन मिसाइलों की एक खासियत यह भी है कि ये पहाड़ों के संकरे इलाकों में छिपे लक्ष्‍यों को निशाना बना सकती है।

इसे किसी भी प्‍लेटफॉर्म, मसलन-सबमरीन, शिप, एयरक्राफ्ट और जमीन पर लगे मोबाइल लॉन्‍चर्स के जरिए दागा जा सकता है।

यह मिसाइल ध्‍वनि की रफ्तार के मुकाबले 2.8 गुना रफ्तार से चलती है। यह 300 किलो वजन तक के पारंपिक आयुध ढोने में सक्षम है। चीन मानता है कि इन मिसाइलों की जद में आने वाले उसके सीमा से सटे इलाकों पर तेज और सटीक हमला किया जा सकता है।

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