Central Government: लंबे समय से इन पदों पर बैठे अफसरों को क्यों बचा रहे विभाग, होंगे 'करप्शन' के भागीदार
Central Government: केंद्रीय सतर्कता आयोग 'सीवीसी' द्वारा समय-समय पर इस बाबत गाइडलाइंस जारी की जाती हैं। मंत्रालयों और विभागों से कहा गया है कि वे उक्त बातों को ध्यान में रखें। एडवाइजरी के क्षेत्राधिकार के तहत सभी विभागों में संवेदनशील पदों की सूची तैयार करें...
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केंद्र सरकार में संवेदनशील पदों पर लंबे समय से तैनात अफसर, केंद्रीय सतर्कता आयोग 'सीवीसी' के रडार पर आ गए हैं। सभी मंत्रालयों और विभागों से कहा गया है कि वे नियमित अंतराल पर ऐसे पदों और वहां तैनात अफसरों की सूची तैयार करें। वहां रोटेशनल ट्रांसफर की क्या स्थिति है, यह सूचना भी अपडेट की जाए। संवेदनशील पदों एवं अफसरों की तैनाती की रिपोर्ट, सीवीसी को भेजें। साथ ही ऐसे नए संवेदनशील पदों का पता लगाया जाए, जहां कोई अधिकारी लंबे समय तक टिकना चाहता है या कार्यरत है। यह भी देखा जाए कि लंबे समय से कार्यरत अधिकारियों में निहित स्वार्थ तो पैदा नहीं हो गया है। वहां 'करप्शन' का भी पता लगाया जाए।
सीवीसी ने अपने पत्र में कहा है कि उक्त केंद्रीय मंत्रालय एवं विभाग उक्त गाइडलाइंस का पालन ठीक तरह से नहीं कर रहे। संवदेनशील पदों पर तैनात अधिकारियों का डाटा अपडेट नहीं किया जा रहा। विभागों में नए संवेदनशील पदों की पहचान करने का कार्य भी पूरा नहीं हो सका।
केंद्र सरकार में संवेदनशील पदों की पहचान करना और वहां पर रोटेशनल ट्रांसफर को सुनिश्चित करना, 'निवारक सतर्कता तंत्र' यानी प्रीवेंटिव विजिलेंस मेकेनिज्म का ही एक यंत्र है। विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में लंबे समय से कार्यरत अधिकारियों का निहित स्वार्थ पैदा होने लगता है। 'करप्शन' के लिए यह कारण भी जिम्मेदार माना जाता है। अगर 'निवारक सतर्कता तंत्र' ठीक तरह से काम करता रहे तो उक्त संभावनाओं को खत्म किया जा सकता है।
रोटेशनल ट्रांसफर जरूरी
केंद्रीय सतर्कता आयोग 'सीवीसी' द्वारा समय-समय पर इस बाबत गाइडलाइंस जारी की जाती हैं। मंत्रालयों और विभागों से कहा गया है कि वे उक्त बातों को ध्यान में रखें। एडवाइजरी के क्षेत्राधिकार के तहत सभी विभागों में संवेदनशील पदों की सूची तैयार करें। उसके बाद देखें कि वहां पर कौन अधिकारी या कर्मचारी लंबे समय से कार्यरत है। लंबी पोस्टिंग की क्या वजह है। संबंधित अधिकारी व कर्मी का कोई निहित स्वार्थ तो नहीं है। इतना ही नहीं, इसके बाद संबंधित विभागाध्यक्ष यह भी सुनिश्चित करेंगे कि संवदेनशील पद पर रोटेशनल ट्रांसफर होता रहे।
केंद्रीय विभागों में अब बड़े स्तर पर तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है। सभी अधिकारियों और कर्मियों का रिकॉर्ड डिजिटली अपडेट रहता है। ऐसे में एक निर्धारित अंतराल के बाद संवेदनशील पदों की समीक्षा की जाए। तकनीक की मदद से किसी भी अधिकारी की तैनाती का तुरंत पता चल सकता है। वह कितने समय से वहां पर कार्यरत है, यह भी मालूम हो सकता है। क्या उसके खिलाफ कोई शिकायत मिली है। अगर मिली है तो वह कार्यालय के भीतर से आई है या बेनाम शिकायत है। क्या उसे सीवीसी या किसी ऐसे विभाग ने भेजा है जहां पर वह अधिकारी पहले कभी कार्यरत रहा है। कोर्ट द्वारा जांच का आदेश तो नहीं दिया गया है, यह सब आसानी से पता किया जा सकता है।
हर तीन साल में दें ब्योरा
सीवीसी द्वारा 25 अक्तूबर को सभी मंत्रालयों व विभागों के सचिवों, सीपीएसयू, पब्लिक सेक्टर बैंक, इंश्योरेंस कंपनी और स्वायत्तता प्राप्त निकायों के चीफ एग्जीक्यूटिव को भेजे गए पत्र कहा गया है कि उक्त गाइडलाइंस का पालन ठीक तरह से नहीं हो रहा। संवदेनशील पदों पर तैनात अधिकारियों का डाटा अपडेट नहीं किया जा रहा। मंत्रालय एवं विभाग, नए संवेदनशील पदों की पहचान करने का कार्य भी नहीं कर रहे हैं। लंबे समय से यह सूची अपडेट नहीं हुई है। अब सीवीसी ने सभी मंत्रालयों और विभागों से कहा है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में संवेदनशील पदों की पहचान करें। यह सुनिश्चित करें कि ऐसे पदों का ब्योरा हर तीन साल में दे दिया जाए। डीओपीटी द्वारा एक पद पर रहने की जो गाइडलाइंस जारी की गई हैं, उनका पालन किया जाए। उसके मुताबिक अधिकारियों और कर्मियों का तबादला होना चाहिए। मंत्रालय और विभाग ने सीवीसी के इस पत्र पर क्या कार्रवाई की है, इस संबंध में आयोग को रिपोर्ट पेश की जाए।