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चीफ जस्टिस तरुण गोगोई पर भी यूयू ललित की तरह उठाये जा सकते हैं सवाल: आचार्य शैलेश तिवारी

Thu, 10 Jan 2019 02:18 PM IST
Shani Mishra अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली Published by: Shani Mishra Updated Thu, 10 Jan 2019 02:18 PM IST
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Chief justice tarun gogoi can also be questioned just like uu lalit says acharya shailesh tiwari
justice tarun gogoi - फोटो : pti
जस्टिस यूयू ललित के अयोध्या मामले से खुद को अलग कर लेने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई 29 जनवरी तक के लिए टाल दी है। इससे संत समाज का गुस्सा भड़क गया है।
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अखिल भारतीय संत समाज के प्रतिनिधि संत आचार्य शैलेश तिवारी ने कहा कि मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने जस्टिस यूयू ललित पर जिस तरह के सवाल उठाये हैं, उस आधार पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्यन्यायाधीश पर भी सवाल उठाया जा सकता है। उनकी पृष्ठभूमि एक कांग्रेसी परिवार की रही है। लेकिन हिन्दू पक्षकारों ने देश की न्यायपालिका का सम्मान करते हुए, मुख्यन्यायाधीश की गरिमा का ख्याल करते हुए ऐसा नहीं किया। इसी से समझ आ सकता है कि कौन इस मामले का हल खोजने का प्रयास कर रहा है और कौन इस मुद्दे को लटकाए रखने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि इसके नकारात्मक परिणाम निकल सकते हैं।
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सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले पर हुई बहस पर टिप्पणी करते हुए आचार्य शैलेश तिवारी ने गुरूवार को अमर उजाला से कहा कि मुस्लिम पक्षकार राजीव धवन ने जस्टिस यूयू ललित पर सांकेतिक रूप से सवाल उठाया क्योंकि वे पूर्व में भाजपा नेता कल्याण सिंह के मामले की पैरवी कर चुके हैं। इसीलिए मामले की निष्पक्षता बनाये रखने के लिए जस्टिस यूयू ललित ने खुद को इससे अलग कर लिया। लेकिन यह मामले को आगे खींचने की एक चाल भर है। दूसरा पक्ष इस मामले को लटकाए रखना चाहता है। उन्होंने कहा कि एक बेंच के गठन के लिए इतना लम्बा समय देना भी समझ से परे है। कोर्ट को जनभावनाओं की कदर करनी चाहिए।
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उन्होंने कहा कि देश की न्यायपालिका को समझना चाहिए कि इस देश का सौ करोड़ हिन्दू उसकी तरफ किस व्यग्रता से देख रहा है। अगर सुप्रीम कोर्ट ने इन भावनाओं का ख्याल नहीं किया तो इसका जो भी परिणाम निकलेगा उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। उन्होंने कहा कि इस मसले पर तीन-चार धर्म संसद का आयोजन हो चुका है। लेकिन इसका अब तक कोई हल नहीं निकला है। यह पूरे देश के लिए बहुत चिंता की बात है।
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