चिदंबरम ने नोटबंदी को 'खोदा पहाड़, निकली चुहिया' जैसा बताया
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नोटबंदी के बाद बिगड़े हालात को लेकर केंद्र सरकार और उसके मंत्री भले ही दावा कर रहे हों कि 50 दिन में हालात पूरी तरह ठीक हो जाएंगे, लेकिन पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम इससे इत्तेफाक नहीं रखते। चिदंबरम का दावा है कि केंद्र सरकार के दावे हवा हवाई हैं हालात सुधरने में कम से कम छह से सात महीने लगेंगे तब तक लोगों को इसी तरह परेशानी झेलनी होगी।
प्रेस कान्फ्रेंस को संबोधित करते हुए चिदंबरम ने कहा एक महीने में 300 करोड़ से ज्यादा कैश नहीं छप सकता ऐसे में सरकार किस आधार पर कैश की किल्लत दूर करने का दावा कर रही है। चिदंबरम ने नोटबंदी को देश का सबसे बड़ा घोटाला बताया।
वीडियोः “खोदा पहाड़, निकली चुहिया” जैसी है नोटबंदी योजना
चिदंबरम ने सवाल किया कि क्या नोटबंदी से भ्रष्टाचार रुक गया। खास लोगों को इससे फर्क नहीं पड़ा है, इसका खामियाजा तो सिर्फ गरीब लोगों को भुगतना पड़ रहा है और 2000 हजार रुपये के नए नोट रिश्वत देने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
गरीबों को भुगतना पड़ रहा खामियाजा
अगर सरकार की सख्ती के बाद भी कुछ लोग आराम से अपने पुराने नोट बदल ले रहे हैं तो सालभर वो इस काम को आसानी से कर सकते हैं। पूर्व वित्त मंत्री ने बताया कि नोटबंदी के कुछ दिन बाद वह एक शादी समारोह में शिरकत करने पहुंचे जहां उन्हें एहसास हुआ कि अमीर लोगों को इससे कोई दिक्कत नहीं है। हां, गरीब लोग जरूर इससे परेशान हुए हैं। उन्होंने नोटबंदी के अभियान की तुलना 'खोदा पहाड़ निकली चुहिया वाली कहावत' से की।
चिदंबरम ने सवाल उठाया कि कौन सा देश कैशलेश इकोनॉमी से संचालित होता है, अमेरिका, सिंगापुर में ये व्यवस्था है। देश में सभी जगह बिजली कहां है, हर जगह कैशलेस मशीनें कहां हैं फिर सरकार कैसे देश को कैशलेस सिस्टम में धकेल सकती है?
उन्होंने आरएसएस विचारक गुरुमूर्ति के उस बयान पर भी सवाल उठाया जिसमें उन्होंने कहा था कि पांच साल बाद दो हजार के नोट भी बंद हो जाएंगे। अगर सरकार ऐसा करती है तो यह और आत्मघाती कदम होगा।