तैयारी: सूक्ष्म अणुओं के जरिये कैंसर के सस्ते इलाज की होगी खोज, बायोटेक्नोलॉजी विभाग ने मांगे प्रस्ताव
केंद्र सरकार के बायोटेक्नोलॉजी विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, सूक्ष्म अणुओं से तैयार दवाएं कोशिकाओं में आसानी से प्रवेश करने के लिए काफी छोटी होती हैं, इसलिए उनका उपयोग कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने के लिए आसानी से किया जा सकता है।
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देश की आबादी को कैंसर से बचाने के लिए सरकार ने अनुसंधान को बढ़ावा देना शुरू किया है। इसके तहत केंद्र सरकार के बायोटेक्नोलॉजी विभाग ने सूक्ष्म अणुओं के जरिये कैंसर के सस्ते इलाज की खोज करने का निर्णय लिया है, जिसके अध्ययन के लिए वैज्ञानिकों से प्रस्ताव भी मांगे गए हैं।
विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, सूक्ष्म अणुओं से तैयार दवाएं कोशिकाओं में आसानी से प्रवेश करने के लिए काफी छोटी होती हैं, इसलिए उनका उपयोग कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने के लिए आसानी से किया जा सकता है।
जीवनशैली में बदलाव बड़ा कारण
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, भारत में कैंसर की बीमारी एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता है। हर साल 10 लाख से ज्यादा नए मामले सामने आ रहे हैं। इसके पीछे भारतीय आबादी की बढ़ती उम्र और जीवनशैली में बदलाव मुख्य कारण हैं। कैंसर के कई मामलों का समय पर निदान नहीं हो पाता है तो कई ऐसे भी मामले सामने आते हैं, जिनमें उपचार का असर तक नहीं होता है। आगामी 2047 तक देश को कैंसर मुक्त बनाने के उद्देश्य से डीबीटी ने कैंसर रोग को लेकर जीव विज्ञान अनुसंधान को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है।
क्या कहते हैं आंकड़े
- केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, भारत में कैंसर के अनुमानित मामलों में सालाना बढ़ोतरी हो रही है।
- साल 2020 में 13,92,179 नए मामले सामने आए थे जो 2021 में बढ़कर 14,26,447 दर्ज किए गए।
- बीते वर्ष 2022 में कैंसर के 14,61,427 मामले सामने आए। मंत्रालय ने यह भी बताया है कि विभिन्न राज्यों में 39 अस्पताल निशुल्क कैंसर का उपचार दे रहे हैं।
अध्ययन में इन पर रहेगा जोर
विभाग के अनुसार, कैंसर को लेकर देश में राज्यवार स्थितियां अलग-अलग हैं। इसलिए क्षेत्रीय स्तर पर कैंसर को बेहतर ढंग से समझने के लिए काम करना होगा। किस राज्य में कैंसर के कौन-कौन से जोखिम कारक हैं, इनके बारे में अध्ययन करना होगा? इसके अलावा, कैंसर का जल्द पता लगाने में सुधार के लिए किफायती तरीकों/जांच उपकरणों की पहचान करना, कैंसर कोशिकाओं के विकास की प्रक्रिया को समझना और कैंसर उपचार की लागत कम करने के लिए किफायती आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) उपकरण विकसित करने पर जोर रहेगा।