Budget: मुख्य आर्थिक सलाहकार बोले- दूसरी योजनाओं को मिला ज्यादा धन, इसलिए मनरेगा के बजट में हुई कटौती
बजट में वित्तमंत्री ने मनरेगा के आवंटन को लगभग एक तिहाई कम कर दिया है। मनरेगा के लिए 60,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है जो पिछले साल के संशोधित अनुमानों से लगभग 32 प्रतिशत कम है।
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सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने सोमवार को कहा कि 2023-24 के बजट में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना (मनरेगा) के लिए आवंटन को इसलिए कम किया गया है क्योंकि प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) और जल जीवन मिशन को ज्यादा धन आवंटित किया गया है। इन दोनों योजनाओं से भी ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा की तरह ही लोगों को रोजगार के मौके मिलने की उम्मीद है।
नागेश्वरन ने कहा कि सरकार की तरफ से किए गए उपायों के चलते लाभार्थियों के हाथ में पैसा दोगुना हुआ है। अगर ग्रामीण क्षेत्रों में श्रमिकों को पीएमएवाई और जल जीवन मिशन में पर्याप्त काम नहीं मिलता है तो हम आवंटन बढ़ाकर उन्हें मनरेगा में ले सकते हैं।
मनरेगा के आवंटन में कटौती की एक और वजह बताते हुए उन्होंने कहा, जैसा कि भारत की आर्थिक वृद्धि अगले वित्त वर्ष में मामूली रूप से लगभग 10.5-11 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, इससे भी कुछ ग्रामीण श्रमिक रोजगार की तलाश में शहरी क्षेत्रों में जा सकते हैं। इन दोनों कारकों को ध्यान में रखते हुए हमने यह अनुमान लगाया कि आगामी वित्त वर्ष में मनरेगा के तहत काम की मांग कम रहेगी।
किसको कितना धन मिला
बजट में वित्तमंत्री ने मनरेगा के आवंटन को लगभग एक तिहाई कम कर दिया है। मनरेगा के लिए 60,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है जो पिछले साल के संशोधित अनुमानों से लगभग 32 प्रतिशत कम है। पीएमएवाई के लिए 79,590 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके तहत विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्र के मद में 54,487 करोड़ रुपये दिए गए हैं जो पिछले साल की तुलना में लगभग 26,000 करोड़ रुपये अधिक है। जल जीवन मिशन के लिए 69,684 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। पिछले साल यह आवंटन 54,808 करोड़ रुपये था।