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नेपाल सीमा से सटे ट्राई जंक्शन पर ड्रैगन की नजर, भारी पड़ सकती है 'एसएसबी' के आईजी को दोहरी जिम्मेदारी

Mon, 08 Jun 2020 04:56 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 08 Jun 2020 04:56 PM IST
सार

आईजी के पास एडमिनिस्ट्रेशन का चार्ज होता है और उन्हें अतिरिक्त चार्ज के रूप में रानीखेत सीमांत मुख्यालय की जिम्मेदारी सौंप दी जाती है। बतौर रणबीर सिंह, आईजी एसएस चतुर्वेदी को स्थाई तौर पर रानीखेत सीमांत मुख्यालय में होना चाहिए, लेकिन वे यहां कभी कभार ही आते हैं...

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china eyeing on india nepal TRAI junction, may be overshadowed by SSB IG double responsibility
Indo nepal border - फोटो : अमर उजाला (सांकेतिक)

विस्तार

सीमांत ट्राई-जंक्शन 'काला पानी, लिपुलेख और तवाघाट' जो भारत, चीन और नेपाल बॉर्डर से सटा हुआ है, वहां पर एसएसबी के आईजी को दोहरी जिम्मेदारी सीमा चौकसी के लिए भारी पड़ सकती है।

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यह बात सभी जानते हैं कि इस ट्राई जंक्शन पर ड्रैगन यानी चीन की नजर है, इसके बावजूद एसएसबी के आईजी दिल्ली मुख्यालय में बैठकर बॉर्डर व्यवस्था का कामकाज संभाल रहे हैं, जबकि उनका सीमांत मुख्यालय उत्तराखंड के रानीखेत में है। 
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कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह का कहना है कि एसएसबी के आईजी एसएस चतुर्वेदी 'आईपीएस' दिल्ली में ही रहते हैं। उनके पास तो यहां का अतिरिक्त चार्ज है।
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मौजूदा समय में वे आईजी 'एडमिनिस्ट्रेशन' हैं। एसएसबी में जानबूझ कर यह व्यवस्था की गई है कि आईजी 'एडमिन' ही रानीखेत सीमांत मुख्यालय का अतिरिक्त कामकाज देखेंगे। इतने अहम बॉर्डर का चार्ज स्थाई तौर पर कैडर के डीआईजी सम्भाल रहे हैं।

भारत नेपाल बॉर्डर पर तैनात है एसएसबी 

पिथौरागढ़ जिला उत्तराखंड का महत्वपूर्ण संवेदनशील बार्डर है। हाल ही में नेपाल ने अपने मानचित्र के हिस्से में यहां के क्षेत्र को दर्शाया है। इस बॉर्डर की सुरक्षा की जिम्मेदारी एसएसबी को सौंपी गई है।

उत्तराखंड के लिपुलेख से मानसरोवर की यात्रा सिर्फ 90 किमी है। नेपाल और सिक्किम के रास्ते मानसरोवर आने-जाने में 20 दिन से ज्यादा वक्त लगता है। लिपुलेख में सड़क बनने से यह यात्रा केवल तीन दिन में पूरी हो सकती है।

सिक्किम और नेपाल की तुलना में उत्तराखंड वाला यह रास्ता सबसे छोटा माना जाता है। उत्तराखंड वाले रास्ते के भी तीन हिस्से हैं। एक, पिथौरागढ़ से तवाघाट, दूसरा तवाघाट से घटियाबगढ़ और तीसरा, घटियाबढ़ से लिपुलेख दर्रा।

पिथौरागढ़ से तवाघाट तक तो सड़क है, मगर तवाघाट से घटियाबगढ़ के बीच केवल एक मार्गी रास्ता है। बीआरओ यहां पर सड़क की चौड़ाई बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। घटियाबगढ़ से लिपुलेख दर्रे के अधिकांश हिस्से पर पक्की सड़क का निर्माण हुआ है।

इस संवेदनशील बार्डर पर लगी है ड्रैगन की नजर

महासचिव रणबीर सिंह के अनुसार, उत्तराखंड के धारचूला से काला पानी नदी के साथ फैले हुए इलाके पर ड्रैगन की नजर है। भारत-नेपाल बॉर्डर पर एसएसबी तैनात है। इस इलाके की चौकसी बेहतर तरीके से हो, इसके लिए रानीखेत में बल हेडक्वार्टर बनाया गया था।

इस हेडक्वार्टर की कमान आईजी को दी गई थी। अब लंबे समय से यहां पर आईजी नहीं बैठ रहे हैं। वजह, जिस आईजी स्तर के आईपीएस अधिकारी के पास रानीखेत सीमांत मुख्यालय का कार्यभार है, वे खुद दिल्ली स्थित एसएसबी मुख्यालय में बैठते हैं।

आईजी के पास एडमिनिस्ट्रेशन का चार्ज होता है और उन्हें अतिरिक्त चार्ज के रूप में रानीखेत सीमांत मुख्यालय की जिम्मेदारी सौंप दी जाती है। बतौर रणबीर सिंह, आईजी एसएस चतुर्वेदी को स्थाई तौर पर रानीखेत सीमांत मुख्यालय में होना चाहिए, लेकिन वे यहां कभी कभार ही आते हैं।

नियम यह कहता है कि आईजी नियमित तौर पर रानीखेत मुख्यालय में बैठें। एसोसिएशन के कुमाऊं मंडल के अध्यक्ष एमएस नेगी व उपाध्यक्ष तारादत्त शर्मा ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से अनुरोध किया है कि सीमा पर बेहतर तालमेल, सुरक्षा संबंधी जरूरतों व अतिसंवेदनशील बार्डर की चाक-चौबंद चौकसी के लिए स्थाई तौर पर कैडर आफिसर्स को सीमांत मुख्यालय रानीखेत का कार्यभार दिया जाए।



ऐसे अफसर को यहां की कमान सौंपी जाए, जिसने जवानों के साथ सरहदी बंकरों में रातें गुजारीं हों। साथ ही वह अधिकारी यहां के बार्डर इलाकों की भौगोलिक स्थिति से भलीभांति परिचित हो।

इस बाबत एसएसबी प्रवक्ता का कहना है कि आईजी सीमांत हेडक्वार्टर का दौरा करते रहते हैं। वहां स्थायी डीआईजी की तैनाती की गई है।

फिलहाल आईजी ‘एडमिन’ के पास ही रानीखेत मुख्यालय का चार्ज है। बॉर्डर की चौकसी में कोई ढिलाई नहीं बरती जा रही।

 

 

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