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चीफ जस्टिस बोले...तो क्या सुप्रीम कोर्ट को बंद कर दें

Sat, 15 Jul 2017 09:53 PM IST
राजीव सिन्हा/ अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 15 Jul 2017 09:53 PM IST
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Chief Justice JS Khehar angry with the lawyers to avoid hearing Without any reason
 बिना कोई वाजिब कारण बताए वकीलों द्वारा सुनवाई टालने की गुहार पर चीफ जस्टिस जेएस खेहर बेहद नाराज हो गए। उन्होंने कहा कि ऐसे में तो सुप्रीम कोर्ट को बंद कर दिया जाना चाहिए। मालूम हो कि चीफ जस्टिस खेहर शुरू से ही सुनवाई टाले जाने के ‘चलन’ के सख्त खिलाफ हैं।
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दरअसल, एक के बाद एक लगातार दो वकीलों ने चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष अपने-अपने मुकदमे की सुनवाई टालने की गुहार लगाई और वह भी बिना कोई वाजिब कारण बताए। चीफ जस्टिस को यह बात नागवार गुजरी। चीफ जस्टिस ने कहा, ‘ऐसे में तो सुप्रीम कोर्ट को बंद ही कर दिया जाना चाहिए।’ उन्होंने सुनवाई टालने से इनकार कर दिया।
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लंबित मामलों से ‘हांफते’ सुप्रीम कोर्ट के बोझ को कम करने के प्रयास में जुटे चीफ जस्टिस को सुनवाई टालना पसंद नहीं है। चीफ जस्टिस शुरू से ही अनुशासनप्रिय हैं और अपनी सख्ती के लिए जाने जाते हैं। बेवजह अदालत का कीमती वक्त बर्बाद करने की कोशिशों पर वह कई बार नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। 
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गत वर्ष जब जस्टिस खेहर एक पीठ की अध्यक्षता कर रहे थे। तब वह चीफ जस्टिस नहीं थे, उस दौरान भी शुरुआत के पांच मामलों में किसी न किसी कारणवश सुनवाई टालनी पड़ी थी। इस बात से जस्टिस जेएस खेहर और उनके साथी जज न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा इस कदर नाराज हो गए थे कि दोनों अदालत कक्ष से उठकर अपने-अपने चैंबर में चले गए थे। हालांकि कुछ देर बाद दोनों अदालत कक्ष में वापस आए और दोबारा अदालती कार्यवाही शुरू की।

वकीलों से की जाती है सुनवाई न टालने की गुजारिश
सुनवाई टालने के इस चलन से सुप्रीम कोर्ट भलीभांति अवगत है। यही कारण है कि रोजाना जारी होने वाली कॉज लिस्ट (सुनवाई होने वाले मामलों की सूची) के सबसे ऊपर वकीलों से यह गुजारिश की जाती है कि वे सुनवाई टालने का प्रयास न करें। बावजूद इसके सुनवाई टाली जाने की कोशिश जारी है। 


61000 मुकदमे हैं लंबित 
इस साल जनवरी में चीफ जस्टिस ने खुद जानकारी दी थी कि सुप्रीम कोर्ट में 61,000 मुकदमे लंबित हैं। उस वक्त उन्होंने कहा था कि मुकदमों का निपटारा तेज गति से होगा। इसलिए उन्होंने सामाजिक न्याय के मुकदमों के निपटारे के लिए इससे संबंधित पीठ को सक्रिय किया था। सुप्रीम कोर्ट की 2015-16 की रिपोर्ट के मुताबिक 30 सितंबर 2016 तक 50,205 सिविल और 10,733 क्रिमिनल केस लंबित थे।
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