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Hindi-Tamil Languages Row: कनिमोझी बोलीं- तमिलनाडु में हिंदी थोपना असंभव, तमिल भाषा और संस्कृति रहेगी सुरक्षित
Mon, 15 Sep 2025 09:52 AM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मदुरई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मदुरई
Published by: पवन पांडेय
Updated Mon, 15 Sep 2025 09:52 AM IST
सार
डीएमके सांसद कनिमोझी ने केंद्र सरकार पर संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के लिए अधिक फंड देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि तमिल भाषा बहुत प्राचीन है और आज भी लोगों के बीच प्रचलन में है, जबकि संस्कृत अब आम बोलचाल की भाषा नहीं रह गई है। इसके बावजूद केंद्र सरकार संस्कृत पर भारी खर्च कर रही है।
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के. कनिमझी, सांसद, डीएमके
- फोटो : ANI
विस्तार
डीएमके सांसद कनिमोझी ने रविवार को केंद्र सरकार की भाषा नीति और हिंदी थोपने के प्रयासों को लेकर कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि तमिल भाषा न सिर्फ प्राचीन है, बल्कि आज भी जीवित और समृद्ध है, जबकि संस्कृत अब आम बोलचाल की भाषा नहीं रह गई है। इसके बावजूद केंद्र सरकार संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए बड़े पैमाने पर धन आवंटित करती है। कनिमोझी ने यह भी चेताया कि अगर किसी राज्य में स्थानीय भाषा को नजरअंदाज कर हिंदी या किसी अन्य भाषा को बढ़ावा दिया गया, तो वहां की संस्कृति और परंपरा पर खतरा मंडराने लगता है। उन्होंने महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां हिंदी के बढ़ते प्रभाव ने मराठी भाषा की अहमियत को कम कर दिया है।
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'तमिलनाडु में हिंदी थोपने की कोशिश नाकाम रही'
कनिमोझी ने कहा कि तमिलनाडु में ऐसी स्थिति कभी पैदा नहीं हुई, क्योंकि यहां के लोग हमेशा अपनी भाषा और संस्कृति की रक्षा के लिए खड़े हुए। उन्होंने कहा, 'जब हिंदी थोपने की कोशिश हुई, तो पूरे राज्य में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। तमिलनाडु के लोगों के संघर्ष की वजह से ही आज तमिल भाषा, उसकी संस्कृति और परंपराएं सुरक्षित और जीवित हैं।'
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अनुराग ठाकुर पर कनिमोझी ने ली चुटकी
डीएमके सांसद कनिमोझी ने चुटकी लेते हुए कहा कि अगर आज बच्चों से पूछा जाए कि चांद पर सबसे पहले कौन गया, तो वे नील आर्मस्ट्रॉन्ग का नाम बताएंगे। 'लेकिन कुछ उत्तरी नेता यह दावा कर सकते हैं कि सबसे पहले हमारी लोककथाओं की दादी या फिर हनुमान जी चांद पर पहुंचे थे।' उन्होंने कहा कि सौभाग्य से तमिलनाडु में ऐसे लोग सत्ता में नहीं हैं, इसलिए यहां शिक्षा और विचारधारा तथ्य और तर्क पर आधारित हैं।
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'तमिलों में कभी नहीं रहा वर्चस्व का भाव'
कनिमोझी ने तमिल समाज की ऐतिहासिक सोच पर जोर देते हुए कहा कि तमिलों ने कभी दूसरों पर अपना वर्चस्व नहीं जमाया। उन्होंने कहा 'प्राचीन काल में जब तमिल योद्धा युद्ध जीतते थे, तो वे वहां के लोगों या उनकी संस्कृति को नष्ट नहीं करते थे। तमिलों के बीच कभी भी वर्चस्व और दूसरों को दबाने की मानसिकता नहीं रही है।' डीएमके सांसद कनिमोझी का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब देश में भाषाई पहचान और केंद्र की भाषा नीति को लेकर बहस तेज है। तमिलनाडु लंबे समय से हिंदी थोपने का विरोध करता रहा है, और यह मुद्दा राज्य की राजनीति में हमेशा संवेदनशील रहा है।
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'तमिलनाडु में हिंदी थोपने की कोशिश नाकाम रही'
कनिमोझी ने कहा कि तमिलनाडु में ऐसी स्थिति कभी पैदा नहीं हुई, क्योंकि यहां के लोग हमेशा अपनी भाषा और संस्कृति की रक्षा के लिए खड़े हुए। उन्होंने कहा, 'जब हिंदी थोपने की कोशिश हुई, तो पूरे राज्य में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। तमिलनाडु के लोगों के संघर्ष की वजह से ही आज तमिल भाषा, उसकी संस्कृति और परंपराएं सुरक्षित और जीवित हैं।'
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अनुराग ठाकुर पर कनिमोझी ने ली चुटकी
डीएमके सांसद कनिमोझी ने चुटकी लेते हुए कहा कि अगर आज बच्चों से पूछा जाए कि चांद पर सबसे पहले कौन गया, तो वे नील आर्मस्ट्रॉन्ग का नाम बताएंगे। 'लेकिन कुछ उत्तरी नेता यह दावा कर सकते हैं कि सबसे पहले हमारी लोककथाओं की दादी या फिर हनुमान जी चांद पर पहुंचे थे।' उन्होंने कहा कि सौभाग्य से तमिलनाडु में ऐसे लोग सत्ता में नहीं हैं, इसलिए यहां शिक्षा और विचारधारा तथ्य और तर्क पर आधारित हैं।
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'तमिलों में कभी नहीं रहा वर्चस्व का भाव'
कनिमोझी ने तमिल समाज की ऐतिहासिक सोच पर जोर देते हुए कहा कि तमिलों ने कभी दूसरों पर अपना वर्चस्व नहीं जमाया। उन्होंने कहा 'प्राचीन काल में जब तमिल योद्धा युद्ध जीतते थे, तो वे वहां के लोगों या उनकी संस्कृति को नष्ट नहीं करते थे। तमिलों के बीच कभी भी वर्चस्व और दूसरों को दबाने की मानसिकता नहीं रही है।' डीएमके सांसद कनिमोझी का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब देश में भाषाई पहचान और केंद्र की भाषा नीति को लेकर बहस तेज है। तमिलनाडु लंबे समय से हिंदी थोपने का विरोध करता रहा है, और यह मुद्दा राज्य की राजनीति में हमेशा संवेदनशील रहा है।