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सेंट्रल विस्टा: निर्माण के दौरान पर्यावरण संरक्षण का रखा गया ध्यान, प्रदूषण संकट के बीच बोले मास्टर आर्किटेक्ट
Sun, 14 Nov 2021 09:48 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Sun, 14 Nov 2021 09:48 PM IST
सार
दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता सुधरने का नाम नहीं ले रही है। सफर इंडिया के मुताबिक रविवार को दिल्ली की वायु गुणवत्ता सूचकांक 386 दर्ज की गई, जो कि 'बेहद खराब' श्रेणी में है। इससे लोगों के बेहद परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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सेंट्रल विस्टा परियोजना
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में प्रदूषण के खतरनाक स्तर पर पहुंचने के बीच सेंट्रल विस्टा परियोजना के मुख्य आर्किटेक्ट ने इसके टेंडरों में पर्यावरण संरक्षण के लिए उठाए गए कदमों के बारे में बात की है। सेंट्रल विस्टा परियोजना के मुख्य आर्किटेक्ट बिमल पटेल ने रविवार को कहा कि इस परियोजना के तहत इमारतों के निर्माण के लिए टेंडरों में जमीन की ऊपरी परत का संरक्षण, स्मॉग टॉवरों की स्थापना और कंक्रीट में फ्लाई ऐश का उपयोग अनिवार्य किया गया है।
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पटेल ने कहा कि केंद्रीय सार्वजनिक कार्य विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) भी पर्यावरण के नजरिए से इन परियोजनाओं पर नजर रख रहा है। इस पूरी परियोजना को लंबे समय में वायु गुणवत्ता को बेहतर करने के लिए ऊर्जा दक्ष बनाने के लिए तैयार किया गया है। उन्होंने नए संसद भवन के निर्माण कार्य का काम समय से पूरा होने का विश्वास जताते हुए कहा कि ठेकेदार, ग्राहक और डिजाइनर सभी लोग तय समय में काम को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत से काम कर रहे हैं।
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पर्यावरण संरक्षण के लिए तय किए गए कई मानक
नए संसद भवन का निर्माण कार्य पूरा होने की समय सीमा साल 2022 के शीत सत्र से पहले तय की गई है। समाचार एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार पटेल ने कहा, 'सेंट्रल विस्टा परियोजना के हिस्से के तौर पर बन रही इमारतों के निर्माण के दौरान पर्यावरण की सुरक्षा के लिए टेंडर दस्तावेजों में विभिन्न मानक तय किए गए हैं। इनमें जमीन की ऊपरी सतह का संरक्षण, स्मॉग टॉवरों की स्थापना और कंक्रीट में फ्लाई ऐश का इस्तेमाल किया जाना आदि शामिल हैं।'
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सभी आवश्यक जरूरतें पूरा करेगा नया संसद भवन
उन्होंने कहा कि नया संसद भवन कार्यालयों और लोकसभा, राज्यसभा व संयुक्त सत्रों के लिए बड़ी बैठक क्षमताओं की सभी जरूरतों को पूरा करेगा और वर्तमान इमारत पर दबाव को कम करेगा। पटेल ने कहा, 'प्रस्तावित केंद्रीय सचिवालय में सरकार के सभी 51 मंत्रालय राजपथ के साथ शामिल हैं। यह प्रशासन की उत्पादकता और दक्षता में सुधार के लिए अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे और सुविधाओं के साथ आधुनिक, कुशल व लचीले कार्यक्षेत्र की सुविधा प्रदान करेगा।