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छह जिलों का जहरीला पानी पीकर बच्चे हुए बीमार, पहुंचे एनजीटी

Tue, 19 Jul 2016 08:27 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 19 Jul 2016 08:27 PM IST
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children of six district become sick by poisonous water

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के छह जिलों में जहरीले पानी की वजह से कई बच्चे गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। मंगलवार को बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, मेरठ और गाजियाबाद से यह करीब पंद्रह बीमार बच्चे नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में प्रधान पीठ के सामने पहुंचे।

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एनजीटी ने इन बच्चों को सामने देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और संबंधित प्राधिकरणों को कड़ी फटकार लगाई है। पीठ ने कड़ा निर्देश देते हुए सरकार और प्राधिकरणों की ओर से लोगों को पेय योग्य जल मुहैया न कराए जाने को दुखद बताया है। मामले की अगली सुनवाई 29 अगस्त को होगी।
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एनजीटी की प्रधान पीठ ने इन छह जिलों में पेय जल और संबंधित गांवों में बीमार बच्चों की स्थिति की जांच के लिए एक समिति गठित की है। साथ ही सूबे के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे संबंधित जिलाधिकारियों को नोटिस जारी करें व कमेटी के साथ तीन दिनों में बैठक कर समस्या का समाधान निकालें। पीठ ने कहा कि यह समिति जांच कर एक सूची भी ट्रिब्यूनल में दाखिल करे दिक कितने लोग जहरीला पानी पीकर गंभीर बीमारियों के शिकार हैं।
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जस्टिस स्वतंत्र की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार को दोआबा पर्यावरण समिति के मामले की सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया। याची व वैज्ञानिक सीवी सिंह और एडवोकेट गौरव कुमार बंसल ने आरोप लगाया कि बागपत के कुल 13 गांवों में पानी की अनुपलब्धता है। भू-जल प्रदूषित होने की वजह से हैंडपंप से आने वाला अत्यंत जहरीला है। इस वजह से इन बच्चों में जन्मजात कई गंभीर बीमारियां हो रही हैं।

पीठ करेगी गांवों का दौरा

children of six district become sick by poisonous water

पीठ ने जांच कमेटी में मुख्य सचिव, जल निगम के प्रबंध निदेशक, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन व सदस्य सचिव को शामिल किया है। पीठ ने कहा कि यह कमेटी विभिन्न गांवों का दौरा करेगी साथ ही पेयजल की स्थिति का पता भी करेगी। वहीं जिन हैंडपंप में खराबी है उन्हें चिन्हित कर हटाया जाए।

पीठ ने कहा कि आदेश के बावजूद गांवों में पेयजल मुहैया नहीं कराया जा रहा है। यह दुखद है कि जहरीला पानी पीकर बच्चों को गंभीर बीमारियों से जूझना पड़ रहा है। पीठ ने कहा कि यदि कमेटी जांच करने में देरी करती है तो कमेटी के सदस्यों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

पीठ ने अपने निर्देश में कहा कि अनुच्छेद 21 के तहत स्वच्छ जल और वायु हासिल करना सभी का अधिकार है। वहीं प्राधिकरण लोगों को यह बुनियादी अधिकार देने में पूरी तरह विफल हैं।

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