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बदलता समाज पैदा कर रहा बाल अपराधी

Fri, 13 Jul 2018 08:53 PM IST
अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली Updated Fri, 13 Jul 2018 08:53 PM IST
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Changes in Society Creating Child Criminals 

उनके आस-पास की परिस्थितियां कुछ ऐसी थीं कि जिस उम्र में उनके हाथों में पेंसिल, पेन और पेंट ब्रश होना चाहिए था, उसी उम्र में उनके हाथों में चाकू, ताले तोड़ने के अवजार और नशे के इंजेक्शन आ गए। 

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इस रास्ते ने उन्हें उस काली कोठरी में पहुंचा दिया जहां कालिख के सिवा और कुछ होने की उम्मीद नहीं की जाती। लेकिन इसी कोठरी से उनके लिए वह किरण निकली है जिसने न सिर्फ उनकी खुद की जिंदगी में रोशनी भर दी है, बल्कि इस समाज को भी एक आइना दिखाया है, एक आदर्श स्थापित किया है। 
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जी हां, हम बात कर रहे हैं उस बचपन की जो कभी अपराध के रास्ते पर चला गया, लेकिन अब खुद ही दूसरों को अपराध की दुनिया में जाने से रोक रहा है।

अपराध की दुनिया में कैसे आ जाते हैं बच्चे

राजधानी के फिरोजशाह कोटला स्थित जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी) की एक सदस्य वैदेही सुब्रमणी ने बताया कि इस समाज की परिस्थितियां ही बच्चों को अपराध की दुनिया में जाने के लिेए मजबूर करती हैं। अगर दिल्ली जैसे महानगरों की बात करें तो रोजगार के सिलसिले में लोगों का पलायन, पड़ोसी परिवारों में कमजोर होते संबंध और उनके बीच सांस्कृतिक दूरी, मां-बाप का बच्चों की देखभाल करने की बजाय रोजी-रोटी कमाने के लिए काम करना, टूटते परिवारों में दादा-दादी या नाना-नानी जैसे बुजुर्गों की कमी जो मां-बाप के पीछे बच्चों की देखभाल कर सकें और बदलते तकनीकी जमाने में मोबाइल-टीवी के माध्यम से अनचाही चीजें बच्चों तक पहुंचना ऐसे कई कारण हैं जो बच्चों को कई ऐसे अवसर देती हैं जिसकी वजह से वे अपराध की दुनिया में कदम रख देते हैं।

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निम्न आर्थिक वर्ग के बच्चे सबसे ज्यादा बाल अपराधी

Changes in Society Creating Child Criminals 

जेजेबी की सदस्य के मुताबिक निम्न आर्थिक वर्ग के बच्चे सबसे ज्यादा अपराध की चपेट में आते हैं, क्योंकि इनके मां-बाप अक्सर काम के सिलसिले में उन्हें अकेला छोड़ जाते हैं। ऐसे में बच्चे ऐसे लोगों के संपर्क में आ जाते हैं जो इन्हें गलत रास्ते पर जाने के लिए प्रेरित कर देते हैं। उच्च आय वर्ग के कम ही बच्चे अपराध की तरफ आगे बढ़ते हैं।

बच्चों में नशा बढ़ा देता है अपराध की दर

बाल अपराध पर काम कर रहे एक विशेषज्ञ के मुताबिक मां-बाप की लापरवाही और कुछ अन्य लोगों के गलत मकसद के कारण बच्चे नशे की चपेट में आ जाते हैं। एक बार नशे की लत लगने के बाद ये नशे की पूर्ति के लिए छोटी-मोटी चोरी जैसे अपराध करने लगते हैं। इसके बाद इनके गंभीर अपराध करने की संभावना भी बढ़ जाती है।

क्यों बढ़ रही बाल-अपराध की दर

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों को देखें तो बाल अपराध में आंशिक बढ़ोतरी साफ दिख जाती है। पर क्या वास्तव में बाल अपराध में तेजी आ रही है? बाल विकास पर काम कर रहे एक विशेषज्ञ के मुताबिक NCRB के आंकड़ों में जो तेजी दिख रही है।

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