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चिकनगुनिया: एक बार किया अटैक तो दोबारा इससे डरने की नहीं है जरूरत
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 24 Sep 2016 04:56 PM IST
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राजधानी दिल्ली सहित देश के कई इलाके में बीते कुछ हफ्तों में चिकनगुनिया के मरीज देखने को मिले हैं। इनमें कई की मौत भी हो गई। इस बीच इस बीमारी पर एक्सपर्ट ने नई जानकारी दी है।
अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, यदि किसी व्यक्ति को एक बार चिकनगुनिया हो चुका है तो उसे जीवन में दोबारा कभी इस बीमारी से सामना नहीं करना पड़ेगा। एम्स के डॉक्टरों के मुताबिक, चिकनगुनिया वायरस का स्ट्रेन सिंगल होता है। इस वायरस से बीमार व्यक्ति में कुछ दिनों बाद ऐंटीबॉडी बन जाता है। इससे वायरस दोबारा उस पर अटैक नहीं कर पाता है। हालांकि, जिनका इम्यून सिस्टम बहुत कमजोर होता है, उनमें दोबारा यह बीमारी होने का खतरा बना रहता है।
वहीं डेंगू के सवाल पर उन्होंने कहा कि यही परिस्थितियां डेंगू पर भी लागू होती है। मच्छरों के काटने के बाद चार टाइप के डेंगू होते हैं। मतलब, किसी को एक टाइप का डेंगू एक से ज्यादा बार नहीं हो सकता। लेकिन, दूसरे टाइप का डेंगू होने की संभावना बनी रहती है।
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अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, यदि किसी व्यक्ति को एक बार चिकनगुनिया हो चुका है तो उसे जीवन में दोबारा कभी इस बीमारी से सामना नहीं करना पड़ेगा। एम्स के डॉक्टरों के मुताबिक, चिकनगुनिया वायरस का स्ट्रेन सिंगल होता है। इस वायरस से बीमार व्यक्ति में कुछ दिनों बाद ऐंटीबॉडी बन जाता है। इससे वायरस दोबारा उस पर अटैक नहीं कर पाता है। हालांकि, जिनका इम्यून सिस्टम बहुत कमजोर होता है, उनमें दोबारा यह बीमारी होने का खतरा बना रहता है।
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वहीं डेंगू के सवाल पर उन्होंने कहा कि यही परिस्थितियां डेंगू पर भी लागू होती है। मच्छरों के काटने के बाद चार टाइप के डेंगू होते हैं। मतलब, किसी को एक टाइप का डेंगू एक से ज्यादा बार नहीं हो सकता। लेकिन, दूसरे टाइप का डेंगू होने की संभावना बनी रहती है।
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चिकनगुनिया
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चिकनगुनिया वायरस के स्ट्रेन का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। इसकी शुरुआती जांच में स्ट्रेन में कोई बदलाव नजर नहीं आ रहा है। उन्होंने कहा कि इस बार चिकनगुनिया फैलने की वजह वाइरस का ज्यादा ऐक्टिव होना है।
दस साल के पीरियड में आए नए लोगों को यह वाइरस अटैक कर रहा है। दिल्ली में हर साल माइग्रेट होकर भारी संख्या में नए लोग भी आते हैं। जिन्हें पहले चिकनगुनिया हो गया था, उन्हें यह दोबारा नहीं होगा।
दस साल के पीरियड में आए नए लोगों को यह वाइरस अटैक कर रहा है। दिल्ली में हर साल माइग्रेट होकर भारी संख्या में नए लोग भी आते हैं। जिन्हें पहले चिकनगुनिया हो गया था, उन्हें यह दोबारा नहीं होगा।