जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की कमर तोड़ेगा ये कानून, सरकार ने की ये खास तैयारी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद लगी पाबंदियां अब धीरे-धीरे हटाई जा रही हैं। सरकार का दावा है कि सोमवार तक घाटी का जीवन सामान्य स्थिति में लौट आएगा। स्कूल-कालेज खुलने के अलावा मोबाइल इंटरनेट सेवाएं भी शुरु की जा रही हैं। इंटेलीजेंस एजेंसियों ने सरकार को सौंपी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इंटरनेट शुरु होने के बाद घाटी के कई इलाकों में छिटपुट घटनाएं हो सकती हैं।
यूएपीए के तहत होगी कार्रवाई
अपनी रिपोर्ट में खुफिया एजेंसियों ने बताया कि अलगाववादी नेताओं सहित कई दूसरे संगठन भी सोशल मीडिया के जरिए घाटी का माहौल बिगाड़ने की फ़िराक में हैं। गृह मंत्रालय ने इस स्थिति से निपटने की पूरी तैयारी कर ली है। मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि अब जम्मू-कश्मीर में आतंकियों को सिर नहीं उठाने दिया जाएगा और वे अपने अंत के बेहद करीब हैं। उन्होंने बताया कि अगले हफ्ते से घाटी में गैर कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यू.ए.पी.ए.) के तहत कार्रवाई शुरु होगी। जिसके बाद कोई भी व्यक्ति वो चाहे सोशल मीडिया पर या व्यक्तिगत तौर से आतंकियों को कोई मदद पहुंचाता मिला, तो उसे कानून के दायरे में ले लिया जाएगा।
पाकिस्तानी उच्चायोग से मिलती है मदद
बता दें कि द अनलॉफुल ऐक्टिविटीज (प्रिवेंशन) अमेंडमेंट बिल-2019 यानी गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) विधेयक को लोकसभा और राज्यसभा में पास होने के बाद राष्ट्रपति ने भी मंजूरी मिल चुकी है। जिसके तहत आतंकी गतिविधियों में लिप्त व्यक्ति को भी आतंकी घोषित किए जाने का प्रावधान है। जांच एजेंसियां और एनआईए पहले ही कह चुका है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकियों को स्थानीय संगठनों और सीमापार के अलावा दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग से भी आर्थिक मदद मिलती है। खुफिया एजेंसियों के मुताबिक सोमवार से घाटी में जब आम जनजीवन सामान्य होगा, तो कुछ संगठन उसे बिगाड़ने की कोशिश करेंगे। हालांकि सुरक्षा बलों और जम्मू कश्मीर पुलिस ने काफ़ी हद तक ऐसे लोगों की पहचान कर ली है और इनके सोशल मीडिया नेटवर्क पर भी नजर रखी जा रही है।
17 साल तक के बच्चों का इस्तेमाल
जांच एजेंसियों को मिली जानकारी के मुताबिक घाटी माहौल खराब करने के लिए कुछ संगठन 17 साल से कम उम्र के बच्चों की मदद ले सकते हैं। बकरीद के मौके पर जब कुछ समय के लिए मोबाइल सेवा बहाल हुई, तो ऐसे कई मैसेज दिखे जिनमें लिखा था कि 10वीं-12वीं के 16 से 17 साल के छात्रों को इंटरनेट की सुविधा वाले मोबाइल फोन दे दिए जाएं। हर बच्चे को मोबाइल नंबरों की एक सूची दी जाएगी। घाटी के संगठनों से जो मैसेज इनके मोबाइल पर आएगा, उसे दूसरे नंबरों पर भेजना होगा। ये संगठन ऐसा इसलिए कर रहे हैं ताकि वे कानून के दायरे में आने से बच सकें।
यूएपीए से बचना होगा मुश्किल
संशोधित यूएपीए कानून के तहत संगठनों के साथ-साथ व्यक्तियों को भी आतंकी घोषित किया जा सकेगा। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में आतंकी यासीन भटकल का उदाहरण देते हुए कहा था कि एनआईए ने उसके संगठन इंडियन मुजाहिदीन को आतंकवादी संगठन घोषित किया था, लेकिन भटकल को आतंकवादी घोषित करने के लिए कानून में कोई प्रावधान नहीं था। जिसका फायदा उठाते हुए भटकल ने दर्जनभर आतंकी घटनाओं को अंजाम दे दिया।
एजेंसियों के पास आतंकियों के मददगारों की सूची
संशोधित कानून के तहत आतंकियों और आतंकी संगठनों की संपत्तियां जब्त हो सकेंगी। अगर मामले की जांच एनआईए का कोई अफसर कर रहा हो, तो संबंधित संपत्ति को जब्त करने के लिए संबंधित राज्य के डीजीपी की मंजूरी की जरूरत नहीं होगी। इसके लिए केवल एनआईए के महानिदेशक की मंजूरी ही काफी होगी। वहीं जांच एजेंसियों ने अब आतंकियों को मदद देने वालों की सूची तैयार कर ली है। घाटी में हालात सामान्य होते ही इन लोगों के ठिकानों पर छापे पड़ेंगे और गिरफ्तारियां होंगी। सोमवार से ही ऐसे लोगों पर जांच एजेंसियों की खास नजर रहेगी।