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चीन ने जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन पर जताया विरोध, क्या अक्साई चीन को लेकर चिंतित है चीन?
Thu, 06 Aug 2020 10:39 AM IST
Tanuja Yadav
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Tanuja Yadav
Updated Thu, 06 Aug 2020 10:39 AM IST
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jammu kashmir photos after article 370 revoked
- फोटो : बासित जरगर
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पांच अगस्त को जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा हटाने के फैसले को एक साल हो गया और इसकी वर्षगांठ पर चीन ने अपने तेवर दिखाए हैं। चीन ने पाकिस्तान की भाषा बोलते हुए जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन का विरोध किया है। चीन ने इस फैसले को गैर-कानूनी और अमान्य घोषित किया है।
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चीन ने कहा कि उनकी स्थिति इस फैसले पर साफ और स्थाई है। यह मुद्दा पाकिस्तान और भारत के बीच इतिहास में जुड़ा एक विवाद है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा कि यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर, सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और पाकिस्तान और भारत के बीच द्विपक्षीय समझौतों में स्थापित तथ्य है।
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हालांकि भारत ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर चीन के पास कोई सुने जाने का अधिकार नहीं है। जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन पर चीन का विरोध करना पाकिस्तान के बोली बोलना जैसा है। चीन लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने के फैसले को एक अधिक मुखर करने वाले अग्रदूत के तौर पर देखता है।
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चीन का मानना है कि ऐसा करने से 1950 के युद्ध में भारत के हिस्से को कब्जे में लेने वाले अक्साई चीन पर भारत अपना अधिकार जमा सकता है। हालांकि अक्साई चीन पर भारत हमेशा अपना दावा करता आया है। गृहमंत्री अमित शाह के बयान के बाद जम्मू और कश्मीर को दो अलग केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया गया था।
पिछले साल लोकसभा में अमित शाह ने कहा था कि जब भी मैं जम्मू और कश्मीर की बात करूंगा तो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और अक्साई चीन को इसमें गिना जाएगा। जिसके बाद चीन में इस बयान को लेकर चिंता ज्यादा बढ़ गई। इसी कारण वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन ने ऐसा हमलावर रवैया अपनाया।
पिछले साल 11 सितंबर को चीन की ओर से छुटपुट हमले की खबरें सुनने में आई थीं, जिसमें दस भारतीय सैनिक घायल हो गए थे। एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया था कि पैंगोंग त्सो झील के उत्तरी किनारे पर चीनी सेना ने फिंगर आठ की ओर से जाने से भारतीय सेना को रोकने का प्रयास किया था।
जून से लेकर अब तक सीमा विवाद पर पांच बार उच्च स्तरीय बैठक हो चुकी है, जिसमें से चार बैठकें 15 जून के बाद हुईं। चीन ने पैंगोंग त्सो झील से खुद को हटाने के लिए मना कर दिया था। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के जरिए चीन की मंशा साफ नजर आती है कि वो जिनजियांग प्रांत और अक्साई चीन को चलाने वाली संपत्ति को सुरक्षित करना चाहता है।