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Central Scheme: कामकाजी महिला छात्रावासों को किराया मॉडल पर संचालित करेगी सरकार, योजना का नाम भी बदला

Sat, 02 Jul 2022 10:14 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Sat, 02 Jul 2022 10:14 PM IST
सार

छात्रावास भवन निर्माण के बजाय कामकाजी महिलाओं की मांग और स्थानीय जरूरतों के आधार पर किराये पर लिए जाएंगे। 18 साल तक की लड़कियों और 12 साल की उम्र तक के लड़कों को भी छात्रावास में रहने की अनुमति रहेगा। मौजूदा योजना का नाम बदलकर 'सखी निवास' रखा गया है।

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Central Scheme Government will run working women hostels on rent model the name of the scheme also changed Latest News Update
वर्किंग वुमेन हॉस्टल स्कीम - फोटो : twitter: @MinistryWCD

विस्तार

केन्द्र सरकार कामकाजी महिला छात्रावासों को किराये के मॉडल पर संचालित करने पर विचार कर रही है। अधिकारियों ने कहा कि कामकाजी महिलाओं की मांगों और उनकी स्थानीय जरूरत के आधार पर 50 नये छात्रावास संचालित करने की योजना है। उन्होंने कहा कि कामकाजी महिला छात्रावास (डब्ल्यूडब्ल्यूएच) की मौजूदा योजना का नाम बदलकर 'सखी निवास' कर दिया गया है।  इस योजना को भौगोलिक रूप से, सिंगल महिला के हिसाब से, महिला जिसका परिवार क्षेत्र में नहीं रहता है और उच्च शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली लड़कियों को ध्यान में रखकर विस्तारित किया जाएगा। 

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छोटे बच्चे भी रह सकेंगे साथ
करीब 50 छात्रावास, भवन निर्माण के बजाय मांग और जरूरत के आधार पर किराये पर लिए जाएंगे। 18 साल तक की लड़कियों और 12 साल की उम्र तक के लड़कों को भी 'सखी निवास' में अपनी कामकाजी माताओं के साथ रहने की अनुमति प्रदान की जाएगी।  पिछले वर्ष तक, देश भर में 972 छात्रावास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से लगभग आधे 497 छात्रावासों का संचालन शूरू हो गया है।
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कामकाजी महिला छात्रावास योजना 
यह केंद्र सरकार द्वारा संचालित योजना है जिसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को छात्रावास खोलने के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है। इसमें केंद्र सरकार द्वारा छात्रावास लागत का 60 प्रतिशत, संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश द्वारा 15 प्रतिशत खर्च और कार्यान्वयन एजेंसी द्वारा 25 प्रतिशत राशि का निवेश किया जाता है। यह लागत हिमालयी क्षेत्र और पूर्वोत्तर के राज्यों को छोड़कर सभी राज्यों पर लागू है। पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए यह अनुपात 65:10:25 है।

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