हिंदी में भेजी आरटीआई का जवाब अंग्रेजी में मिलने पर सूचना आयोग ने जताई नाराजगी
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सांसद निधि के खर्च की सही जानकारी नहीं देने पर केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने नाराजगी जताई है। आयोग ने इस बात पर भी कड़ी आपत्ति जताई है कि हिंदी में भेजी गई आरटीआई का जवाब अंग्रेजी में दिया जा रहा है। साथ ही आयोग ने सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीलैड) यानी सांसद निधि से जुड़ी सूचना देने के लिए सभी राजनीतिक दलों, सांसदों और सार्वजनिक प्राधिकारों की जिम्मेदारी तय करने की सिफारिश राज्यसभा अध्यक्ष, लोकसभा अध्यक्ष और संसदीय कार्य मंत्रालय से की है।
इसके साथ ही आयोग ने सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्यवन मंत्रालय को भी आदेश दिया है कि सूचना के अधिकार के अधिनियम के तहत एमपीलैड खर्च में सांसद का नाम, संसदीय क्षेत्र, कार्य के विस्तार, लाभार्थियों के नाम और कार्य में देरी से जुड़ी सूचना सार्वजनिक की जाए।
दरअसल ये सारे आदेश उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के राम गोपाल दीक्षित की तरफ से सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई एक जानकारी के बाद आए हैं। दीक्षित ने अपने संसदीय क्षेत्र में सांसद निधि से हुए विकास के खर्च की सूचना लोकसभा सचिवालय से मांगी थी।
इस आरटीआई को लोकसभा ने केंद्रीय मंत्रालयों को भेज दिया था। जवाब से असंतुष्ट आरटीआई कार्यकर्ता ने आयोग में अपील दायर की थी, जिस पर अंतरिम आदेश जारी करते हुए सीआईसी ने सांख्यिकी और रेल मंत्रालय को पूरी सूचना उपलब्ध नहीं कराने के लिए फटकारा है।
रेल मंत्रालय ने दिया था अंग्रेजी में जवाब
दरअसल सीआईसी रेल मंत्रालय की तरफ से हिंदी की आरटीआई का जवाब अंग्रेजी में दिए जाने से नाराज थे। सीआईसी ने मंत्रालय के अधिकारियों को सूचना रोकने का जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि हिंदी के आवेदन का जवाब अंग्रेजी में और विस्तार के बजाय संक्षेप में देना सूचना मुहैया नहीं कराने जैसा है। आयोग ने रेलवे के सीपीआई और सचिव को सांसद राजेश कुमार दिवाकर के एमपीलैड से जुड़ी सूचना एकत्र करने और तीस दिन के भीतर मुहैया कराने को कहा है।
धारा-4 के तहत राज्य सरकार भी बाध्य
सीआईसी ने कहा है कि राज्य सरकार और उनके प्राधिकरण राज्य सूचना आयोग के तहत आते हैं। सीआईसी उन्हें निर्देश नहीं दे सकता, लेकिन एमपीलैड का कोष केंद्र सरकार जारी करती है। इसके चलते इससे जुड़ी सूचना राज्य सरकार व प्राधिकरणों को आरटीआई अधिनियम की धारा 4 के तहत देनी ही होगी। साथ ही सांख्यिकी मंत्रालय से जुडे़ सभी जिला प्राधिकार भी एमपीलैड से जुड़ी सूचना के प्रति जवाबदेह हैं।