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केएम जोसफ पर अड़ियल रवैया अख्तियार करेगी सरकार, बने रहेंगे टकराव के आसार

Sun, 13 May 2018 02:48 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 13 May 2018 02:48 AM IST
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Central government may delay in Justice K M Joseph elevation

केंद्र सरकार उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस केएम जोसफ को सर्वोच्च अदालत का जज नियुक्त नहीं करने को लेकर अड़ियल रवैया अख्तियार कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट कोलैजियम के दोबारा सिफारिश करने पर सरकार जस्टिस जोसफ की नियुक्ति की फाइल पर निर्णय में लंबी देरी कर सकती है। 

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जानकारों के अनुसार कोलैजियम द्वारा किसी नाम पर दोबारा सिफारिश को भले ही सरकार वापस नहीं भेज सकती पर अघोषित अवधि तक निर्णय को टाल सकती है। क्योंकि सिफारिश को निर्धारित अवधि में अंजाम देने पर कोई स्पष्टता नहीं है।
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सुप्रीम कोर्ट कोलैजियम जस्टिस जोसफ के नाम को दोबारा भेजने पर 16 मई को बैठक करने वाली है। हालांकि उनका नाम अकेले नहीं, बल्कि कई और नामों के साथ सरकार भेज सकती है। अगर कोलैजियम द्वारा जस्टिस जोसफ को सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त करने की दोबारा सिफारिश भेजी जाती है तो मौजूदा व्यवस्था के तहत सरकार उसे वापस नहीं भेज सकती। 

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निर्णय लेने में अघोषित देरी

Central government may delay in Justice K M Joseph elevation

कानून मंत्रालय के सूत्रों की माने तो कोलैजियम अगर जस्टिस जोसफ के नाम पर दोबारा भेजेगी तो सबसे पहले इस पर गौर किया जाएगा कि विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद द्वारा जतायी गई आपत्तियों का जवाब भेजा गया है या नहीं। अगर आपत्तियों पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं आता तो दोबारा भेजी गई सिफारिश पर निर्णय लेने में अघोषित देरी की जा सकती है।
  
कानून मंत्री ने 26 अप्रैल को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा को एक पत्र लिखा था। इसमें जस्टिस जोसफ का नाम कोलेजियम के पास वापस भेजने के पीछे कई आधार बताए गौए थे। उन्होंने मुख्य कारण बताया था कि जस्टिस जोसफ वरिष्ठता में खरे नहीं उतरते। वह अखिल भारतीय हाईकोर्ट जज वरिष्ठता सूची में जस्टिस जोसफ 42वें नंबर पर हैं। इतना ही नहीं 11 हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस भी जस्टिस जोसफ से वरिष्ठ हैं। 

पत्र में कहा गया है कि कई वरिष्ठ व योग्य जजों के होते हुए फिलहाल जस्टिस केएम जोसफ की प्रोन्नति मुनासिब नहीं है। मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि सरकार जब तक चाहे किसी सिफारिश को रोक के रख सकती है। सिफारिश पर नियुक्ति को मंजूरी देने के लिए कोई अवधि निर्धारित नहीं है। इसका ताजा उदाहरण वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रमण्यम का है। सुब्रमण्यम ने न्यायपालिका और सरकार के आमने-सामने आने की स्थिति में खुद को इस पद की दौड़ से अलग कर लिया था। 

निर्णय में देरी पर सिर्फ रिमाइंडर

Central government may delay in Justice K M Joseph elevation

सुप्रीम कोर्ट कोलैजियम ने 11 मई को दोपहर में बैठक की थी। माना जा रहा है कि बैठक में चीफ जस्टिस मिश्रा समेत कोलैजियम के सभी सदस्यों के बीच जस्टिस जोसफ का नाम सरकार के पास दोबारा भेजने को लेकर आम सहमति बनी। हालांकि उनका नाम अकेले नहीं, बल्कि और नामों के साथ भेजना तय हुआ है। इस पर 16 मई को होने वाली अगली बैठक में निर्णय लिया जाएगा।

जानकारों की माने तो सरकार के पास अगर दोबारा जस्टिस जोसफ का नाम भेजा जाता है तो वह अड़ियल रवैया अपना सकती है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के पास सिवाय जस्टिस जोसफ के नाम पर निर्णय में देरी को लेकर सिर्फ सरकार स्मरण पत्र (रिमाइंडर) भेज सकती है। इसके अलावा निजी तौर पर चीफ जस्टिस या कोई कोलैजियम अनड्य सदस्य कानून मंत्री प्रसाद को पत्र लिख सकता है।  

गौरतलब है कि गत नौ मई को जस्टिस जे.चेलमेश्वर ने चीफ जस्टिस मिश्रा को पत्र लिखकर जल्द कोलिजयम की बैठक बुलाकर जस्टिस जोसफ का नाम दोबारा सरकार केपास भेजने का आग्रह किया था। जस्टिस चेलमेश्वर ग्रीष्मावकाश के दौरान जून में रिटायर हो रहे हैं और उनका आखिरी कार्यदिवस 18 मई है।  

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