Delhi: दिल्ली में सस्ती शराब और पंजाब में नशाखोरी पर लगाम लगाने का वादा, विपक्ष ने लगाया दोहरा रवैया अपनाने का आरोप
देश को एक नई साफ-स्वच्छ राजनीति देने का वादा कर इस ‘दल-दल’ में उतरे केजरीवाल पर विपक्ष दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगा रही है, क्योंकि आम आदमी पार्टी ने पंजाब में नशाखोरी के विरुद्ध अभियान चलाने का वादा भी किया है।
विस्तार
अरविंद केजरीवाल के राजनीतिक सफर की शुरूआत उस अन्ना हजारे के आंदोलन से हुई थी, जो युवाओं में किसी भी प्रकार के नशे के विरोधी रहे हैं। आंदोलन के दौरान इंडिया अगेंस्ट करप्शन के मंच पर हमेशा महात्मा गांधी की तस्वीर लगी रहती थी, तिरंगा लहराता रहता था और देशभक्ति के गाने बजते रहते थे। उसी आंदोलन से निकले केजरीवाल अब दिल्ली में शराब सस्ती करने के लिए तरह-तरह के उपाय कर रहे हैं।
अब शराब कंपनियां एक बोतल शराब के बदले दूसरी बोतल मुफ्त देने का ऑफर दे रही हैं। इससे शराब की दुकानों पर भीड़ बढ़ गई है। देश को एक नई साफ-स्वच्छ राजनीति देने का वादा कर इस ‘दल-दल’ में उतरे केजरीवाल पर विपक्ष दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगा रही है, क्योंकि आम आदमी पार्टी ने पंजाब में नशाखोरी के विरुद्ध अभियान चलाने का वादा भी किया है।
शराब वितरण में कई अहम बदलाव
- दिल्ली सरकार ने राजधानी में शराब पीने की उम्र 25 वर्ष से घटाकर 21 वर्ष कर दी।
- दिल्ली में ड्राइ डे (शराब की दुकानों को खोलने पर रोक वाले दिन) की संख्या 21 से घटाकर केवल तीन (गणतंत्र दिवस 26 जनवरी, स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त और गांधी जयंती 2 अक्तूबर) कर दी गई।
- शराब को घर-घर पहुंचाने के लिए इसके ऑनलाइन डिलीवरी की अनुमति दे दी गई। यानी अब कोई व्यक्ति घर बैठे शराब ऑर्डर कर सकता है।
- सरकारी शराब की दुकानों की नीति बंद कर प्राइवेट दुकानों के जरिए शराब बेचने की अनुमति दे दी। इससे अब दिल्ली के हर गली-मुहल्ले में शराब की दुकानें खुल गई हैं।
जनता पर कर रही विरोध
दिल्ली में आम नागरिक सरकार के इस कदम का पुरजोर विरोध कर रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि उनके घरों के आसपास शराब की दुकानें खोलने से नशाखोरी बढ़ रही है। बच्चे आसानी से शराब पा जा रहे हैं, इससे उनका भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है। जगह-जगह पर सरकार के इस कदम के विरोध में रैलियां-धरने आयोजित किए जा रहे हैं। दिनों-दिन यह विरोध बढ़ता जा रहा है।
दिल्ली का भविष्य बर्बाद करने की तैयारी: भाजपा
भाजपा प्रवक्ता सारिका जैन ने कहा कि दिल्ली सरकार महिलाओं के लिए विशेष शराब के ठेके खोलने जा रही है। महिलाओं को शराब खरीदने पर 30 प्रतिशत की छूट देने जा रही है। इससे सस्ती शराब पाने के लिए शराब पीने वाले पुरुष अपने घर की बहन-बेटियों को जबरदस्ती शराब की दुकानों पर भेजेंगे, जहां उनसे अभद्र व्यवहार हो सकता है। उन्होंने कहा कि हर गली-मुहल्ले में शराब की दुकानें खुलने से लोगों में नशाखोरी बढ़ने, बच्चों के इसकी चपेट में आने की आशंका बढ़ गई है।
उन्होंने कहा कि शराब माफिया अभी सस्ती शराब बेच रहे हैं, जिससे लोगों को खूब शराब पीने की लत लगे। बाद में लत लग जाने के बाद यही शराब वे ऊंची कीमतों पर बेचेंगे और नशे के शिकार लोग घर के गहने बेचकर या किसी गलत तरीके से इसकी खरीद करेंगे। इससे न केवल अपराध बढ़ेगा, बल्कि महिलाओं का उत्पीड़न भी बढ़ेगा। पूरी राजधानी की सुरक्षा दांव पर लग जाएगी। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार यह कदम वापस लेने का पैसला नहीं लेती, नागरिकों के सहयोग से हर शराब की दुकान पर भाजपा का विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
क्यों सस्ती हुई शराब?
दिल्ली सहित मुंबई और कोलकाता में भी शराब की कीमतों में भारी कमी आई है। इसके लिए शराब नीति में परिवर्तन को बड़ा कारण बताया जा रहा है। नई आबकारी नीति के प्रभाव में आने के बाद अब शराब कंपनियां अपने स्तर पर इसके मूल्य का निर्धारण कर रही हैं, इससे शराब की कीमतों में कमी आ रही है। शराब कंपनियों के बीच छिड़े प्राइस वॉर के कारण महंगी शराबों की कीमत कम हुई है।
सफाई- शराब को बढ़ावा नहीं दे रहे केजरीवाल
- आम आदमी पार्टी के एक विधायक ने अमर उजाला से कहा कि दिल्ली सरकार शराब को बढ़ावा नहीं दे रही है। चूंकि शराब महंगी होने के कारण लोग सस्ती दरों पर नकली शराब खरीदते हैं, जिससे कई बार लोगों की मौत तक हो जाती है। उत्तर प्रदेश और बिहार के कई इलाकों में समय-समय पर इस तरह की घटनाएं घटी हैं, जहां नकली शराब पीने से सैकड़ों लोगों की मौत हुई है, ऐसे में सरकार चाहती है कि लोग नकली शराब की गिरफ्त से बचे रहें।
- उन्होंने कहा कि दिल्ली में ड्राइ डे घटाने के पीछे यही उद्देश्य था कि सरकार को राजस्व के घाटे को कम किया जा सके। देखा गया था कि दिल्ली में ड्राइ डे ज्यादा होने से उन दिनों पर लोग पड़ोसी राज्यों से शराब खरीद लेते हैं। इससे एक तरफ शराबखोरी भी नहीं रूकती तो दूसरी ओर सरकार को राजस्व का नुकसान भी होता है।
- इसी नीति को देखते हुए युवाओं की शराब पीने की उम्र भी घटाई गई थी, क्योंकि पड़ोसी राज्यों में कम आयु होने के कारण युवा वहां से शराब खरीद लेते थे। एकरूपता लाने के लिए हर जगह की तरह दिल्ली में भी युवाओं को 21 वर्ष की आयु में शराब पीने की अनुमति दे दी गई। उन्होंने कहा कि सरकार शराब को बढ़ावा नहीं दे रही है, बल्कि इसके जरिए लोगों को गलत शराब पीने पर रोक लगा रही है।