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1 दिसंबर के बाद 3 सूचना आयुक्तों के सहारे होगा केन्द्रीय सूचना आयोग
हरेन्द्र, नई दिल्ली
Updated Tue, 20 Nov 2018 06:31 PM IST
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r k mathur
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केन्द्रीय सूचना आयोग में 11 सूचना आयुक्तों में से चार आयुक्त अगले दो हफ्तों में रिटायर होने वाले हैं। रिटायर होने वालों की सूची में मुख्य सूचना आयुक्त भी शामिल हैं। पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्ला का कहना है कि आयोग में कार्यकारी मुख्य सूचना आयुक्त बनाने का कोई प्रावधान नहीं है। वहीं आरटीआई एक्टिविस्टों के मुताबिक सूचना आयुक्तों की अनुपस्थिति से अपीलों की पेंडेंसी बढ़ेगीं और प्रशासिनक दिक्कतें पैदा होंगी।
नहीं बना सकते कार्यकारी सीआईसी
पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्ला ने अमरउजाला के साथ खास बातचीत में बताया कि वर्तमान मुख्य सूचना आयुक्त आरके माथुर 24 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि अधिनियम में किसी भी निर्वतमान सूचना आयुक्त को कार्यकारी मुख्य सूचना आयुक्त बनाने या पद देने का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने बताया कि ऐसा प्रावधान है कि बिना मुख्य सूचना आयुक्त के आयोग नहीं चल सकता है। साथ ही, मुख्य सूचना आयुक्त (सीआईसी) की अनुपस्थिति में की गई सभी कार्रवाई गैर-कानूनी मानी जाएंगी।
पीएम, विपक्ष और मंत्री की सहमति जरूरी
जम्मू कैडर के आईएएस रहे हबीबुल्ला के मुताबिक मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति आर.टी.आई. अधिनियम, 2005 की धारा 12(3) के तहत प्रधानमंत्री, लोकसभा नेता प्रतिपक्ष और कैबिनेट मंत्री की सहमति के बाद ही की जा सकती है। उन्होंने बताया कि चूंकि इस समय चुनावी माहौल है और तीनों का एक सभा उपस्थित होना संभव नहीं है, ऐसे में फोन पर या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भी डीओपीटी द्वारा नामित उम्मीदवारों में से एक किसी के नाम पर सहमति ली जा सकती है।
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नहीं बना सकते कार्यकारी सीआईसी
पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्ला ने अमरउजाला के साथ खास बातचीत में बताया कि वर्तमान मुख्य सूचना आयुक्त आरके माथुर 24 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि अधिनियम में किसी भी निर्वतमान सूचना आयुक्त को कार्यकारी मुख्य सूचना आयुक्त बनाने या पद देने का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने बताया कि ऐसा प्रावधान है कि बिना मुख्य सूचना आयुक्त के आयोग नहीं चल सकता है। साथ ही, मुख्य सूचना आयुक्त (सीआईसी) की अनुपस्थिति में की गई सभी कार्रवाई गैर-कानूनी मानी जाएंगी।
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पीएम, विपक्ष और मंत्री की सहमति जरूरी
जम्मू कैडर के आईएएस रहे हबीबुल्ला के मुताबिक मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति आर.टी.आई. अधिनियम, 2005 की धारा 12(3) के तहत प्रधानमंत्री, लोकसभा नेता प्रतिपक्ष और कैबिनेट मंत्री की सहमति के बाद ही की जा सकती है। उन्होंने बताया कि चूंकि इस समय चुनावी माहौल है और तीनों का एक सभा उपस्थित होना संभव नहीं है, ऐसे में फोन पर या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भी डीओपीटी द्वारा नामित उम्मीदवारों में से एक किसी के नाम पर सहमति ली जा सकती है।
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r k mathur
वर्तमान आयुक्त में से बन सकता है सीआईसी !
हालांकि केन्द्रीय सूचना आयोग के वरिष्ठ सूत्रों के मुताबिक वर्तमान में ही से किसी सूचना आयुक्त को मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर नियुक्त किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि मुख्य सूचना आयुक्त के रिटायर होने से पहले ही पद पर नियुक्ति करना आवश्यक है। गौरतलब है कि मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति पांच साल के लिए होती है।
11 पदों की है स्वीकृति
वर्तमान में 11 सूचना आयुक्तों के पद हैं, जिनमें से मुख्य सूचना आयुक्त के अलावा सूचना आयुक्त यशोवर्धन आजाद और श्रीधर आचार्युलू 21 नवंबर, अमिताभ भट्टाचार्य 01 दिसबंर को रिटायर होने वाले हैं। वहीं एमए खान 31 दिसंबर, 2016, बसंत सेठ 15 फरवरी, 2017, शरद सब्बरवाल 22 दिसंबर, 2017 और मंजुला पराशर 15 जनवरी, 2018 को रिटायर हुई थीं। जिसके बाद से सूचना आयुक्त के सभी पद खाली पड़े थे। वहीं अब इन सबके रिटायर होने के बाद केवल 3 ही सूचना आयुक्त सुधीर भार्गव, बिमल जुल्का और दिव्य प्रकाश सिन्हा ही आयोग को संभालेंगे।
हालांकि केन्द्रीय सूचना आयोग के वरिष्ठ सूत्रों के मुताबिक वर्तमान में ही से किसी सूचना आयुक्त को मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर नियुक्त किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि मुख्य सूचना आयुक्त के रिटायर होने से पहले ही पद पर नियुक्ति करना आवश्यक है। गौरतलब है कि मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति पांच साल के लिए होती है।
11 पदों की है स्वीकृति
वर्तमान में 11 सूचना आयुक्तों के पद हैं, जिनमें से मुख्य सूचना आयुक्त के अलावा सूचना आयुक्त यशोवर्धन आजाद और श्रीधर आचार्युलू 21 नवंबर, अमिताभ भट्टाचार्य 01 दिसबंर को रिटायर होने वाले हैं। वहीं एमए खान 31 दिसंबर, 2016, बसंत सेठ 15 फरवरी, 2017, शरद सब्बरवाल 22 दिसंबर, 2017 और मंजुला पराशर 15 जनवरी, 2018 को रिटायर हुई थीं। जिसके बाद से सूचना आयुक्त के सभी पद खाली पड़े थे। वहीं अब इन सबके रिटायर होने के बाद केवल 3 ही सूचना आयुक्त सुधीर भार्गव, बिमल जुल्का और दिव्य प्रकाश सिन्हा ही आयोग को संभालेंगे।
25 हजार अपीलें पेंडिंग
प्रसिद्ध आरटीआई एक्टिविस्ट और गिनीज वर्ल्ड बुक में नाम शामिल करा चुके सुभाष चंद्र अग्रवाल का कहना है कि मुख्य सूचना आयुक्त का पद खाली होने के बाद प्रशासनिक कार्य प्रभावित होंगे। इसके अलावा सीआईसी पीएमओ, सचिवालय, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट जैसे अहम विभाग देखते थे, जिसके बाद इनसे जुड़ी अपीलों का कामकाज प्रभावित होगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में 25 हजार अपीलें सीआईसी के समक्ष पेंडिंग हैं। उन्होंने बताया कि पिछले महीने अक्टूबर में कार्मिक राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने एक सम्मेलन में भरोसा दिलाया था कि जल्द ही सभी सूचना आयुक्तों की नियुक्ति कर दी जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
सरकार चाहती है एक्ट में संशोधन करना
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए 27 जुलाई को सरकार से राज्य और केन्द्र में सूचना आयुक्तों की जल्द से जल्द नियुक्ति का आदेश दिया था। लेकिन उस वक्त सरकार ने कोई जवाब दाखिल नहीं किया। लेकिन 27 अगस्त को सरकार ने अदालत में जवाब दाखिल करके बताया कि वह आरटीआई एक्ट में संशोधन करना चाहती है। हालांकि सरकार ने सितंबर, 2016 में सर्कुलर जारी करके आवेदन मांगे थे, लेकिन कभी खाली पदों को भरा नहीं गया।
प्रसिद्ध आरटीआई एक्टिविस्ट और गिनीज वर्ल्ड बुक में नाम शामिल करा चुके सुभाष चंद्र अग्रवाल का कहना है कि मुख्य सूचना आयुक्त का पद खाली होने के बाद प्रशासनिक कार्य प्रभावित होंगे। इसके अलावा सीआईसी पीएमओ, सचिवालय, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट जैसे अहम विभाग देखते थे, जिसके बाद इनसे जुड़ी अपीलों का कामकाज प्रभावित होगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में 25 हजार अपीलें सीआईसी के समक्ष पेंडिंग हैं। उन्होंने बताया कि पिछले महीने अक्टूबर में कार्मिक राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने एक सम्मेलन में भरोसा दिलाया था कि जल्द ही सभी सूचना आयुक्तों की नियुक्ति कर दी जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
सरकार चाहती है एक्ट में संशोधन करना
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए 27 जुलाई को सरकार से राज्य और केन्द्र में सूचना आयुक्तों की जल्द से जल्द नियुक्ति का आदेश दिया था। लेकिन उस वक्त सरकार ने कोई जवाब दाखिल नहीं किया। लेकिन 27 अगस्त को सरकार ने अदालत में जवाब दाखिल करके बताया कि वह आरटीआई एक्ट में संशोधन करना चाहती है। हालांकि सरकार ने सितंबर, 2016 में सर्कुलर जारी करके आवेदन मांगे थे, लेकिन कभी खाली पदों को भरा नहीं गया।