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कार्रवाई: केंद्र सरकार ने आईआईपीएस के निदेशक को किया निलंबित, जानें क्यों उठाया बड़ा कदम
Sat, 29 Jul 2023 09:35 PM IST
Jeet Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Sat, 29 Jul 2023 09:35 PM IST
सार
केंद्र सरकार ने इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर पॉपुलेशन साइंसेज (आईआईपीएस) के निदेशक केएस को निलंबित कर दिया है। सरकार ने इसके लिए जेम्स की भर्ती में अनियमितता का हवाला दिया है।
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भारत सरकार
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
केंद्र सरकार ने इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर पॉपुलेशन साइंसेज (आईआईपीएस) के निदेशक केएस को निलंबित कर दिया है। सरकार ने इसके लिए जेम्स की भर्ती में अनियमितता का हवाला दिया है। साथ ही कहा है कि यह कदम कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। सरकार ने ये भी कहा कि इस कदम को सजा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
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आईआईपीएस केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत काम करता है और राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन का आकलन और वैश्विक वयस्क तंबाकू सर्वेक्षण जैसे महत्वपूर्ण अध्ययन आयोजित करता है। मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि भर्ती में अनियमितताओं और आरक्षण रोस्टर के अनुपालन के संबंध में विभिन्न शिकायतें प्राप्त हुई हैं।
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स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि निलंबन शुरुआत में 90 दिनों के लिए या आगे की जांच पूरी होने तक के लिए है। इसे मंत्रालय में निलंबन निरस्तीकरण समिति या समीक्षा समिति के अनुमोदन से रद्द किया जा सकता है। निलंबन कोई सजा नहीं है बल्कि निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच का मार्ग प्रशस्त करना है।
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि भर्ती और नियुक्तियों में अनियमितताओं और आरक्षण रोस्टर के अनुपालन के संबंध में विभिन्न शिकायतें प्राप्त हुई थीं। उनकी जांच के लिए, मंत्रालय द्वारा 6 मई को एक तथ्य-खोज समिति (एफएफसी) का गठन किया गया था। समिति ने दोनों शिकायतकर्ताओं के आईआईपीएस बयानों से जानकारी एकत्र की।
प्रतिवादी ने विशेष लेखापरीक्षा दल, आईआईपीएस के आरक्षण और रोस्टर रजिस्टरों की जांच करने वाली टीम और हिंदी अधिकारी के गैर-चयन की जांच करने वाली उप-समिति की रिपोर्ट दी। इसके बाद उसने अपनी रिपोर्ट सौंपी जिसे मंत्रालय ने स्वीकार कर लिया। एफएफसी को प्राप्त 35 शिकायतों में से 11 में प्रथम दृष्टया अनियमितताएं मिलीं। मंत्रालय ने कहा कि ये अनियमितताएं मुख्य रूप से कुछ नियुक्तियों, संकाय की भर्ती, आरक्षण रोस्टर और डेड स्टॉक रजिस्टर में देखी गई खामियों के संबंध में थीं।