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Jagdeep Dhankar: 'प्रस्तावना में बदलाव संभव नहीं, फिर भी 1976 में इसे बदला गया', धनखड़ का आपातकाल पर बड़ा हमला
Sat, 28 Jun 2025 01:16 PM IST
बशु जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: बशु जैन
Updated Sat, 28 Jun 2025 01:16 PM IST
सार
आरएसएस ने संविधान की प्रस्तावना में समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष शब्दों की समीक्षा करने का मुद्दा उठाया था। अब उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता क्योंकि यह वह बीज है जिस पर यह दस्तावेज विकसित होता है।
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जगदीप धनखड़, उपराष्ट्रपति
- फोटो : X / @VPIndia
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विस्तार
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने आपातकाल को लेकर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता क्योंकि यह वह बीज है जिस पर यह दस्तावेज विकसित होता है। लेकिन भारत के अलावा किसी अन्य देश के संविधान की प्रस्तावना में परिवर्तन नहीं किया गया।
एक पुस्तक विमोचन समारोह में उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान की प्रस्तावना को 1976 के 42वें संविधान (संशोधन) अधिनियम द्वारा बदल दिया गया। इसमें समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और अखंडता जैसे शब्द जोड़े गए। हमें इस पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बीआर आंबेडकर ने संविधान पर कड़ी मेहनत की थी और उन्होंने इस पर ध्यान केंद्रित किया होगा।
ये भी पढ़ें: राहुल गांधी ने संघ और भाजपा पर साधा निशाना, होसबोले के बयान पर कहा- आरएसएस का नकाब फिर से उतर गया
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आरएसएस ने उठाया था संविधान की समीक्षा का मुद्दा
इससे पहले आरएसएस ने संविधान की प्रस्तावना में शामिल समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष शब्दों की समीक्षा करने का मुद्दा उठाया था। आरएसएस ने कहा था कि इन शब्दों को आपातकाल के दौरान संविधान में शामिल किया गया था और ये कभी भी आंबेडकर द्वारा तैयार संविधान का हिस्सा नहीं थे।
संघ से जुड़ी साप्ताहिक पत्रिका ऑर्गेनाइजर में प्रकाशित लेख में कहा गया कि कांग्रेस की तरफ से आपातकाल के दौरान किए गए 42वें संशोधन से ये शब्द संविधान में जोड़े गए थे, जो कि संविधान सभा की मूल भावना या बहसों का हिस्सा नहीं थे। यह कदम एक 'राजनीतिक चाल' थी, न कि संविधान सभा के सोच-समझ कर लिए गए फैसले का परिणाम।
ये भी पढ़ें: संविधान की प्रस्तावना से हटे समाजवाद और पंथनिरपेक्ष; होसबाले ने कहा- कांग्रेस माफी मांगे
दत्तात्रेय होसबाले ने दिया था बयान
राष्ट्रीय स्व्यंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने संविधान की प्रस्तावना में किए गए बदलावों को निरस्त करने के साथ-साथ कांग्रेस पार्टी से माफी मांगने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में समाजवाद और पंथनिरपेक्ष शब्द आपातकाल के दौरान ही जोड़े गए थे। कांग्रेस ने होसबाले की टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि संघ ने कभी संविधान को स्वीकार ही नहीं किया। यह आंबेडकर की समावेशी और न्यायपूर्ण भारत की सोच को खत्म करने की एक साजिश है। पार्टी ने कहा कि यह संविधान की आत्मा पर एक जानबूझकर किया गया हमला है।
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एक पुस्तक विमोचन समारोह में उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान की प्रस्तावना को 1976 के 42वें संविधान (संशोधन) अधिनियम द्वारा बदल दिया गया। इसमें समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और अखंडता जैसे शब्द जोड़े गए। हमें इस पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बीआर आंबेडकर ने संविधान पर कड़ी मेहनत की थी और उन्होंने इस पर ध्यान केंद्रित किया होगा।
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आरएसएस ने उठाया था संविधान की समीक्षा का मुद्दा
इससे पहले आरएसएस ने संविधान की प्रस्तावना में शामिल समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष शब्दों की समीक्षा करने का मुद्दा उठाया था। आरएसएस ने कहा था कि इन शब्दों को आपातकाल के दौरान संविधान में शामिल किया गया था और ये कभी भी आंबेडकर द्वारा तैयार संविधान का हिस्सा नहीं थे।
संघ से जुड़ी साप्ताहिक पत्रिका ऑर्गेनाइजर में प्रकाशित लेख में कहा गया कि कांग्रेस की तरफ से आपातकाल के दौरान किए गए 42वें संशोधन से ये शब्द संविधान में जोड़े गए थे, जो कि संविधान सभा की मूल भावना या बहसों का हिस्सा नहीं थे। यह कदम एक 'राजनीतिक चाल' थी, न कि संविधान सभा के सोच-समझ कर लिए गए फैसले का परिणाम।
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दत्तात्रेय होसबाले ने दिया था बयान
राष्ट्रीय स्व्यंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने संविधान की प्रस्तावना में किए गए बदलावों को निरस्त करने के साथ-साथ कांग्रेस पार्टी से माफी मांगने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में समाजवाद और पंथनिरपेक्ष शब्द आपातकाल के दौरान ही जोड़े गए थे। कांग्रेस ने होसबाले की टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि संघ ने कभी संविधान को स्वीकार ही नहीं किया। यह आंबेडकर की समावेशी और न्यायपूर्ण भारत की सोच को खत्म करने की एक साजिश है। पार्टी ने कहा कि यह संविधान की आत्मा पर एक जानबूझकर किया गया हमला है।
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