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छागला स्मृति व्याख्यान: जस्टिस चंद्रचूड ने कहा- सत्य का निर्धारण करने के लिए राज्य पर भरोसा नहीं कर सकते, निष्पक्ष प्रेस जरूरी

Sat, 28 Aug 2021 09:39 PM IST
सुरेंद्र जोशी राजीव सिन्हा, अमर उजाला,  नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, अमर उजाला,  नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Sat, 28 Aug 2021 09:39 PM IST
सार

जस्टिस चंद्रचूड ने शनिवार को जोर देकर कहा कि देश में किसी भी प्रभाव से मुक्त निष्पक्ष प्रेस जरूरी है। हमें अपने सार्वजनिक संस्थानों को मजबूत करना होगा। 
 

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Chagla Memorial Lecture: Justice Chandrachud said – cannot rely on the state to determine the truth, fair press is necessary
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने शनिवार को कहा कि हमें देश में किसी भी प्रभाव से मुक्त प्रेस सुनिश्चित करने का प्रयास करना चाहिए, ताकि वह निष्पक्ष तरीके से जानकारी मुहैया कराए। नागरिकों के रूप में हमें इसके लिए प्रयास करना चाहिए। 

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शनिवार को आयोजित छठे एमसी छागला मेमोरियल ऑनलाइन व्याख्यान में जस्टिस चंद्रचूड ने फर्जी खबरों के प्रसार का मुकाबला करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमें अपने सार्वजनिक संस्थानों को मजबूत करने की जरूरत है। जस्टिस चंद्रचूड ने कहा, 'नागरिकों के रूप में हमें यह सुनिश्चित करने का प्रयास करना चाहिए कि हमारे पास किसी भी प्रकार के राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव से मुक्त प्रेस हो। हमें ऐसे प्रेस की जरूरत है जो हमें निष्पक्ष तरीके से जानकारी प्रदान करे।' 
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हम पोस्ट ट्रूथ वर्ल्ड में रह रहे हैं
उन्होंने कहा कि हम 'पोस्ट ट्रूथ वर्ल्ड' में रहते हैं। उन्होंने इसकी परिभाषा के बारे में विस्तार से बताया। इसके दो अर्थ हैं। पहला,  नागरिकों के लिए इस समय व युग में सत्य को खोजना बहुत कठिन हो गया है। दूसरा, सच्चाई को पा लेने के बाद उन्हें सच्चाई की परवाह नहीं है।
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हमारी सच्चाई बनाम आपकी सच्चाई में स्पर्धा
जस्टिस चंद्रचूड ने कहा, 'हमारी सच्चाई' बनाम 'आपकी सच्चाई' के बीच एक प्रतिस्पर्धा है और एक 'सत्य' को अनदेखा करने की प्रवृत्ति भी है। उन्होंने ट्विटर, फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की ओर इशारा करते हुए कहा कि उन्हें झूठी सामग्री का जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए, लेकिन लोगों को अधिक सतर्क रहना चाहिए व अलग-अलग राय स्वीकार करना सीखना चाहिए। हम किसी एक ओर झुके होते हैं और विरोध वाले पक्ष को पसंद नहीं करते। हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जो तेजी से सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक स्तर पर विभाजित है।

डब्ल्यूएचओ ने कोविड-19 महामारी को 'इन्फोडेमिक' करार दिया
जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि फर्जी समाचारों की घटनाएं बढ़ रही हैं और इसका एक प्रासंगिक उदाहरण यह है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने हाल ही में वर्तमान कोविड-19 महामारी को 'इन्फोडेमिक' करार दिया और ऑनलाइन पर फर्जी सूचनाओं की अधिकता पर की बात कही।

उन्होंने दार्शनिक हन्ना अरेंड्ट के विचार का उल्लेख कहा कि अधिनायकवादी सरकारें 'प्रभुत्व स्थापित करने के लिए झूठ पर निरंतर निर्भरता से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि सत्य को महत्वपूर्ण लोकतंत्र माना जाता है। सच्चाई का निर्धारण करने में राज्य की भूमिका पर उन्होंने कहा कि यह नहीं कहा जा सकता है कि राज्य, लोकतंत्र में भी राजनीतिक कारणों से झूठ में लिप्त नहीं होगा। वियतनाम युद्ध में अमेरिका की भूमिका, पेंटागन के कागजात प्रकाशित होने के बाद सामने आई थी।


आसपास के लोगों के प्रति दयालु बनें
कोविड के संदर्भ में हम देखते हैं कि दुनिया भर के देशों में डेटा में हेराफेरी करने का प्रयास बढ़ रहा है। इसलिए, कोई सच्चाई का निर्धारण करने के लिए केवल राज्य पर भरोसा नहीं कर सकते। जस्टिस चंद्रचूड ने स्कूलों और कॉलेजों में सकारात्मक माहौल का आह्वान किया जहां छात्रों को झूठ से सच को अलग करने और सत्ता में बैठे लोगों से सवाल करना सिखाता है। उन्होंने लोगों से अपने आसपास के लोगों के प्रति दयालु और अधिक संवेदनशील होने का आग्रह किया।

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