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खुशखबर: 12 से18 साल के बच्चों का अगस्त से हो सकेगा टीकाकरण
Mon, 28 Jun 2021 05:32 AM IST
Jeet Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Mon, 28 Jun 2021 05:32 AM IST
सार
- एनटीएजीआई प्रमुख ने कहा, जायडस कैडिला के टीके का परीक्षण जुलाई के आखिर तक हो जाएगा पूरा
- डॉ. एनके अरोड़ा ने कहा, डेल्टा प्लस वैरिएंट तीसरी लहर का कारण बनेगा, यह अभी कहना कठिन
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
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विस्तार
कोरोना महामारी की तीसरी लहर की आहट के बीच खुशखबरी है। 12-18 साल के बच्चों को जायडस कैडिला का टीका अगस्त से लगाया जा सकेगा। इसका परीक्षण जुलाई के आखिर तक समाप्त हो जाएगा।
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टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) के अध्यक्ष डॉ. एनके अरोड़ा ने यह जानकारी देते हुए कहा, देश में कोरोना की दूसरी लहर अभी थमी भी नहीं है और इस बीच वायरस के डेल्टा प्लस स्वरूप का खौफ बन गया।
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डेल्टा प्लस वैरिएंट अन्य की तुलना में फेफड़ों के ऊतकों को ज्यादा प्रभावित करेगा। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इससे बीमारी और गंभीर होगी और तेजी से फैलेगी।
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डॉ. एनके अरोड़ा ने बताया कि डेल्टा प्लस वैरिएंट कोरोना की तीसरी लहर का कारण बनेगा, यह अनुमान लगाना या कुछ भी कहना बहुत कठिन है। हम दूसरी लहर से बुरी तरह प्रभावित रहे हैं और यह अब भी जारी है। बीते आठ-दस दिन से रोज मिलने वाले मरीजों की संख्या 50 हजार के आसपास है। कुछ स्थानों पर अब भी अधिक मरीज मिल रहे हैं।
उन्होंने कहा, डेल्टा प्लस स्ट्रेन का दुष्प्रभाव तभी पता चलेगा, जब इसके अधिक मामले सामने आएंगे। राहत यह है कि जिन लोगों को टीके की पहली या दूसरी खुराक लग चुकी है उनमें डेल्टा प्लस संक्रमण के बहुत हल्के लक्षण देखे गए हैं। हमें बहुत करीब से वायरस के इस स्वरूप और इसके प्रसार पर नजर रखनी होगी। इसी से वायरस के फैलाव की रूपरेखा का पता चल सकता है।
कुछ लोग डेल्टा प्लस से संक्रमित, पर लक्षण नहीं
डॉ. अरोड़ा ने कहा कि डेल्टा प्लस वैरिएंट के मामले और भी अधिक हो सकते हैं। कुछ लोग इससे संक्रमित हैं, लेकिन उनमें लक्षण नहीं हैं। इस वजह से ऐसे लोग खुद के साथ दूसरों को भी संक्रमित कर रहे हैं। ग्यारह जून को डेल्टा प्लस की पहचान हुई थी। देशभर में अब तक कुल 51 मामले सामने आए हैं।
जीनोमिक सर्विलांस ने किया सटीक काम
डॉ. अरोड़ा ने बताया कि जीनोमिक सर्विलांस टीम ने समय पर वायरस के इस स्वरूप को पहचान लिया। इसी आधार पर राज्यों को इस रूप को लेकर गंभीर और सतर्क होने के लिए कह दिया गया है। राज्यों ने अपने स्तर पर काम भी शुरू कर दिया है। जिस भी जिले में वायरस का ये रूप मिला है, वहां इसके फैलने का खतरा ज्यादा है। ऐसे जिलों में टीकाकरण अभियान को तेज करना होगा, जो इससे लड़ाई को आसान बनाएगा।
टीका और सावधानी बचाव का उपाय
डॉ. अरोड़ा का कहना है कि पहली और दूसरी लहर में बड़ी संख्या में लोग संक्रमित हुए हैं। विज्ञान कहता है कि बड़ी संख्या में लोग संक्रमित हो चुके हैं तो अगली लहर में संक्रमण के कारण सर्दी जुकाम जैसी दिक्कत हो सकती है, गंभीर या जानलेवा स्थिति में जाने से बचा जा सकता है। टीकाकरण सबसे अहम हथियार है, जिसके जरिए वायरस को हराया जा सकता है। इसके अलावा सभी सावधानी बरतनी होगी।