केंद्र सरकार ने अदालत में दाखिल किया शपथ पत्र, सीलिंग से पहले दुकानदारों को मिले 15 दिन की मोहलत
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केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट दाखिल कर गुजारिश की है कि रिहायशी इलाके की दुकानों को सील करने से पहले 15 दिन की मोहलत दी जाए। इससे आम लोगों को कमेटी के सामने जरूरी दस्तावेज पेश करने में सहूलियत होगी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 2 नवंबर के आदेश में कहा था कि 48 घंटे के कारण बताओ नोटिस पर बेजा इस्तेमाल होने वाली प्रॉपर्टी को सील कर दिया जाए।
केंद्रीय आवास व शहरी मामलों के मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि मंत्रालय में इस बारे में सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट दाखिल किया है। मंत्रालय का मानना है कि 48 घंटे की नोटिस आम दिल्लीवालों पर भारी पड़ेगी। बगैर कोई दूसरा इंतजाम हुए प्रापर्टी सील होने से लोगों को भारी परेशानी होगी।
मंत्रालय ने एफिडेविट में अदालत से गुजारिश की है कि रिहायशी इलाके में दुकान चलाने या कोई दूसरी व्यावसायिक गतिविधियां चलाने वाले लोगों को 15 दिन का कारण बताओ नोटिस दिया जाना चाहिए।इसके पीछे मंत्रालय का तर्क है कि आम इंसान की अपनी निजी, सामाजिक व दूसरी कई बाध्यताओं के चलते कई बार संभव नहीं होता कि वह सभी दस्तावेज 48 घंटे में पेश कर सके। मानवीय आधार 15 दिन का वक्त आम लोगों को दिया जाना चाहिए।
जागरूकता अभियान चलाए डीडीए व एमसीडी
अदालत के आदेश के बाद मंत्रालय ने डीडीए व एमसीडी को निर्देश दिया है कि अदालत के आदेश के बारे में लोगों को जानकारी देने की जागरूकता अभियान चलाया जाए। इसके लिये मीडिया में विज्ञापन भी दिया जाए। इससे सीलिंग के दायरे में आने वाले लोगों को अदालत के आदेश की जानकारी मिलेगी और वह एहतियाती कदम उठा सकेंगे।