फर्जीवाड़ा: कर्मियों ने धोखे से पास कराए हवाई यात्रा के 'एलटीसी' बिल, मिल सकता है बर्खास्तगी या जबरन रिटायरमेंट जैसा दंड
सभी मंत्रालयों और विभागों को एलटीसी दस्तावेजों की जांच-पड़ताल कर 30 सितंबर तक रिपोर्ट सौंपनी होगी। इस मामले में दोषी पाए गए कर्मियों को सेवा से बर्खास्तगी और जबरन रिटायरमेंट जैसा बड़ा दंड दिया जा सकता है...
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केंद्र सरकार के कार्मिकों को मिलने वाली 'एलटीसी' स्कीम में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में पिछले दस साल के दौरान अनेक ऐसे कर्मी रहे हैं, जिन्होंने धोखे से हवाई यात्रा के एलटीसी बिल पास कराये हैं। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग और नियंत्रक और महालेखा परीक्षक की ओर से जारी आदेशों में कहा गया है कि सभी विभागों में बिना किसी देरी के आंतरिक लेखा परीक्षा शुरू कर दी जाएं। इसमें यह पता लगाएं कि किस कर्मी ने हवाई यात्रा के फर्जी बिल लगाकर एलटीसी की राशि क्लेम की है।
साथ ही, किस कर्मी ने अनाधिकृत एजेंसी से टिकट खरीदा है, ऐसे कितने कर्मी हैं जिन्होंने तय एयरलाइंस के अलावा किसी प्राइवेट एयरलाइंस में सफर किया है। सरकारी कर्मियों द्वारा जमा कराए गए टिकटों का मिलान संबंधित एजेंसी से कराया जाएगा। सभी मंत्रालयों और विभागों को एलटीसी दस्तावेजों की जांच-पड़ताल कर 30 सितंबर तक रिपोर्ट सौंपनी होगी। इस मामले में दोषी पाए गए कर्मियों को सेवा से बर्खास्तगी और जबरन रिटायरमेंट जैसा बड़ा दंड दिया जा सकता है।
वित्त मंत्रालय ने इस बाबत 19 अप्रैल को आदेश जारी कर दिए हैं। इनमें कहा गया है कि नियंत्रक और महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में एलटीसी क्लेम को लेकर कई तरह की अनियमित्तताएं देखने को मिली हैं। बहुत से कर्मियों ने गलत तरीके से एलटीसी बिलों की राशि यानी रिम्बर्समेंट करा लिया है। अनेक कर्मी ऐसे थे, जिन्होंने असल राशि के कॉलम में छेड़छाड़ कर रखी थी। टिकट पर लिखी राशि को क्लेम फार्म में ज्यादा कीमत के साथ लिख दिया गया। मतलब किसी ने बीस हजार रुपये का टिकट खरीदी थी, मगर बिल 30 हजार का बना दिया। साथ ही जो टिकट जमा कराई, वह अनाधिकृत वेंडर से खरीदी गई थी। कुछ ऐसे मामले थे, जिनमें टिकट तो सही एजेंसी से ली थी, लेकिन एलटीसी फार्म में उसकी राशि ज्यादा दिखा दी गई। कहीं पर जाली टिकट मिली तो कहीं भुगतान का जरिया क्या रहा, इस बाबत कुछ नहीं बताया। अगर राशि लिख दी तो वहां टिकट एजेंसी का नाम गायब था।
सीएजी जांच में सामने आया कि बहुत से कर्मियों ने जो एयर टिकट जमा कराई, उन पर सर्विस टैक्स नहीं लगा था। कर्मियों ने ब्रेकअप हवाई यात्रा का टिकट जमा नहीं कराया। खास बात यह रही कि इतनी कमियां होने के बावजूद कर्मियों के बिल पास कर दिए गए। नियमानुसार, उत्तर पूर्व, जम्मू-कश्मीर और अंडमान-निकोबार में तैनात कर्मियों को प्राइवेट एयरलाइन से जाने की सुविधा मिलती है। इन्हें भी कई नियमों का पालन करना पड़ता है। इनके अलावा कोई दूसरा कर्मी सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त किसी अन्य एजेंसी से टिकट खरीदता है, तो उसके एलटीसी बिल रोक दिए जाते हैं। अब सभी मंत्रालयों से कहा गया है कि वे अपने कर्मियों को नई हिदायतें जारी करें। इसमें बताया जाए कि सभी कर्मी सस्ती दरों पर मिलने वाली टिकटें खरीदें।
केंद्रीय मंत्रालय अब एलटीसी स्कीम के दुरुपयोग पर नजर रखेंगे। भविष्य में जब भी हवाई यात्रा का बिल जमा होगा तो उसकी पड़ताल संबंधित एजेंसी या एयरलाइंस से कराई जाएगी। हालांकि यह प्रक्रिया कुछ ही मामलों में शुरू की जाएगी। इसका मकसद यह देखना रहेगा कि किसी कर्मचारी ने हवाई यात्रा के जो बिल जमा कराए हैं, वे फ़र्ज़ी तो नहीं हैं। फार्म में दी गई जानकारी में कोई गड़बड़ नहीं हैं। किसी कर्मी ने संख्या वाले कॉलम में कुछ घटाया बढ़ाया तो नहीं है। आंतरिक लेखा परीक्षा के बाद जो कर्मी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ विभाग के नियमानुसार कार्रवाई होगी। अगर किसी ने गलत तरीके से एलटीसी क्लेम की है तो उससे वसूली की जाएगी।