सुप्रीम कोर्ट: CEC और EC की नियुक्ति के लिए SC कॉलेजियम जैसी प्रणाली की मांग, केंद्र ने किया पुरजोर विरोध
याचिका में मांग की गई कि शीर्ष अदालत के कॉलेजियम जैसी एक स्वतंत्र संस्था को मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त का चयन करना चाहिए ताकि आयोग की संस्थागत अखंडता सुनिश्चित की जा सके।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
केंद्र ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और चुनाव आयुक्तों के चयन के लिए कॉलेजियम जैसी प्रणाली की मांग करने वाली याचिकाओं का सुप्रीम कोर्ट में जोरदार विरोध किया। केंद्र ने कहा कि ऐसा कोई भी प्रयास संविधान में संशोधन करने जैसा होगा। अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ को बताया कि विनीत नारायण बनाम भारत संघ (जो एक समिति द्वारा सीबीआई निदेशक की नियुक्ति से संबंधित है) के 1997 के मामले में रिक्त स्थान को भरने के लिए कानून को वर्तमान मामले में अनुमति नहीं दी जा सकती है। एजी ने कहा, ऐसा करने का कोई भी प्रयास संवैधानिक संशोधन होगा।
केंद्रीय सतर्कता आयुक्त या यूपीएससी सदस्य की नियुक्ति जैसी प्रणाली क्यों नहीं?
जस्टिस अजय रस्तोगी, अनिरुद्ध बोस, हृषिकेश रॉय और सीटी रविकुमार की बेंच ने अटॉर्नी जनरल से अनुच्छेद 316 (यूपीएससी सदस्यों की नियुक्ति पर) और अनुच्छेद 148 (भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक की नियुक्ति से संबंधित) को पढ़ने के लिए कहा। अदालत ने पूछा कि ऐसा क्यों है कि 72 वर्षों तक संसद अनुच्छेद 324 (2) (सीईसी और ईसी की नियुक्ति से संबंधित) में परिकल्पित किसी भी कानून को नहीं ला पाई है, जैसा कि उसने केंद्रीय सतर्कता आयुक्त या यूपीएससी सदस्य की नियुक्ति के लिए किया है।
पीठ ने अटॉर्नी जनरल से कहा, जब संविधान कहता है कि यह किसी भी कानून के किसी भी प्रावधान के अधीन है तो क्या संसद ने संविधान के निर्माताओं की दृष्टि को दरकिनार नहीं किया है। वेंकटरमणि ने कहा कि यदि कोई कानून नहीं है, तो राष्ट्रपति नियुक्ति के लिए अंतिम प्राधिकारी होता है, जो मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह से बंधा होता है।
अब तक सीईसी या सीबीआई निदेशक के रूप में कोई महिला क्यों नहीं?
पीठ ने अटार्नी जनरल से कहा कि मंगलवार को जब अदालत दलीलों पर अपनी सुनवाई फिर से शुरू करे तो वह अपना निवेदन जारी रखें। सुनवाई के दौरान जस्टिस रॉय ने आश्चर्य जताया कि अब तक भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त या सीबीआई निदेशक के रूप में कोई महिला क्यों नहीं है। शुरुआत में याचिकाकर्ता अनूप बरनवाल की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि शीर्ष अदालत के कॉलेजियम जैसी एक स्वतंत्र संस्था को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और चुनाव आयुक्त का चयन करना चाहिए ताकि आयोग की संस्थागत अखंडता सुनिश्चित की जा सके।