{"_id":"59fde56f4f1c1bf2538baac4","slug":"china-use-of-terrorist-azhar-masood-to-control-terrorism-in-jinjiang","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"जिनजियांग में आतंकवाद काबू पाने के लिए आतंकी मसूद का इस्तेमाल कर रहा चीन","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
जिनजियांग में आतंकवाद काबू पाने के लिए आतंकी मसूद का इस्तेमाल कर रहा चीन
गुंजन कुमार/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 05 Nov 2017 06:16 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चीन अपने उत्तर पश्चिमी क्षेत्र के जिनजियांग प्रांत में कथित आतंकवाद और अलगाववाद पर काबू पाने के लिए जैश-ए-मोहम्मद सरगना मौलाना मसूद अजहर का इस्तेमाल कर रहा है। जिनजियांग में पिछले दो दशक में इस्लामिक कट्टरवाद आतंकवाद और अलगाववाद का रूप ले चुका है जिसकी जड़ अफगानिस्तान और पाकिस्तान को माना जाता है।
अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा से आतंक की सप्लाई लाइन तोड़ने में मसूद चीन के लिए अहम रोल निभा रहा है। मामले से जुड़ी भारतीय खुफिया एजेंसियों का मानना है कि इसी वजह से चीन मसूद जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी को खुलेआम समर्थन देकर भारत जैसे अहम पड़ोसी से रंजिश का जोखिम उठा रहा है।
खुफिया एजेंसी के उच्च पदस्थ सूत्रों ने अमर उजाला को बताया कि जिनजियांग के अलावा चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) के कुछ संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा के लिए भी मसूद के साथ चीन की सांठगांठ चल रही है।
विज्ञापन
सूत्रों के मुताबिक सीपीईसी की सुरक्षा को लेकर चीन को पाकिस्तान सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) स्तर पर भी इस मामले पर नजर रखी जा रही है। भारत का मानना है कि चीन भी आतंकवाद से आतंकवाद की काट ढूंढने की कोशिश में है।
विदेश मंत्रालय में चीन मामले से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चीन में आतंकवाद का चरम मोड़ 2014 में आया जब मुस्लिम बहुल जिनजियांग के एक युवक ने प्रसिद्ध तियानानमेन स्क्वायर पर आत्मघाती बमबारी कर दर्जनों चीनी नागरिकों को मार डाला था। उसके बाद अल कायदा ने जिनजियांग में कथित जेहाद का फरमान जारी किया।
पिछले कुछ सालों में इस्लामिक स्टेट (आईएस) के प्रमुख अबु बकर अल-बगदादी ने भी चीन के खिलाफ कई बयान दिए। अपनी सरहद को लेकर अति संवेदनशील माने जाने वाले चीन ने जिनजियांग में काफी सख्ती कर दी।
विज्ञापन
अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा से आतंक की सप्लाई लाइन तोड़ने में मसूद चीन के लिए अहम रोल निभा रहा है। मामले से जुड़ी भारतीय खुफिया एजेंसियों का मानना है कि इसी वजह से चीन मसूद जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी को खुलेआम समर्थन देकर भारत जैसे अहम पड़ोसी से रंजिश का जोखिम उठा रहा है।
विज्ञापन
खुफिया एजेंसी के उच्च पदस्थ सूत्रों ने अमर उजाला को बताया कि जिनजियांग के अलावा चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) के कुछ संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा के लिए भी मसूद के साथ चीन की सांठगांठ चल रही है।
विज्ञापन
सूत्रों के मुताबिक सीपीईसी की सुरक्षा को लेकर चीन को पाकिस्तान सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) स्तर पर भी इस मामले पर नजर रखी जा रही है। भारत का मानना है कि चीन भी आतंकवाद से आतंकवाद की काट ढूंढने की कोशिश में है।
विदेश मंत्रालय में चीन मामले से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चीन में आतंकवाद का चरम मोड़ 2014 में आया जब मुस्लिम बहुल जिनजियांग के एक युवक ने प्रसिद्ध तियानानमेन स्क्वायर पर आत्मघाती बमबारी कर दर्जनों चीनी नागरिकों को मार डाला था। उसके बाद अल कायदा ने जिनजियांग में कथित जेहाद का फरमान जारी किया।
पिछले कुछ सालों में इस्लामिक स्टेट (आईएस) के प्रमुख अबु बकर अल-बगदादी ने भी चीन के खिलाफ कई बयान दिए। अपनी सरहद को लेकर अति संवेदनशील माने जाने वाले चीन ने जिनजियांग में काफी सख्ती कर दी।
तालिबान से बिखरे आतंकियों पर मसूद की पकड़
सूत्रों के मुताबिक चीन का मानना है कि सेंट्रल एशिया से सटे जिनजियांग में इस्लाम का अतिवाद, अलगाववाद और आतंकवाद प्रभावी है। इसका स्रोत अफगानिस्तान और पाकिस्तान से है जो चीन के खिलाफ प्रोपगेंडा से लेकर हर तरह का समर्थन कर रहा है।
समर्थन करने वालों में तालिबान और पाकिस्तान के लाल मस्जिद ऑपरेशन के बाद बिखरे आतंकवादियों का बड़ा हाथ है। आतंकवादियों के इस तबके में मसूद अजहर की गहरी पैठ है।
दरअसल ये समर्थक पहले मसूद के जैश-ए-मोहम्मद की शरण में ही आए थे। सूत्रों के मुताबिक यही मसूद की ताकत है जिसका इस्तेमाल चीन करना चाह रहा है। इसके एवज में चीन मसूद को अमेरिका और भारत जैसे देशों से बचा रहा है।
उइगुर मुस्लिमों पर भी सख्ती
सूत्रों ने बताया कि चीन ने जिनजियांग में स्थानीय उइगुर मुसलमानों पर काफी सख्ती बरती है। गौरतलब है कि कम्युनिस्ट चीनी सरकार किसी धर्म को नहीं मानती। उसी आधार पर जिनजियांग की महिलाओं को बुरका पहनने की इजाजत नहीं है।
रमजान के दिनों में रोजा रखने पर भी रोक है। सरकारी तंत्र में काम करने वाले उइगुर नागरिक मस्जिद में नवाज नहीं पढ़ सकते। चीन प्रशासन वहां नागरिकों के मोबाइल और कंप्यूटर का औचक निरीक्षण करता है।
अगर किसी के यंत्र में कोई भी धार्मिक फोटो या कंटेंट पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होती है। सूत्रों का मानना है कि इस सख्ती से वहां के नागरिकों में बहुत रोष है और प्रतिक्रियास्वरूप भीड़ में चाकू चलाने और आतंक के अलग अलग हथकंडे अपनाते हैं। चीन के मुताबिक जिनजियांग अंतरराष्ट्रीय जेहाद केरडार पर है।
समर्थन करने वालों में तालिबान और पाकिस्तान के लाल मस्जिद ऑपरेशन के बाद बिखरे आतंकवादियों का बड़ा हाथ है। आतंकवादियों के इस तबके में मसूद अजहर की गहरी पैठ है।
दरअसल ये समर्थक पहले मसूद के जैश-ए-मोहम्मद की शरण में ही आए थे। सूत्रों के मुताबिक यही मसूद की ताकत है जिसका इस्तेमाल चीन करना चाह रहा है। इसके एवज में चीन मसूद को अमेरिका और भारत जैसे देशों से बचा रहा है।
उइगुर मुस्लिमों पर भी सख्ती
सूत्रों ने बताया कि चीन ने जिनजियांग में स्थानीय उइगुर मुसलमानों पर काफी सख्ती बरती है। गौरतलब है कि कम्युनिस्ट चीनी सरकार किसी धर्म को नहीं मानती। उसी आधार पर जिनजियांग की महिलाओं को बुरका पहनने की इजाजत नहीं है।
रमजान के दिनों में रोजा रखने पर भी रोक है। सरकारी तंत्र में काम करने वाले उइगुर नागरिक मस्जिद में नवाज नहीं पढ़ सकते। चीन प्रशासन वहां नागरिकों के मोबाइल और कंप्यूटर का औचक निरीक्षण करता है।
अगर किसी के यंत्र में कोई भी धार्मिक फोटो या कंटेंट पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होती है। सूत्रों का मानना है कि इस सख्ती से वहां के नागरिकों में बहुत रोष है और प्रतिक्रियास्वरूप भीड़ में चाकू चलाने और आतंक के अलग अलग हथकंडे अपनाते हैं। चीन के मुताबिक जिनजियांग अंतरराष्ट्रीय जेहाद केरडार पर है।