लद्दाख में पैंगोंग त्सो झील को खाली नहीं करना चाहता चीन, आसान नहीं आगे की लड़ाई

शशिधर पाठक, नई दिल्ली Updated Fri, 03 Jul 2020 12:14 AM IST
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(प्रतीकात्मक तस्वीर)
(प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI

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सार

हॉट स्प्रिंग, गलवां क्षेत्र से संतोष कर ले भारत
पैगांग त्सो लेक पर इरादा नेक नहीं, डेपसांग भी निगाह में
उसने बना लिए हैं बंकर, खुले में सीना ताने हैं हमारे सैनिक

विस्तार

चीन ने लद्दाख में सतरंज के घोड़े की तरह ढाई कदम आगे, दो कदम पीछे चल रहा है। उसका इरादा पैंगोंग त्सो, लेक क्षेत्र खाली नहीं करना चाहता। उसने वहां स्थायी बंकर, सैन्य संरचना खड़ी कर ली है। उसका इरादा यहां से अक्साई चिन से होकर गुजरने वाले वन बेल्ट, वन रोड को अपनी आंखों के नीचे सुरक्षा देने की है। वह डेपसांग के अलावा अन्य क्षेत्र पर लगातार सैन्य जमावड़ा बढ़ा रहा है।
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इसके समानांतर पेट्रोलिंग प्वाइंट 14, गलवां नदी घाटी क्षेत्र और हॉट स्प्रिंग को खाली करने में चीन को खास आपत्ति नहीं है। बताते हैं कि चीनी पक्ष चाहता है कि भारत की सेना मई के पहले वाले स्थिति में लौटे और चीन की सेना भी हॉट स्प्रिंग, गलवां नदी क्षेत्र से पीछे हट जाएगी।
सूत्र बताते हैं कि पैंगोंग त्सो लेक एरिया पर चीन के सैन्य कमांडर, राजनयिक कोई बात करने के पक्ष में नहीं हैं। इस बर्फ को पिघला पाने में रणीनतिकारों को पसीना आ रहा है। चीन चाहता है कि कुछ वह पीछे हट जाए और कुछ भारत पीछे हटकर समझौता कर ले।

असल मुसीबत तो यह है

सैन्य सूत्रों के हवाले से मिल रही जानकारी के मुताबिक चीन ने पैंगोंग त्सो लेक क्षेत्र में चीन की सेना डटे रहने के मूड से आई है। उसने बातचीत की आड़ में इस क्षेत्र में स्थायी बंकर, सैन्य संरचना खड़ी कर ली है। निगरानी टॉवर आदि तैयार कर रहा है। चीन के फाइटर जेट, एंटीएयरक्राफ्ट गन, एंटी मिसाइल प्रणाली, सैन्य तैनाती लगातार बढ़ रही है। सूत्र का कहना है कि चीन के सैनिकों के पास इस क्षेत्र में डटे रहने के लिए गुणवत्तापूर्ण वर्दी, जूते, वाटर प्रूफ डेस सब है। टेंट आदि भी हैं।

स्थायी बंकर में छिपकर बैठने, सुरक्षित रहने का इंतजाम है। बताते हैं कि इसके समानांतर भारतीय सैनिक खुले में सीना तानकर डटे हैं। सैनिकों के पास वहां के मौसम का सामना करने वाले संसाधन नहीं हैं। टेंट का प्रॉपर इंतजाम नहीं है। न ही भारत ने स्थायी संरचना खड़ी की है। बताते हैं कि कदाचित इस स्तर की सैन्य तैनाती नवंबर-दिसंबर (जाड़े) तक बनी रह गई तो दुरूह स्थिति पैदा हो जाएगी। पैंगोंग त्सो लेक ठंड में जम जाती है। तापमान काफी नीचे चला जाता है। भारतीय सैन्य बलों को तब इस स्थिति से भी गुजरना पड़ेगा।
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